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(28 Dec – 3 Jan) Euro News
रूस–यूक्रेन युद्ध: इस सप्ताह की स्थिति
रूस–यूक्रेन युद्ध को स्थायी विराम देने की दिशा में यूक्रेनी राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में 20 बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया कि अमेरिका ने यूक्रेन को 100 प्रतिशत सैन्य सुरक्षा गारंटी देने पर सहमति जताई है। साथ ही, यूरोपीय देशों को यूक्रेन के भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाने को कहा गया है। हालाँकि, इस प्रस्तावित समझौते में सबसे बड़ी बाधा रूस की वह माँग है, जिसके तहत वह यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्रों—विशेषकर डोनेट्स्क और लुहांस्क—पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है। यूक्रेन इन क्षेत्रों को सौंपने को रूस की आक्रामकता को “इनाम” देने के समान मानता है, और इसी कारण यह मुद्दा अभी तक सुलझ नहीं पाया है। शांति प्रयासों के समानांतर ज़मीनी स्तर पर तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। इस दौरान रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले तेज़ किए गए हैं, विशेष रूप से ऊर्जा और हीटिंग अवसंरचना को निशाना बनाया गया है, जिससे आम नागरिकों की कठिनाइयाँ बढ़ी हैं। इन हमलों के मद्देनज़र ज़ेलेंस्की ने तत्काल एयर डिफेंस सहायता की माँग की है। इसी बढ़ते तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति के निवास को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इस घटना के साथ ही कूटनीतिक वार्ताओं के समानांतर जारी सैन्य टकराव एक बार फिर सामने आया है।
इधर, यूरोप और अमेरिका के बीच यूक्रेन को लेकर उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। इसी क्रम में यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों के समूह “Coalition of the Willing” की एक और बैठक प्रस्तावित है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने यूक्रेन की यूरोपीय संघ की सदस्यता को उसकी दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है। हालांकि, हंगरी के विरोध के चलते यह प्रक्रिया फिलहाल अटकी हुई है। सुरक्षा को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका ने यूक्रेन को 15 वर्षों की सुरक्षा गारंटी देने की बात कही है, जबकि कीव रूस से दीर्घकालिक खतरे को देखते हुए इसे 30 से 50 वर्षों तक बढ़ाने की मांग कर रहा है। बढ़ते सैन्य दबाव के कारण यूक्रेन ने Zaporizhzhia और Dnipropetrovsk क्षेत्रों के अग्रिम इलाकों से 3,000 से अधिक बच्चों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का आदेश दिया है। खराब होती सुरक्षा स्थिति के चलते Chernihiv क्षेत्र में भी निकासी जारी है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक कुल 1.5 लाख लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में पहुँचाया जा चुका है, जिनमें लगभग 18,000 बच्चे शामिल हैं। इस बीच रूस ने Zaporizhzhia पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। यूक्रेन की वायुसेना के अनुसार, रूस ने 116 ड्रोन दागे, जिनमें से 86 को मार गिराया गया, जबकि 27 अपने लक्ष्यों तक पहुँचने में सफल रहे।
AFP के विश्लेषण के मुताबिक, वर्ष 2025 में रूस ने लगभग 5,600 वर्ग किलोमीटर यूक्रेनी क्षेत्र पर कब्जा किया है, जो 2022 के बाद सबसे अधिक है। इसके बावजूद युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में तेज़ी देखी जा रही है।
(28-12-25) Reuters
इज़राइल ने सोमालिलैंड को दी मान्यता, क्षेत्रीय राजनीति में हलचल
इज़राइल ने 26 दिसंबर 2025 को स्वयं-घोषित सोमालिलैंड को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में औपचारिक मान्यता देने वाला पहला देश बन गया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कृषि, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तत्काल सहयोग की घोषणा की और इसे अब्राहम समझौतों की भावना से जोड़ा। दोनों पक्षों ने पारस्परिक मान्यता की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। वहीं, सोमालिया और मिस्र सहित कई देशों ने इस कदम की निंदा करते हुए सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात कही। वर्ष 1991 से स्वायत्तता के बावजूद सोमालिलैंड को अब तक व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं हुई है।
(अब्राहम समझौते 2020 में हुए कूटनीतिक समझौते हैं, जिनमें कुछ अरब देशों ने इज़राइल को मान्यता दी। इनका नाम अब्राहम (इब्राहीम) पर रखा गया, जिन्हें यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों धर्मों में सम्मान मिलता है, ताकि साझा विरासत और शांति का संदेश दिया जा सके।)
(29-12-25) DTE
जलवायु परिवर्तन से बढ़ा कीट प्रकोप, वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर मंडराता खतरा
धरती पर बढ़ते तापमान के साथ दुनिया भर में फसलों पर कीटों और घुनों का हमला तेज़ी से बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन और वैश्वीकरण पर आधारित एक नए वैश्विक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि वैश्विक तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो गेहूं की पैदावार को कीटों से होने वाला नुकसान 46 फीसदी, धान को 19 फीसदी और मक्का को 31 फीसदी तक बढ़ सकता है। अध्ययन के अनुसार, बढ़ती गर्मी कीटों को तेज़ी से विकसित होने, साल में अधिक बार प्रजनन करने और नए इलाकों तक फैलने का अवसर दे रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण विदेशी आक्रामक कीट प्रजातियां भी तेजी से एक देश से दूसरे देश तक पहुंच रही हैं। Food and Agriculture Organization के मुताबिक, पौधों के रोगों और कीटों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। यह शोध Nature Reviews Earth & Environment में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने कीट निगरानी, जलवायु-अनुकूल कृषि और जैव विविधता संरक्षण को तत्काल ज़रूरी बताया है, ताकि भविष्य की खाद्य सुरक्षा को बचाया जा सके।
(29-12-25) DTE
सदी के अंत तक दुनिया के ज़्यादातर ग्लेशियर हो सकते हैं गायब: अध्ययन
जलवायु परिवर्तन का असर अब ग्लेशियरों पर साफ़ दिखाई देने लगा है। Nature Climate Change में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इस सदी के अंत तक दुनिया के अधिकांश ग्लेशियर समाप्त हो सकते हैं। शोध बताता है कि वर्तमान में दुनिया हर साल लगभग 1,000 ग्लेशियर खो रही है, लेकिन तापमान बढ़ने के साथ यह संख्या तेजी से बढ़ेगी। वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के 2,11,490 ग्लेशियरों के उपग्रह चित्रों का विश्लेषण किया। अध्ययन के मुताबिक यदि तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा गया, तब भी 2041 तक हर साल करीब 2,000 ग्लेशियर खत्म हो सकते हैं। मौजूदा नीतियों के तहत तापमान 2.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की स्थिति में 2040–2060 के बीच हर साल लगभग 3,000 ग्लेशियर गायब होने का अनुमान है। शोध में चेतावनी दी गई है कि छोटे ग्लेशियरों का खत्म होना स्थानीय जल स्रोतों, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के लिए गंभीर संकट पैदा करेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि ठोस जलवायु कदम ही इस नुकसान को सीमित कर सकते हैं।
(30-12-25) TH
रक्षा आधुनिकीकरण को बढ़ावा: ₹4,666 करोड़ के रक्षा अनुबंध
भारत के रक्षा मंत्रालय ने 30 दिसंबर 2025 को सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के तहत ₹4,666 करोड़ के रक्षा खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों के अंतर्गत भारतीय थल सेना और भारतीय नौसेना के लिए ₹2,770 करोड़ की लागत से 4.25 लाख से अधिक निकट युद्ध कार्बाइन स्वदेशी कंपनियों भारत फोर्ज लिमिटेड और पीएलआर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, भारतीय नौसेना की छह कलवरी श्रेणी (परियोजना–75) पनडुब्बियों के लिए इटली की कंपनी वास सबमरीन सिस्टम्स से ₹1,896 करोड़ में 48 भारी टॉरपीडो खरीदे जाएंगे, जिनकी आपूर्ति अप्रैल 2028 से 2030 तक की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक कुल रक्षा पूंजी अनुबंध ₹1,82,492 करोड़ तक पहुँच चुके हैं।
(1-1-26) TOI
अमेरिका का सबसे सफल प्रयोग अब ठहराव की ओर
पिछले कई दशकों में अमेरिका की स्वास्थ्य, तकनीक और शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाने में भारतीय प्रवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 1965 के बाद बदली इमिग्रेशन नीतियों के तहत बड़ी संख्या में भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर और छात्र अमेरिका पहुँचे। आज भी अमेरिकी विश्वविद्यालयों और टेक उद्योग में भारतीयों की भागीदारी स्पष्ट दिखती है। लेकिन हाल के वर्षों में भारतीयों के खिलाफ नकारात्मक माहौल तेज़ी से उभरा है। सोशल मीडिया पर भारतीयों को “कम बुद्धि वाला”, “धोखेबाज़” और “अमेरिकियों की नौकरियाँ छीनने वाला” कहकर निशाना बनाया जा रहा है। चिंता की बात यह है कि यह सोच अब केवल ऑनलाइन सीमित नहीं रही, बल्कि कुछ राजनेताओं के बयानों और नीतिगत चर्चाओं में भी दिखाई दे रही है। H-1B वीज़ा को बार-बार संदेह के घेरे में रखा जा रहा है। इन नीतियों का सीधा असर भारतीय छात्रों पर पड़ा है। अमेरिका में भारतीय छात्र सबसे बड़ा विदेशी समूह रहे हैं, लेकिन अब उनके प्रवेश में गिरावट, पढ़ाई के बाद नौकरी की अनिश्चितता और डिग्री के बावजूद देश छोड़ने का दबाव बढ़ा है। इससे अमेरिका की प्रतिभा-आधारित व्यवस्था को दीर्घकालीन नुकसान हो सकता है।
(1-1-26) TOI
सऊदी हमले के बाद यूएई का यमन से सैनिक हटाने का फ़ैसला
संयुक्त अरब अमीरात ने यमन से अपने शेष सैनिकों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। यह फ़ैसला उस घटनाक्रम के बाद आया है, जब सऊदी अरब ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर हवाई हमला किया। सऊदी अरब का कहना है कि यह हमला यूएई से आए हथियारों की खेप के बाद किया गया, जो यमन के अलगाववादी गुटों के लिए थी। इस कार्रवाई के बाद सऊदी अरब ने यूएई की गतिविधियों को “बेहद ख़तरनाक” बताया। हमले की पृष्ठभूमि में यूएई समर्थित सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल की बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ भी रही हैं। इस टकराव से दोनों सहयोगी देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। यूएई ने पहले संयम और समझदारी बरतने की अपील की और सऊदी आरोपों से असहमति जताई, लेकिन बाद में यमन से सैनिक हटाने की घोषणा कर दी। इस घटनाक्रम से यमन के लंबे युद्ध में नया मोड़ आने और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
(2-1-26) Financial Times
चीन: वैक्सीन ट्रायल के लिए बंदरों की कीमत 25 लाख रुपये तक पहुँची
चीन में वैक्सीन और मेडिकल ट्रायल की बढ़ती मांग के कारण बंदरों की कीमतों में तेज़ उछाल आया है। बीजिंग और आसपास के इलाकों में एक बंदर अब करीब 25 लाख रुपये में बिक रहा है। सरकारी एजेंसियाँ भी वैक्सीन परीक्षणों के लिए नागरिकों से बंदर खरीद रही हैं और उनके प्रजनन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं। चीन में हर साल मेडिकल और वैक्सीन ट्रायल के लिए लगभग 25 हजार बंदरों की जरूरत होती है। हाल के वर्षों में एमपॉक्स, कोरोना और कैंसर से जुड़ी वैक्सीन रिसर्च बढ़ने से मांग और बढ़ गई है। सीमित आपूर्ति के कारण कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं और बाजार में प्रतिस्पर्धा भी तेज़ हो गई है। वैक्सीन ट्रायल के लिए बंदरों की बढ़ती मांग ने नैतिक और पशु-अधिकार से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमित संख्या के कारण तस्करी और अत्यधिक प्रयोग की आशंका भी बढ़ रही है।
(02-1-26) DTE
जलवायु संकट की अलग-अलग मार: राजस्थान में भीषण गर्मी, ओडिशा में चक्रवात का कहर
भारत में जलवायु परिवर्तन अब रोज़मर्रा का अनुभव बन चुका है। Yale Program on Climate Change Communication के क्लाइमेट ओपिनियन मैप्स के अनुसार, देश के 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 634 जिलों में इसके असर समान नहीं हैं। पिछले 12 महीनों में 71 फीसदी लोगों ने भीषण गर्मी झेली। राजस्थान (80%), हरियाणा (80%), उत्तर प्रदेश (78%) और दिल्ली (76%) में इसका असर सबसे ज्यादा रहा, जबकि केरल (52%) और तमिलनाडु (55%) में अपेक्षाकृत कम। चक्रवात का राष्ट्रीय औसत 35 फीसदी रहा, लेकिन ओडिशा में 64 फीसदी लोग प्रभावित हुए। सूखा और पानी की कमी झारखंड (66%) और ओडिशा में बड़े पैमाने पर दर्ज की गई। अध्ययन के अनुसार 96 फीसदी भारतीय मानते हैं कि वैश्विक तापमान बढ़ रहा है और 81 फीसदी लोगों ने इसके प्रभाव खुद महसूस किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये राज्यवार आंकड़े जलवायु अनुकूलन और स्थानीय नीतियों के लिए अहम हैं।
(03-1-26) Euro News
ईरान में आर्थिक विरोध तेज, अमेरिका-ईरान टकराव के संकेत
ईरान में खराब होती अर्थव्यवस्था और गिरती मुद्रा रियाल के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों पर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सख्त रुख अपनाया है। सरकारी टीवी पर दिए बयान में खामेनेई ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से बातचीत हो सकती है, लेकिन “उपद्रवियों को उनकी जगह पर रखा जाना चाहिए।” उनका यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान की सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक तरीके से कुचलती है, तो अमेरिका उनकी मदद करेगा।
इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंदोलन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन 31 में से 22 प्रांतों के 100 से अधिक स्थानों तक फैल चुके हैं। खामेनेई ने बिना सबूत दिए आरोप लगाया कि इन विरोधों को अमेरिका और इज़राइल जैसे बाहरी देश भड़का रहे हैं। ट्रंप के बयान के बाद तेहरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी भी दी है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
(3-1-26) Reuters
अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति मादुरो को हिरासत में लेने का दावा किया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि 3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद वहाँ के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाया गया। इस सैन्य अभियान के स्वरूप और उसके कानूनी आधार को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। कार्रवाई के बाद वेनेजुएला की राजधानी कराकास में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आम नागरिकों में अनिश्चितता का माहौल देखा गया। वेनेजुएला प्रशासन ने इस कदम को विदेशी हस्तक्षेप बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।
(3-1-26) IE
अनैतिक फोटोग्राफी से गैलेक्सी फ्रॉग पर संकट, सात मेंढक लुप्त
केरल के पश्चिमी घाट में पाई जाने वाली दुर्लभ गैलेक्सी फ्रॉग (Melanobatrachus indicus) प्रजाति के सात मेंढकों के लुप्त होने की आशंका जताई गई है। एक अध्ययन के अनुसार, फोटोग्राफ़रों की बार-बार मौजूदगी, लकड़ियों को पलटना, मेंढकों को हाथों से उठाना और तेज़ फ्लैश का उपयोग उनके आवास और व्यवहार को नुकसान पहुँचा सकता है। 2020 में देखे गए ये मेंढक बाद की जाँचों (2021–2022) में नहीं मिले और उन्हें मृत माना गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि अनैतिक वन्यजीव फोटोग्राफी, विशेषकर दुर्लभ प्रजातियों के लिए, गंभीर खतरा बन रही है और सख़्त नियमों की ज़रूरत है।
