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- (28)Weekly News Update 26 April – 2 May 2026 (Iran war, ACR SMART TV,Cyborg Botany,Methanol-Ethanol Production)
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- (30.)Weekly News Update 10 – 16 may 2026( iran war, Pathfinder mission, sir, Taiwan issue)
- (31).Weekly News Update 17-23 may 2026 vaishvik sankat, Cuba crisis
- (32).Weekly News Update 24-30 may (Russia ukrain war update, Manipur dispute)
- (33).Weekly News Update 1june-6 june (iran war update, niger oil spoil, Quad, Mayanmar venezuela india visit)
- (34.)Weekly News Update 8-13june (Autonomous ai experiment India Road accident)
- (35.)Weekly News Update 14-20 june (iran war update(MOU SIGN), G7 summit)
- (36.)Weekly News Update 21-28 june (iran -russia-ukrain war, biochar)
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- (38.)Weekly News Update 13 -19 JULY (iran war update)
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- (40.)Weekly News Update 27July – 2 August Rome decleration-BOB cyber attack- Iran war- Google earth ai
- (41.)Weekly News Update 2 August- 9 August Makka agreement, FCRA, AI race
- (42.)Weekly News Update 10- 30 (August, mindnubming drugs education, Gorkhaland dispute, Ai news, east asia Diplomacy )
- (43.)Weekly News Update 31 Aug (America china ai & economical budget Sanghai Shikhar summit 2026)
- (44.)Weekly News Update 07 September-13September (Iran war-Falklands issue-Brics summit-Boss Scame)
- (45.)Weekly News Update (14 September-20 September) Saudi economy, RUPP donation, UK division and Gemenai hack, Anthropic bio lab
- (46.)Weekly News Update (21 September-27 September) Middle east conflict russia ukrain conflict US china meet Denmark agreement AI WORK
(21-27)
बांग्लादेश में इस सप्ताह की घटनाएँ: उभरती अस्थिरता और क्षेत्रीय प्रभाव
छात्र नेता ओस्मान हादी की मृत्यु के बाद बांग्लादेश में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला शुरू हुई। इन घटनाओं का प्रभाव विशेष रूप से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर अधिक देखा गया। देश के विभिन्न हिस्सों से मॉब लिंचिंग, घरों को जलाने तथा लक्षित हिंसा की घटनाएँ सामने आईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई स्थानों पर स्थित वीज़ा वितरण केंद्रों को शांति बहाल होने तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इन घटनाओं के दौरान बांग्लादेश सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ दिखाई दी। इसी क्रम में एक अन्य छात्र नेता, मोहम्मद मोतालेब शिकदर, को खुलना (Khulna) में सिर में गोली मारी गई। वे नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के खुलना डिविजनल प्रमुख तथा लेबर विंग के केंद्रीय आयोजक थे। यह घटना राजनीतिक तनाव के बीच तीसरा बड़ा हमला मानी जा रही है।
इसी दौरान भारत के ‘सेवन सिस्टर’ राज्यों को लेकर अलगाववादी टिप्पणियाँ भी बांग्लादेश में सार्वजनिक मंचों से की गईं। इसका प्रभाव भारत में भी देखने को मिला, जहाँ बांग्लादेश उच्चायोग सहित विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ भारतीय राज्यों में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध मॉब लिंचिंग की घटनाएँ भी सामने आईं, जिनमें भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों की भूमिका बताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर दोनों देशों की सरकारों ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। फिलहाल बांग्लादेश में अशांति और असुरक्षा का वातावरण चरम पर है, जिसके परिणामस्वरूप अनेक उद्योग, व्यापारिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक स्थल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
इसी बीच 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री के पुत्र तारिक रहमान का लगभग दो दशक बाद स्वदेश लौटना बांग्लादेश की राजनीति में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम को लेकर बांग्लादेशी मीडिया में व्यापक चर्चा हुई। प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक ढाका ट्रिब्यून ने इस संदर्भ में प्रोग्रेस मैगज़ीन के संपादक एवं नॉर्थ साउथ यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के वरिष्ठ व्याख्याता साक़िब रहमान द्वारा लिखा गया एक खुला पत्र प्रकाशित किया।(Source: BBC H)
इस ख़त में साक़िब ने लिखा है, ”आपकी पार्टी ने शुरुआत में चुनाव की मांग की थी और किसी भी सुधार के स्पष्ट रूप से ख़िलाफ़ थी. वास्तव में, हमें यह समाचार भी मिले हैं कि आपकी पार्टी के नेतृत्व ने शुरू में हसीना के अलोकतांत्रिक संविधान को जारी रखने का विकल्प चुना था.”
”मेरी बेबाकी के लिए क्षमा करें लेकिन आपके अगले प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावना का लाभ उठाकर और इस प्रकार उस अपमानजनक संविधान का पालन करना, आपकी ओर से अत्यंत लालची प्रतीत होगा. यह कहने के बावजूद, आपकी पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं में धन और सत्ता की लालसा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. यह उल्लेख न करना भी कठिन है कि पार्टी के सरकार बनाने से पहले ही पूरे देश में आपके स्थानीय नेताओं द्वारा जबरन वसूली की जा रही है.”
साक़िब ने लिखा है, ”चौथी बात यह है कि आपकी पार्टी के सत्ता में आने की संभावना संयोगवश अधिक है. केवल इसलिए कि दूसरा प्रमुख विकल्प सत्ता से हट चुका है. आप सरकार इसलिए बनाएंगे क्योंकि दूसरी बड़ी पार्टी सत्ता में नहीं है, ठीक उसी प्रकार जैसे अवामी लीग ने उन चुनावों में सरकार बनाई थी, जिनमें बीएनपी ने भाग नहीं लिया था.”
”इसलिए यह मानने का कोई ठोस कारण नहीं है कि जुलाई क्रांति के बाद पुरानी राजनीतिक प्रथाओं से मुक्ति चाहने वाले और वास्तविक बदलाव की कल्पना करने वाले हर नागरिक की पसंद बीएनपी ही है. इस बिंदु को बीएनपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने स्पष्ट करना, और उन्हें यह सलाह देना कि वे बांग्लादेश के आम लोगों को निराश न करें अत्यंत सराहनीय होगा.”
साक़िब ने लिखा है, ”एक सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र होने के नाते और 1971 के मुक्ति संग्राम की विरासत रखने वाली पार्टी के नेता के रूप में मुझे लगता है कि कोई भी नागरिक यह जानना चाहेगा कि आपको एक समय बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन क्यों करना पड़ा और क्या आपको उस निर्णय पर पछतावा है?”
”आगामी चुनावों में जमात को आपका एक मज़बूत प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है, इसलिए केवल बांग्लादेश के जन्म के विरुद्ध उनके रुख़ का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं होगा, जब तक कि बीएनपी के पास यह समझाने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय कारण न हो कि उन्हें यह बोझ क्यों उठाना पड़ रहा है.”
(26-12-25) IE
असम: पश्चिम कार्बी आंगलोंग में हिंसक झड़पें
असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग ज़िले के खेरोनी क्षेत्र में इस सप्ताह हुई हिंसक घटनाओं ने पूरे इलाके को तनावग्रस्त बना दिया है। हिंसा में दो स्थानीय निवासियों की मौत हो गई, दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हुए और कई स्थानों पर आगजनी तथा तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं। क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
इस तनाव की जड़ में भूमि और पहचान से जुड़ा विवाद है, जो मुख्य रूप से स्थानीय कार्बी जनजातीय समुदाय और गैर-कार्बी आबादी—विशेषकर बिहारी, बंगाली हिंदू और नेपाली समुदायों—के बीच है। यह क्षेत्र कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के अंतर्गत आता है और संविधान की छठी अनुसूची के तहत यहाँ जनजातीय समुदायों को विशेष संरक्षण प्राप्त है, जिसमें गैर-जनजातियों को भूमि बिक्री पर प्रतिबंध शामिल है।
विवादित भूमि मुख्यतः PGR (Professional Grazing Reserve) और VGR (Village Grazing Reserve) श्रेणी की है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से पशुचारण के लिए आरक्षित किया गया था। जनवरी 2024 में एक हिंदी-भाषी समुदाय संगठन द्वारा इन ज़मीनों पर बसे लोगों के वैधीकरण की माँग किए जाने के बाद क्षेत्र में असंतोष बढ़ा। इसके जवाब में KAAC ने फरवरी 2024 में अतिक्रमण हटाने की घोषणा की।
हालाँकि, प्रभावित निवासियों ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर कर दीं, जिस पर अदालत ने अंतरिम रोक लगाई और परिषद से भूमि की स्थिति पर स्पष्ट हलफनामा माँगा। यह स्पष्टता अब तक नहीं आ सकी है।
हालिया हिंसा उस समय भड़की जब बेदखली की माँग को लेकर अनशन कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हटाया। यह संकट अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि भूमि अधिकार, पहचान, और राजनीतिक अविश्वास से जुड़ा एक गहरा सामाजिक प्रश्न बन चुका है।
(1946 का संदर्भ और असम में भूमि-आशंका
1946 में स्वतंत्रता से पहले, मुस्लिम लीग के कुछ नेताओं ने यह विचार रखा था कि बंगाल और असम के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक बड़े मुस्लिम-बहुल क्षेत्र की कल्पना की जाए, जो आगे चलकर ईस्ट पाकिस्तान का हिस्सा हो सकता था। यह योजना कभी लागू नहीं हुई और असम भारत का ही हिस्सा बना रहा। हालांकि, इस प्रस्ताव ने असमिया समाज में एक स्थायी आशंका को जन्म दिया कि बड़े पैमाने पर बाहरी प्रवासन से जनसंख्या संतुलन बदल सकता है। यही ऐतिहासिक भय आगे चलकर भूमि, पहचान और सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़े मुद्दों से जुड़ गया। आज VGR और PGR जैसी आरक्षित ज़मीनों को लेकर सख़्ती और अतिक्रमण विरोधी नीतियों को इसी पृष्ठभूमि में देखा जाता है।)
(24-12-25)
अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर पूर्ण प्रतिबंध
अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय अनियंत्रित खनन से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान और अरावली की पारिस्थितिकी को बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार ने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) को ऐसे अतिरिक्त क्षेत्रों की पहचान करने को कहा है, जहाँ खनन पूरी तरह निषिद्ध रहेगा। इन क्षेत्रों का निर्धारण पारिस्थितिक, भूवैज्ञानिक और लैंडस्केप-स्तरीय आकलन के आधार पर किया जाएगा। साथ ही, अरावली क्षेत्र में पहले से संरक्षित और खनन-प्रतिबंधित इलाकों की सूची का भी विस्तार किया जाएगा।
वर्तमान में संचालित खदानों के लिए राज्य सरकारों को पर्यावरणीय मानकों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा, ICFRE पूरे अरावली क्षेत्र के लिए एक वैज्ञानिक सतत खनन प्रबंधन योजना तैयार करेगा, जिसमें पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्स्थापन के उपाय शामिल होंगे।
(22-12-25) Business Standard
ओडिशा में महिला किसानों की पहल: सौर कोल्ड स्टोरेज से घटा फसल नुकसान
ओडिशा के एक छोटे से गाँव में महिला किसानों के एक समूह ने बढ़ते तापमान और फसल नुकसान की चुनौती को अवसर में बदल दिया है। हर्षा ट्रस्ट के सहयोग से मारकोमा महिला किसान उत्पादक कंपनी (FPO)—जिसमें 460 से अधिक महिला किसान शामिल हैं—ने 5 मीट्रिक टन क्षमता का Ecozen सोलर-आधारित कोल्ड स्टोरेज यूनिट स्थापित किया है, जो स्थानीय सब्ज़ी उत्पादकों की सेवा कर रहा है।
इस पहल की शुरुआत 2018 में किसानों की आवश्यकताओं के विस्तृत आकलन के बाद की गई थी। बिजली पर निर्भर न रहने वाला यह सौर कोल्ड स्टोरेज कटाई के बाद सब्ज़ियों को सुरक्षित रखने में मदद करता है, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ कई दिनों तक(2–3 दिन से बढ़कर 7–10 दिन) बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप किसानों को उपज तुरंत बेचने की मजबूरी नहीं रहती और वे बेहतर दाम मिलने तक इंतज़ार कर पाते हैं।
इस पहल से पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान में उल्लेखनीय कमी, उत्पादकता में सुधार और आय में स्थिरता देखी गई है। FPO के माध्यम से संगठित विपणन और बाज़ार से सीधी कड़ियाँ जुड़ने से बिचौलियों पर निर्भरता भी घटी है। साथ ही, आसपास के गाँवों में सौर तकनीक को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
(22-12-25) Business Standard
भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता वार्ता पूरी, व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और न्यूज़ीलैंड ने सोमवार को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की। इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड भारत से होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात को शून्य शुल्क पर प्रवेश देगा और अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता जताएगा। इसके बदले भारत न्यूज़ीलैंड से आने वाले लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में छूट देगा, जिससे मूल्य के लिहाज़ से उसके 95 प्रतिशत निर्यात को लाभ होगा। हालांकि, भारत ने डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा है।
समझौता लागू होने के बाद न्यूज़ीलैंड से आयात पर भारत का औसत शुल्क अगले दस वर्षों में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह जाएगा। नौ महीनों में पूरी हुई इस वार्ता से दोनों देशों के बीच वर्तमान 2.4 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के अगले पाँच वर्षों में दोगुना होने की उम्मीद है।
हालाँकि न्यूज़ीलैंड में इस समझौते का विरोध हो रहा है क्योंकि भारत ने डेयरी उत्पादों को FTA से बाहर रखा है, जबकि यह देश का प्रमुख निर्यात क्षेत्र है। विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे “लो-क्वालिटी डील” बताया, कहते हुए कि इससे न्यूज़ीलैंड को अपेक्षित बाज़ार पहुँच नहीं मिली।
(22-12-25) TH
15 साल बाद जापान सबसे बड़े परमाणु संयंत्र को फिर शुरू करने की तैयारी
जापान सरकार 2011 के फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद बंद किए गए दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र काशिवाजाकी-कारीवा को दोबारा चालू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह संयंत्र नीगाटा प्रांत में स्थित है और इसकी कुल क्षमता 8.2 गीगावाट है। संयंत्र का संचालन टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (TEPCO) करती है, जो फुकुशिमा संयंत्र की भी संचालक रही है।
हाल ही में स्थानीय विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद एक रिएक्टर को पुनः शुरू करने का रास्ता साफ हुआ है। सरकार का मानना है कि परमाणु ऊर्जा की वापसी से ईंधन आयात पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, फुकुशिमा हादसे की यादें अब भी ताज़ा हैं और सुरक्षा को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और चिंता बनी हुई है।
(22-12-25) PTI
पाकिस्तान-चीन डिजिटल सहयोग पर 24 समझौते
पाकिस्तान और चीन ने डिजिटल सहयोग को मजबूत करने के लिए 24 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते बीजिंग में आईटी सहयोग पर संयुक्त कार्यसमूह के तहत किए गए। इनमें सरकार-से-सरकार, सरकार-से-व्यवसाय और व्यवसाय-से-व्यवसाय स्तर के समझौते शामिल हैं।
इनका उद्देश्य एक नया “डिजिटल कॉरिडोर” विकसित करना है, जिससे आईसीटी अवसंरचना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपनाने और आईटी निर्यात को बढ़ावा मिले। समझौतों के तहत पाकिस्तान के लगभग 3 लाख युवाओं को डिजिटल कौशल में प्रशिक्षित करने की योजना है। यह पहल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के दूसरे चरण के अनुरूप है और दोनों देशों के तकनीकी व आर्थिक संबंधों को और गहरा करेगी।
????️ (24-12-25) ET
कुवैत ने चीन के साथ 4.1 अरब डॉलर का बंदरगाह समझौता किया
कुवैत ने वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका बढ़ाने और अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के उद्देश्य से चीन के साथ 4.1 अरब डॉलर का समझौता किया है। इस समझौते के तहत मबारक अल-कबीर पोर्ट के निर्माण को पूरा किया जाएगा। कुवैत के स्टेट ऑडिट ब्यूरो के अनुसार, इस परियोजना का इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) अनुबंध 1.28 अरब कुवैती दिनार का है।
बुबियान द्वीप पर स्थित इस बंदरगाह परियोजना के अनुबंध पर हस्ताक्षर समारोह में प्रधानमंत्री शेख अहमद अल-अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कुवैत की हिस्सेदारी को मजबूत करेगी। चीन के कार्यवाहक राजनयिक लियू श्यांग ने कहा कि यह समझौता चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सहयोग का हिस्सा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे होंगे।
(24-12-25) the reuters
गाज़ा पर इज़राइल का रुख स्पष्ट: बस्तियाँ नहीं, सैन्य तैनाती रहेगी
इज़राइल के रक्षा मंत्री कट्ज़ ने मंगलवार को गाज़ा पट्टी में दोबारा इज़राइली बस्तियाँ बसाने के किसी भी इरादे से इनकार किया है। यह स्पष्टीकरण उनके उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इज़राइली सेना गाज़ा से पूरी तरह कभी नहीं जाएगी और वहाँ नाहल (Nahal) सैन्य इकाइयों को तैनात करने की योजना है। नाहल इकाइयाँ ऐतिहासिक रूप से इज़राइली समुदायों और बस्तियों की स्थापना से जुड़ी रही हैं, जिसके चलते उनके बयान पर विवाद खड़ा हो गया था।
कट्ज़ ने बाद में एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि सरकार का गाज़ा में नागरिक बस्तियाँ बसाने का कोई इरादा नहीं है और नाहल इकाइयों का उल्लेख केवल सुरक्षा संदर्भ में किया गया था। अमेरिका-समर्थित गाज़ा योजना, जिस पर अक्टूबर में इज़राइल और हमास सहमत हुए थे, के अनुसार इज़राइली सेना को चरणबद्ध तरीके से गाज़ा से हटना है और वहाँ दोबारा बस्तियाँ नहीं बसाई जानी हैं। हालांकि, योजना में एक इज़राइली सुरक्षा परिधि बनाए रखने का प्रावधान है।
हमास के प्रवक्ता हाज़ेम क़ासेम ने कट्ज़ के बयान को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया और कहा कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना के विपरीत है। अमेरिका ने दोहराया कि वह ट्रंप की 20-बिंदु शांति योजना के प्रति प्रतिबद्ध है और सभी पक्षों से समझौते का पालन करने की अपेक्षा करता है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में मुलाक़ात हो चुकी है, जिसमें गाज़ा युद्ध, सुरक्षा व्यवस्था और शांति प्रक्रिया के भविष्य पर चर्चा हुई थी। इस बीच, कट्ज़ ने पश्चिमी तट की बेत एल यहूदी बस्ती में 1,200 नए आवासों के निर्माण की घोषणा भी की, जिस पर फ़िलिस्तीनी पक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने आपत्ति जताई है।
????️ (24-12-25) TH
भारत के खेल भविष्य पर डोपिंग की चुनौती: आंकड़े, कारण और चिंताएँ
भारत के लिए वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की राह में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डोपिंग के बढ़ते मामले बने हुए हैं। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के 2024 के आँकड़ों के अनुसार, भारत लगातार तीसरे वर्ष डोप-पॉजिटिव मामलों में शीर्ष पर रहा। भारत में 7,113 परीक्षणों में 260 प्रतिकूल विश्लेषणात्मक निष्कर्ष (AAF) दर्ज किए गए, जो 3.6% की दर है। संख्या के लिहाज़ से फ्रांस और इटली इसके बाद रहे।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब भारत 2029 वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स और 2030 शताब्दी कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की दावेदारी भी करना चाहता है। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) का कहना है कि अधिक मामलों का कारण व्यापक परीक्षण है। NADA के अनुसार, 2024 में अब तक 7,068 परीक्षणों में 110 मामले सामने आए हैं।
हालाँकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि खेल कोटे की सरकारी नौकरियाँ और नकद पुरस्कार डोपिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत ने 2025 में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक पारित किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच NADA को अधिक स्वतंत्र और सशक्त बनाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
(25-12-25) BBC H
पाकिस्तान-लीबिया हथियार सौदे पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा
पाकिस्तान और लीबिया के बीच 4 अरब डॉलर से अधिक के संभावित हथियार सौदे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी चर्चा हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते के तहत पाकिस्तान लीबियाई नेशनल आर्मी (LNA) को हथियार और सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति करेगा। इसमें 16 जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान और 12 सुपर मुशाक ट्रेनर विमान शामिल बताए जा रहे हैं। जेएफ-17 का निर्माण पाकिस्तान और चीन ने मिलकर किया है, जबकि मुशाक विमान पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स में बनाए जाते हैं।
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक रूप से इस पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात सौदा बता रहा है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यह समझौता लीबिया पर लागू संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध के बावजूद किया गया है। लीबियाई मीडिया में भी इसे एलएनए की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करने वाला कदम बताया जा रहा है।
(26-12-25) euronews
उत्तर कोरिया 2026 में मिसाइल और गोला-बारूद उत्पादन तेज़ करेगा
उत्तर कोरिया 2026 में मिसाइल और गोला-बारूद के उत्पादन में बड़ा इज़ाफा करने की तैयारी कर रहा है। सरकारी मीडिया के अनुसार, नेता किम जोंग-उन ने हथियार कारखानों को बढ़ती सैन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने और नई गोला-बारूद फैक्ट्रियाँ बनाने के निर्देश दिए हैं। किम ने कहा कि मिसाइल और गोला-बारूद उत्पादन सैन्य प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण तेज़ किए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि प्योंगयांग सटीक हमले की क्षमता बढ़ाने, अमेरिका और दक्षिण कोरिया को चुनौती देने और हथियारों को संभावित रूप से रूस को निर्यात करने की तैयारी कर रहा है। उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस का समर्थन किया है और उसे हथियार व सैनिक भी भेजे हैं। इस बीच, प्योंगयांग ने परमाणु-संचालित पनडुब्बी की तस्वीरें जारी कर सैन्य रणनीति को और आक्रामक संकेत दिए हैं।
(26-12-25) euronews
जापान ने रिकॉर्ड रक्षा बजट को मंज़ूरी दी, सैन्य क्षमता में बड़ा विस्तार
जापान की कैबिनेट ने शुक्रवार को 9 ट्रिलियन येन से अधिक के रिकॉर्ड रक्षा बजट को मंज़ूरी दी, जिससे वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित यह बजट 2025 की तुलना में 9.4% अधिक है और हथियार खर्च को GDP के 2% तक ले जाने की पाँच वर्षीय योजना का चौथा वर्ष है।
रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि यह बजट द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे जटिल सुरक्षा माहौल में न्यूनतम आवश्यकता है। बजट में लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों, ड्रोन और तटीय रक्षा पर विशेष ज़ोर दिया गया है। इसमें टाइप-12 मिसाइलों की खरीद और बड़ी संख्या में मानवरहित हवाई, समुद्री और अंडरवॉटर ड्रोन तैनात करने की योजना शामिल है।
चीन के साथ बढ़ते तनाव और ताइवान को लेकर चिंताओं के बीच यह कदम जापान की सुरक्षा नीति में निर्णायक बदलाव माना जा रहा है, हालांकि सरकार का कहना है कि देश शांतिवादी मार्ग से नहीं हटेगा।
(26-12-25) TTI
चीन की अरुणाचल पर नजर: अमेरिकी रिपोर्ट का दावा
एक अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश को उसी तरह देखता है, जैसे वह ताइवान को देखता है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के दावों को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहा है और अरुणाचल प्रदेश को लेकर उसके दावे रणनीतिक रूप से गंभीर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास सैन्य बुनियादी ढांचे, हथियारों और सैनिकों की तैनाती को लगातार मजबूत किया है। साथ ही, चीन पाकिस्तान को आधुनिक हथियारों से लैस करना जारी रखे हुए है, जिससे दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग गहरा हुआ है और चीन पाकिस्तान में सैन्य ठिकाने स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर सकता है।
अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत-चीन संबंधों में हालिया कूटनीतिक संवाद के बावजूद, चीन की दीर्घकालिक रणनीति और मंशा को लेकर भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
चीन ने अमेरिकी रिपोर्ट को निराधार और भ्रामक बताया है। उसने कहा कि यह रिपोर्ट चीन की रक्षा नीति को गलत तरीके से पेश करती है और भारत-चीन संबंधों में दरार डालने की कोशिश है। चीन के अनुसार, सीमा मुद्दों को शांति और संवाद से सुलझाया जाना चाहिए और किसी तीसरे देश को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
(26-12-25) euronews
अमेरिका ने नाइजीरिया में इस्लामिक स्टेट ठिकानों पर शक्तिशाली हमले किए
अमेरिका ने उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े उग्रवादियों के खिलाफ “शक्तिशाली और घातक” हवाई हमले किए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये हमले उन आतंकियों के खिलाफ किए गए, जो निर्दोष नागरिकों, खासकर ईसाइयों को निशाना बना रहे थे। अमेरिकी अफ्रीका कमान (AFRICOM) ने बताया कि यह कार्रवाई अमेरिका और नाइजीरिया के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक समन्वय के तहत संयुक्त अभियान का हिस्सा थी।
इन हमलों को नाइजीरियाई सुरक्षा बलों के लिए अहम मदद माना जा रहा है, जो लंबे समय से कई सशस्त्र समूहों से जूझ रहे हैं। नाइजीरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग जारी रखेगा। हालांकि, अमेरिकी और नाइजीरियाई अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस IS-संबद्ध संगठन को निशाना बनाया गया।
(26-12-25) euronews
नाटो प्रमुख ने यूक्रेन में यूरोपीय सेनाओं के प्रस्ताव को खारिज किया
नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने यूक्रेन में यूरोपीय नेतृत्व वाली स्वतंत्र सुरक्षा व्यवस्था के प्रस्तावों को खारिज करते हुए कहा है कि सामूहिक सुरक्षा के लिए ट्रांस-अटलांटिक साझेदारी अनिवार्य बनी हुई है। जर्मन समाचार एजेंसी DPA को दिए साक्षात्कार में रुटे ने कहा कि यूरोप को रक्षा मामलों में अमेरिका से अलग होने की ज़रूरत नहीं है। यह प्रतिक्रिया यूरोपीय पीपुल्स पार्टी के प्रमुख मैनफ्रेड वेबर के उस सुझाव के बाद आई, जिसमें उन्होंने यूक्रेन में शांति सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय ध्वज के तहत सैनिक तैनात करने की बात कही थी।
रुटे ने ज़ोर देकर कहा कि यूरोपीय रक्षा प्रयासों को अमेरिका के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से। उन्होंने आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक की सुरक्षा में अमेरिका-यूरोप के साझा हितों का हवाला दिया और चेतावनी दी कि रूस 2027 तक नाटो के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को समर्थन और रक्षा खर्च बढ़ाने से ही नाटो मज़बूत रहेगा।
(27-12-25) the reuters
रूस का यूक्रेन पर भीषण हमला, शांति वार्ता से पहले कीव में तबाही
रूस ने शनिवार को यूक्रेन की राजधानी कीव और अन्य क्षेत्रों पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दिया। इस हमले में लगभग 500 ड्रोन और 40 मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे राजधानी के कई हिस्सों में बिजली और हीटिंग व्यवस्था ठप हो गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से युद्ध समाप्त करने की योजना पर अहम बातचीत करने जा रहे हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, कीव में लगभग 10 घंटे तक हवाई हमले की चेतावनी जारी रही। हमलों में राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दो लोगों की मौत हुई, जबकि 46 लोग घायल हुए, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। यूक्रेन की ऊर्जा एजेंसी उक्रएनरगो ने बताया कि देशभर में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया, जिसके चलते आपातकालीन बिजली कटौती लागू करनी पड़ी। विदेश मंत्री ने कहा कि कीव के करीब एक-तिहाई हिस्से में हीटिंग बंद हो गई, जबकि लगभग 6 लाख घरों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
इन हमलों के कारण पोलैंड के रज़ेशोव और ल्यूब्लिन हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। ज़ेलेंस्की ने इन हमलों को अमेरिका-यूक्रेन शांति प्रयासों के प्रति रूस की प्रतिक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि फ्लोरिडा में होने वाली बैठक में सुरक्षा गारंटी, क्षेत्रीय नियंत्रण और ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु संयंत्र जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
ज़ेलेंस्की के अनुसार, अमेरिका समर्थित 20-बिंदुओं वाली शांति योजना 90% तैयार है, लेकिन क्षेत्रीय मुद्दे और सुरक्षा गारंटी अब भी सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। वहीं, रूस ने इन हमलों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, हालांकि उसके अधिकारियों ने संकेत दिया है कि समाधान की दिशा में बातचीत एक “टर्निंग पॉइंट” पर पहुँच सकती है।
(27-12-25) euronews
चीन ने ताइवान को हथियार बिक्री पर अमेरिका की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए
चीन ने ताइवान को हथियार बेचने के मामले में अमेरिका के खिलाफ सख़्त कदम उठाते हुए 20 अमेरिकी रक्षा कंपनियों और 10 शीर्ष अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ताइवान को 10 अरब डॉलर (लगभग 8.6 अरब यूरो) से अधिक के हथियार बिक्री पैकेज की घोषणा के एक सप्ताह बाद की गई है।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन प्रतिबंधों के तहत संबंधित कंपनियों की चीन में मौजूद संपत्तियाँ फ्रीज़ कर दी गई हैं और चीनी व्यक्तियों व संगठनों को उनके साथ किसी भी प्रकार का लेन-देन करने से रोक दिया गया है। प्रतिबंधित कंपनियों में नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन, बोइंग और L3Harris शामिल हैं, जबकि एंडुरिल इंडस्ट्रीज़ के संस्थापक पामर लकी भी प्रतिबंधित अधिकारियों में हैं।
चीन ने कहा कि ताइवान का मुद्दा उसकी “कोर रेड लाइन” है और ताइवान को हथियार बेचने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी।
(21-12-25) Daink Bhaskar
स्वीडन: 12 वर्षीय बच्चे ने सुपारी लेकर की हत्या, गिरफ्तार
स्वीडन के माल्मो शहर में पुलिस ने एक चौंकाने वाले मामले में 12 साल के नाबालिग को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि बच्चे ने करीब 25 लाख रुपये की सुपारी लेकर एक व्यक्ति की हत्या करने का प्रयास किया। हालांकि निशाना चूक गया और गोली 21 वर्षीय एक अन्य युवक को लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
जांच में सामने आया है कि आरोपी नाबालिग सोशल मीडिया के जरिए हिंसक आपराधिक गिरोहों के संपर्क में आया था, जहां से उसे यह काम सौंपा गया। स्वीडन में इतनी कम उम्र के बच्चे द्वारा घातक गोलीबारी का यह पहला मामला माना जा रहा है।
यह घटना दर्शाती है कि संगठित अपराध अब गुप्त डिजिटल नेटवर्क और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नाबालिगों को निशाना बना रहा है। भले ही डार्क वेब का सीधा उल्लेख न हो, लेकिन अपराध का तरीका डिजिटल अंडरग्राउंड संस्कृति के फैलते प्रभाव की ओर संकेत करता है, जो कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।