- (01) Weekly News 6 – 9 october 2025
- (02) Weekly News 12 – 25 oct
- (03) Weekly News 27 – 1 nov
- (04) Weekly News 1 – 8 nov
- (05) Weekly News 10 – 15 nov
- (06) Weekly News 17 – 22 nov
- (07) Weekly News 24 – 29 Dec
- (08) Weekly News 30 Nov – 6 Dec
- (09) Weekly News 7 – 13 Dec
- (10) Weekly News 14 – 20 Dec
- (11) Weekly News 21 – 27 Dec
- (12) Weekly News 28 Dec – 3 Jan
- (13) Weekly News 4 – 10 Jan 2026
- (14) Weekly News 11 – 17 Jan
- (15) Weekly News 18 – 24 Jan
- (16) Weekly News 25 – 31 Jan
- (17) Weekly News 1 – 7 Feb
- (18) Weekly News 8-14 February 2026
- (19) Weekly News 15 – 21 Feb
- (20) Weekly News 22 Feb – 28 Feb
- (21) Weekly News 1 March – 7 March (Conflict between Iran, Israel, and the United States)
- (22) News Update 8 March – 14 March (Nepal Election 2026)
- (23) Weekly News Update 15 March – 21 March (Global E-waste report, Iran war update)
- (24) Weekly News Update 22 March – 5 April (Water Crisis | Iran War | Russia–Ukraine War)
- (25)Weekly News Update 6 April – 12 April (Iran war Update, various research)
(1-11-25) Reuters, BBC, Liveuamap (war tracking), AP news
रूस–यूक्रेन युद्ध रिपोर्ट (1–8 नवंबर 2025)
1–8 नवंबर 2025 के दौरान रूस–यूक्रेन युद्ध में सैन्य गतिविधियाँ तेज रहीं। ज़मीनी मोर्चे पर रूस ने पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क सेक्टर में आक्रामक अभियान बढ़ाया, जबकि बखमुत–क्रामातोर्स्क कॉरिडोर पर भीषण लड़ाई की खबरें जारी रहीं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर भारी नुकसान पहुँचाने का दावा किया, हालांकि स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि कठिन रही। दक्षिणी मोर्चे पर यूक्रेन ने खेरसॉन और ज़ापोरिज़िया सेक्टर में काउंटर–अटैक जारी रखा और कुछ सामरिक ऊँचाइयों पर पुनः नियंत्रण का दावा किया। समुद्री क्षेत्र में ड्रोन-बोट हमलों की घटनाएँ भी बढ़ीं।
हवाई युद्ध में रूस ने कीव, ओडेसा और खारकीव पर लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं, जबकि यूक्रेन का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस ने 60% से अधिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इस दौरान ईरानी शाहेद ड्रोन के इस्तेमाल में भी वृद्धि देखी गई। यूक्रेन ने क्राइमिया के सिवास्टोपोल नौसैनिक अड्डे पर ड्रोन हमले किए जाने का दावा किया।
बेलारूस सीमा पर रूसी बैटालियनों की तैनाती बढ़ी, जिस पर यूरोप ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता जताई। कूटनीति के मोर्चे पर NATO देशों ने यूक्रेन को नए एयर-डिफेंस सिस्टम और ड्रोन भेजने की घोषणा की, जबकि रूस ने पश्चिमी देशों पर युद्ध को लंबा करने का आरोप लगाया। चीन ने बातचीत की अपील दोहराई, पर किसी ठोस प्रगति के संकेत नहीं मिले। संयुक्त राष्ट्र में नागरिक ठिकानों पर हमले का मुद्दा उठाया गया, लेकिन कोई संयुक्त प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया।
ऊर्जा के क्षेत्र में यूक्रेन के कई बिजली संयंत्रों पर हमलों के कारण कई इलाकों में बिजली बाधित हुई और सर्दियों के मद्देनज़र संकट बढ़ने की आशंका जताई गई। आर्थिक मोर्चे पर यूक्रेन का औद्योगिक उत्पादन प्रभावित रहा, जबकि रूस ने अपनी अर्थव्यवस्था को “स्थिर” बताया। दोनों देशों ने साइबर हमलों के आरोप एक-दूसरे पर लगाते हुए चेतावनियाँ जारी कीं।
मानवीय स्थिति में बड़े पैमाने पर विस्थापन जारी रहा और UNICEF व रेड क्रॉस ने सहायता बढ़ाने की अपील की। नागरिकों और सैनिकों के नुकसान के आंकड़े अस्पष्ट रहे, और स्वतंत्र सत्यापन सीमित रहा।
(1-11-25) Al Jazeera, BBC
इज़रायल–हमास संघर्ष: 1–8 नवंबर रिपोर्ट
1 से 8 नवंबर के दौरान इज़रायल–हमास संघर्ष में हालात शांत नहीं हुए। इज़रायल ने गाज़ा के उत्तरी हिस्सों और गाज़ा सिटी के आसपास ज़मीनी अभियान जारी रखा। टैंकों, ड्रोन और पैदल सेना की मदद से सुरंगों और संदिग्ध ठिकानों पर छापे चलाए गए। दूसरी ओर, हमास की ओर से रॉकेट दागने की घटनाएँ जारी रहीं, जिनमें से बड़ी संख्या को इज़रायल के आयरन डोम सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
हवाई हमलों का सिलसिला भी जारी रहा। इज़रायल ने हमास के कमांड सेंटर, रॉकेट लॉन्च स्थलों और सुरंग नेटवर्क को निशाना बनाया। कई आवासीय इलाक़ों के पास विस्फोटों की खबरें आईं, जिससे नागरिक हताहत हुए। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन हमलों पर चिंता जताई।
मानवीय दृष्टि से स्थिति गंभीर रही। गाज़ा में हज़ारों लोग विस्थापित हुए और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने पानी, ईंधन और दवाइयों की भारी कमी की चेतावनी दी। अस्पतालों में बिजली और बेड की कमी बनी रही। राहत सामग्री पहुँचाने और मानवीय कॉरिडोर खोलने पर चर्चा जारी रही।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की मांग उठी, लेकिन किसी स्थायी समझौते का संकेत नहीं मिला। बंधकों की रिहाई को लेकर बातचीत की कोशिशों के बावजूद बड़ी प्रगति नहीं हुई। नागरिक और सैनिकों के नुकसान के स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हो सके।
(1-11-25) Al Jazeera
सूडान गृहयुद्ध : 1–8 नवंबर रिपोर्ट
सूडान में सेना (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी खार्तूम और दारफुर इलाक़ों में लगातार गोलीबारी और हवाई हमलों की खबरें मिल रही हैं। संघर्ष की वजह से लाखों नागरिक अपने घर छोड़कर पड़ोसी देशों—चाड, मिस्र और दक्षिण सूडान—की ओर जा रहे हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि भोजन, दवाओं और स्वच्छ पानी की गंभीर कमी है। कई अस्पताल बंद हो चुके हैं और स्कूल शरणस्थल बन गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी यूनियन ने युद्धविराम के लिए अपील की, लेकिन कई प्रयास अब तक विफल रहे हैं। आर्थिक हालात भी बिगड़ चुके हैं—ईंधन और खाने की चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष नहीं रुका, तो यह क्षेत्र बड़े मानवीय संकट में डूब सकता है। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच टकराव जारी है और आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
(1-11-25) Al Jazeera
इथियोपिया – अम्हारा व ओरोमिया संघर्ष : 1– 8 नवंबर रिपोर्ट
इथियोपिया में अम्हारा और ओरोमिया क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और स्थानीय विद्रोही समूहों के बीच हिंसा जारी है। पिछले सप्ताह कई जिलों में गोलीबारी, सड़क अवरोध और धमाकों की खबरें सामने आईं। सरकार ने दंगों पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त सैन्य बल भेजा, जबकि स्थानीय नागरिकों ने इंटरनेट बंद होने और आवागमन प्रतिबंध की शिकायत की। टिग्रे युद्ध समाप्त होने के बाद भी देश राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। मानवीय एजेंसियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों की ओर जा रहे हैं। सरकार ने कहा है कि वह “आंतरिक सुरक्षा बहाल” करने के लिए कदम बढ़ा रही है।
(1-11-25) BBC World
म्यांमार – सेना बनाम जातीय विद्रोही समूह : 1– 8 नवंबर रिपोर्ट
म्यांमार में सेना और जातीय विद्रोही गठबंधन के बीच लड़ाई तेज होती जा रही है। शान, कचिन और रखाइन राज्यों में विद्रोही समूहों ने कई सैन्य चौकियों पर कब्ज़ा करने का दावा किया है। जवाबी कार्रवाई में सेना ने हवाई हमलों और तोपखाने का इस्तेमाल बढ़ाया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, संघर्ष वाले इलाकों में नागरिकों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार सैन्य दमन और मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंता जताता रहा है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद देश गृहयुद्ध जैसी स्थिति में पहुँच चुका है और शांति की संभावना अभी भी दूर दिखाई देती है।
(1-11-25) BBC World
यमन – हूती और गठबंधन सेना के बीच तनाव: 1– 8 नवंबर रिपोर्ट
यमन में लंबे समय से जारी युद्ध में हाल के दिनों में फिर सक्रियता बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, हूती लड़ाकों और सरकारी गठबंधन बलों के बीच सीमावर्ती इलाकों में झड़पें हुईं। रेड सी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल गतिविधि देखी गई, जिसके बाद सऊदी अरब और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बल सतर्क हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि किसी भी नई लड़ाई से देश का मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। लाखों लोग खाद्य सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। बातचीत को फिर शुरू करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन संघर्ष कम होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं।
(1-11-25) BBC World
हैती – गैंग हिंसा और अराजक स्थिति: 1– 8 नवंबर रिपोर्ट
हैती में गैंग हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। राजधानी पोर्ट-औ-प्रिंस के कई हिस्से अब भी सशस्त्र गिरोहों के नियंत्रण में बताए जाते हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ नियमित गोलीबारी की घटनाएँ हो रही हैं। हिंसा की वजह से स्कूल, अस्पताल और बिज़नेस बंद पड़े हैं, और नागरिकों में भय का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र ने स्थिति को “अस्थिर और मानवीय संकट के करीब” बताया है। अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों ने भोजन, दवाओं और राहत सामग्री की कमी की चेतावनी दी है। राजनीतिक नेतृत्व कमजोर है, जिससे सुरक्षा बहाली के प्रयास धीमे पड़ रहे हैं।
(1-11-25) BBC World
सीरिया – उत्तरी क्षेत्र में हिंसा: 1– 8 नवंबर रिपोर्ट
सीरिया के उत्तरी इलाकों में हाल ही में सैन्य तनाव बढ़ने की खबरें हैं। तुर्की सीमा के पास विद्रोही समूहों और सरकारी बलों के बीच झड़पें देखी गईं, जबकि हवाई हमलों की भी सूचना मिली। संयुक्त राज्य समर्थित बल समय-समय पर ISIS के अवशेषों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। संघर्ष प्रभावित इलाकों से नागरिकों के विस्थापन की रिपोर्ट सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि मानवीय सहायता की कमी और सुरक्षा खतरे आम लोगों के जीवन को कठिन बना रहे हैं। देश में 2011 से चल रहे युद्ध का पूर्ण समाधान दूर नजर आता है और राजनीतिक वार्ता की प्रगति धीमी है।
(1-11-25) BBC World
कांगो (DRC) – पूर्वी प्रांत में संघर्ष : 1– 8 नवंबर रिपोर्ट
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी इलाके में M23 विद्रोही समूह और सरकारी सेना के बीच घमासान जारी है। लड़ाई मुख्य रूप से उत्तर किवू और गोमा क्षेत्र के पास केंद्रित है। कई गांवों पर नियंत्रण बदलने की रिपोर्टें सामने आई हैं, जबकि नागरिक सुरक्षा की तलाश में शिविरों की ओर भाग रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों की मौजूदगी के बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाए हैं। मानवीय संगठनों ने भोजन, पानी और आश्रय की भारी कमी की चेतावनी दी है। संघर्ष का संबंध खनिज क्षेत्रों और जातीय तनावों से जुड़ा माना जाता है, जिससे समाधान जटिल बना हुआ है।
(1-11-25) business standard
भारत और अमेरिका के बिच 10 वर्षीय रक्षा समझौते
भारत और अमेरिका ने आज एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देश उन्नत सैन्य तकनीकों के संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इंडो-पैसिफ़िक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे। समझौते का केंद्र विशेष रूप से एयरो-इंजन, ड्रोन सिस्टम, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष आधारित रक्षा निगरानी पर केंद्रित है।
समझौते में यह भी शामिल है कि भारत और अमेरिका मिलकर F-414 जेट इंजन तकनीक के सह-उत्पादन को तेज़ी से आगे बढ़ाएँगे, जिसका उपयोग भविष्य के तेजस MK-2 और अन्य स्वदेशी लड़ाकू विमानों में होगा। इसके अलावा दोनों देशों ने MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन के रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सपोर्ट के लिए भारत में एक संयुक्त सुविधा स्थापित करने पर सहमति जताई।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाएगा और भारतीय नौसेना को लंबी दूरी की रियल-टाइम सर्विलांस का बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही, दोनों देशों की सेनाओं के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट, बेस–एक्सेस और संयुक्त सैन्य अभ्यास और अधिक व्यापक होंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समझौता सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि “मेक इन इंडिया + को-डेवलपमेंट” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में सामरिक साझेदारी एक नए स्तर पर पहुँचेगी।
(1-11-25) business standard
APEC शिखर सम्मेलन
एशिया–प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में इस वर्ष 21 सदस्य देशों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य फोकस वैश्विक व्यापार मंदी(मुक्त और खुला व्यापार बनाए रखना, टैरिफ़/प्रतिबंधों के असर पर चिंता), सप्लाई-चेन सुरक्षा(दवाओं, सेमीकंडक्टर, खाद्यान्न और ऊर्जा आपूर्ति में चीन–अमेरिका प्रतिस्पर्धा के बीच “जोखिम कम करने” (de-risking) की नीति पर चर्चा, क्षेत्रीय उत्पादन नेटवर्क को विविध बनाना), डिजिटल अर्थव्यवस्था (डिजिटल व्यापार नियम, डेटा सुरक्षा, और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग पर साझा ढांचा बनाने का प्रस्ताव) और टिकाऊ विकास(कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों, स्वच्छ ऊर्जा निवेश और हरित तकनीक के ट्रांसफर, अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं और कार्बन बाज़ार को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता) पर रहा। सम्मेलन में नेताओं ने यह स्वीकार किया कि महामारी, रूस–यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व तनाव के कारण दुनिया की आर्थिक वृद्धि पर दबाव जारी है, इसलिए क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत करने की जरूरत है।
(1-11-25) The Hindu
ट्रम्प के परमाणु हथियार परीक्षण दोबारा शुरू करने की घोषणा से वैश्विक चिंताएँ बढ़ीं
33 साल बाद अमेरिका द्वारा परमाणु हथियार परीक्षण फिर शुरू करने की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल में हलचल बढ़ा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस फैसले का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में रूस ने परमाणु-सक्षम क्रूज़ मिसाइल का परीक्षण किया है और ट्रम्प की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम नए सिरे से हथियारों की दौड़ को जन्म दे सकता है, क्योंकि रूस और चीन बिना दोषारोपण के प्रतिबंध तोड़ने का रास्ता तलाश सकते हैं। इससे New START जैसी हथियार नियंत्रण संधियों पर समझौते जटिल हो सकते हैं और NPT की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। क्षेत्रीय स्तर पर आशंका है कि यदि चीन परीक्षण बढ़ाता है तो भारत और पाकिस्तान भी दबाव महसूस कर सकते हैं।
तक्षशिला संस्थान की शोधकर्ता आद्या माधवन चेतावनी देती हैं कि स्थिति को विवेकपूर्ण तरीके से संभालना जरूरी है और अमेरिका-रूस-चीन के बीच नई हथियार नियंत्रण वार्ता ही स्थिरता का रास्ता खोल सकती है।
( New START (Strategic Arms Reduction Treaty) अमेरिका और रूस के बीच 2010 में हुई एक हथियार नियंत्रण संधि है।)
(NPT (Nuclear Non-Proliferation Treaty) यह अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।)
(2-11-25) The Hindu
भारत में निपाह वायरस के विरुद्ध मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का विकास
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने योग्य संगठनों, कंपनियों और निर्माताओं से निपाह वायरस बीमारी (Nipah viral disease) के खिलाफ मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज (mAbs) के विकास और उत्पादन के लिए अभिरुचि पत्र (Expression of Interest – EoI) आमंत्रित किए हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज जो लैब में बनती हैं, वे प्राकृतिक एंटीबॉडी की तरह होती हैं जो शरीर द्वारा संक्रमण के जवाब में उत्पन्न होती हैं, और वे विशेष रूप से रोगजनक प्रोटीन या एंटीजन को निशाना बनाकर उसे निष्क्रिय कर देती हैं।
(2-11-25) AlJazeera, Reuters
अमेरिका और चीन के मध्य द्विपक्षीय समझोता
अमेरिका और चीन के मध्य द्विपक्षीय समझोता दोनों देशों द्वारा एक दुसरे पर टेरिफ वृद्धि करने और अन्य प्रतिबंधो को लगाने से उत्पन्न हुई तनाव और आर्थिक संकट को दूर करने हेतु किया गया। ये समझोता वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और असामान्य बढ़ते टेरिफ युद्ध जोखिम स्थिति तक न जाने में मददगार साबित हुआ। हालांकि ये समझोता किसी नैतिक या अधिक व्यापक समझ पर आधारित नहीं है अपितु अपने – अपने हितो की पूर्ति हेतु आपसी मान रखा गया प्रतीत होता है।
चीन ने कई प्रतिबद्धताएँ दीं। उसने दुर्लभ धातुओं (rare earth) के नए निर्यात नियंत्रण एक साल के लिए स्थगित करने का वादा किया और अगले तीन साल तक हर साल कम से कम 25 मिलियन मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदने की घोषणा की। इसके अलावा उसने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर लगाए गए कई जवाबी शुल्क और प्रतिबंधों को भी निलंबित करने और अफीम नशे की दवाओं (फेंटानिल) की सप्लाई रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का भरोसा दिया है।
अमेरिका ने इस समझौते के बदले कुछ रियायतें दीं। उसने अफीम संबंधी चीनी आयात शुल्क को आधा कर दिया (20% से घटाकर 10%), जिससे कुल आयात शुल्क 57% से 47% रह गए। साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने नए ‘एंटिटी लिस्ट’ (निर्यात नियंत्रण सूची) के नियम को एक साल के लिए रोक दिया और बंदरगाह शुल्क भी अगले वर्ष तक टाल दिए।
इस बैठक में ताईवान मुद्दे पर कोई बातचीत नही हुई ।
(3-11-25) PIB
हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2025 (Indo-Pacific Regional Dialogue 2025 – IPRD 2025)
भारत के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुरक्षा और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र से भारत का लगभग 95% व्यापार गुजरता है, इसलिए समुद्री मार्गों और सामरिक जलडमरूमध्य (हॉर्मुज़, मलक्का) की सुरक्षा आवश्यक है। SAGAR और MAHASAGAR जैसी पहलें क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ाती हैं। आर्थिक रूप से यह क्षेत्र भारत की “चाइना+1” रणनीति, आपूर्ति शृंखलाओं, IPEF और मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से निवेश और व्यापार के अवसर प्रदान करता है। ब्लू इकॉनमी और बंदरगाह परियोजनाएँ लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को मजबूत करती हैं।
हालांकि, क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा, समुद्री डकैती, जलवायु परिवर्तन, नौसैनिक क्षमता की सीमाएँ और एकीकृत रणनीति की कमी जैसी चुनौतियाँ हैं। भारत अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए नौसैनिक लॉजिस्टिक्स, कानूनी सुधार, क्षेत्रीय सहयोग, ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा और सॉफ्ट पावर के माध्यम से प्रभाव बढ़ा रहा है। SAGAR, IPOI, एक्ट ईस्ट और IPEF जैसी पहलों का समन्वय समग्र रणनीति सुनिश्चित करता है।
(4-11-25) The Hindu
ट्रैक्टर उत्सर्जन मानक (TREM)
केंद्र सरकार अक्टूबर से कृषि ट्रैक्टरों के लिए TREM स्टेज V उत्सर्जन मानक लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी से निकलने वाले हानिकारक गैसों जैसे NOx, PM, HC और CO को कम करना है। ये नियम भारत के अन्य वाहनों के लिए लागू BS (भारत स्टेज) मानकों जैसे हैं, लेकिन विशेष रूप से कृषि उपकरणों के लिए बनाए गए हैं।
किसानों का कहना है कि नए नियम लागू होने पर उन्हें नए ट्रैक्टर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उनका ऋण बढ़ेगा और आर्थिक कठिनाइयाँ बढ़ेंगी। पिछले TREM स्टेज (I से IV) के अनुभव के अनुसार, 50 HP से अधिक ट्रैक्टरों पर नए मानक लागू होने से ट्रैक्टर की कीमत में 20–25% तक वृद्धि हो सकती है।
किसान चाहते हैं कि TREM-V केवल 70 HP से अधिक ट्रैक्टरों पर लागू किया जाए, क्योंकि ये मुख्य रूप से गैर-कृषि कार्यों में उपयोग होते हैं।
(5-11-25) Indianexpress
चेतावनी की घंटियाँ: स्वच्छ और निर्मल जल के लिए प्रसिद्ध मेघालय की नदी अब मटमैली हो गई
मेघालय में अपने स्वच्छ जल के लिए प्रसिद्ध उमंगोट नदी का जल वर्तमान में मटमैला हो गया है। मानसून के बाद नदी आमतौर पर अक्टूबर के मध्य तक साफ हो जाती है, लेकिन इस वर्ष यह अपारदर्शी बनी हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) द्वारा शिलांग-डॉकी कॉरिडोर निर्माण को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। जिसके मिट्टी और मलबे इस नदी में डाला जा रहा है। ये विचारणीय है कि विकास के नाम पर मानवीय प्रयास हमेशा प्रकृति के लिये नुकसानदायक होता जा रहा है।
(5-11-25) Indianexpress
भारत के वन भविष्य का आधार हैं
IIT खड़गपुर, IIT बॉम्बे और बिट्स पिलानी के संयुक्त अध्ययन ने चेतावनी दी है कि भारत के घने जंगलों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता में आगामी वर्षों में लगभग 12% की गिरावट आ सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार तापमान में बढ़ोतरी और मिट्टी के सूखने से पेड़ों का कार्बन अवशोषण प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर देश के कार्बन सिंक और जलवायु लक्ष्यों पर पड़ेगा।
इस बीच, सरकार का ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) वन संरक्षण की प्रमुख पहल के रूप में सामने आता है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 25 मिलियन हेक्टेयर क्षरित भूमि को पुनर्स्थापित करना और 3.39 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक का निर्माण करना है। 2015 से 2021 के बीच 11.22 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया और 18 राज्यों को 575 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसके परिणामस्वरूप देश का वन और वृक्ष आवरण 2015 में 24.16% से बढ़कर 2023 में 25.17% हो गया। हालांकि, चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छत्र-कक्ष (Canopy Cover) बढ़ाने के बजाय पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, समुदाय की भागीदारी, स्थानीय प्रजातियों का उपयोग और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन अनिवार्य हैं।
(5-11-25) Indianexpress
इज़रायल के विदेश मंत्री की भारत यात्रा: रणनीतिक सहयोग पर जोर
इज़रायल के विदेश मंत्री ने 3 से 5 नवंबर 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि तकनीक और जल प्रबंधन पर व्यापक चर्चा हुई। भारत और इज़रायल ने आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने, उन्नत ड्रोन तकनीक और संयुक्त रक्षा उत्पादन की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। कृषि क्षेत्र में माइक्रो-इरिगेशन, जल पुनर्चक्रण और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए तकनीकी समाधान पर भी संयुक्त योजना तैयार की गई। स्टार्ट-अप नवाचार, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और तकनीकी हस्तांतरण पर कार्य-समूहों के गठन को गति देने का निर्णय लिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में नई प्रौद्योगिकी और रक्षा साझेदारी को और मजबूती देगी।
(6-11-25) Indianexpress, BBC
रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध यूक्रेन के बारे में नहीं, बल्कि उसके अपने शेल उद्योग के बारे में हैं
22 अक्टूबर, 2025 को अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों, रोसनेफ्ट (Rosneft) और ल्यूकोइल (Lukoil) पर प्रतिबंध लगाए, जो रूस के कुल कच्चे तेल का 57% उत्पादन करती हैं। अमेरिका द्वारा इन प्रतिबंधों का उद्देश्य यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस पर दबाव बनाना और उसके “युद्ध मशीन” के लिए राजस्व के स्रोतों को कमजोर करना है। इस निर्णय को अपने अन्य सहयोगियों द्वारा पालन करने का आग्रह किया है। हालांकि इन प्रतिबंधो का वास्तविक उद्देश्य अपने संघर्षरत शेल तेल उद्योग को बचाना है।
अमेरिकी शेल तेल का उत्पादन पारंपरिक कुओं की तुलना में अधिक महंगा है । इसे लाभदायक बने रहने के लिए तेल की कीमतों का $55 प्रति बैरल से ऊपर रहना आवश्यक है । रूस की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने से वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी आई(जो प्रति बेरल $20-$30 उत्पादन करते हैं), जिससे कच्चे तेल की कीमतें तुरंत 7.5% बढ़कर $61 से $65.6 प्रति बैरल हो गईं । कीमतों में यह वृद्धि अमेरिकी शेल उत्पादकों के लिए फायदेमंद है । इन प्रतिबंधों के बाद, भारत और चीन जैसे प्रमुख खरीदारों ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है, जिससे रूसी तेल पर छूट बढ़ गई है। उधर अमेरिका यूरोप को रूसी गैस के विकल्प के रूप में अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति बढ़ा रहा है । हालांकि, अमेरिका के पास सीमित रिफाइनिंग क्षमता है, जिससे उसके लिए रूसी तेल की कमी को पूरी तरह से पूरा करना एक चुनौती है ।
(6-11-25) Indianexpress
भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता, डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा प्राथमिकता
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह दुग्ध क्षेत्र (Dairy Sector) को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का डेयरी उद्योग लगभग 8 करोड़ किसानों की आजीविका से जुड़ा है, इसलिए किसी भी व्यापारिक राहत का निर्णय पूरी सावधानी से लिया जाएगा। न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे बड़े डेयरी निर्यातकों में से है और सस्ते विदेशी डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान की आशंका है।
गोयल ने कहा कि भारत बातचीत के लिए खुला है, लेकिन समझौता केवल तभी संभव है जब किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हित सुरक्षित रहें। हालांकि दोनों देशों के बीच IT सेवाओं, शिक्षा, कृषि-तकनीक, फार्मा और इंजीनियरिंग उत्पादों के व्यापार में बढ़े अवसर देखे जा रहे हैं। वार्ता जारी है और भारत लाभकारी व संतुलित समझौते पर जोर दे रहा है।
(7-11-25) The Hindu
भोजन में न्याय: ईट-लैंसेट आयोग की नई रिपोर्ट
यह रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान वैश्विक खाद्य प्रणाली पर्यावरण के लिए अस्थिर है और पृथ्वी की छह में से पाँच ग्रहीय सीमाओं का उल्लंघन कर रही है। भोजन उत्पादन से लगभग 30% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है, जिसमें सबसे अधिक योगदान पशु-आधारित खाद्य का है। अनाज उत्पादन में अत्यधिक नाइट्रोजन, फास्फोरस और जल उपयोग से मिट्टी और जल संकट बढ़ रहा है। समाधान के रूप में खाद्य अपव्यय कम करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और लोगों के आहार को अधिक पौध-आधारित बनाने की सिफारिश की गई है। भारत को 2050 तक फल, सब्जियों, मेवों और दालों की खपत बढ़ानी होगी, साथ ही कीमत, धर्म और सांस्कृतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर नीति सुधार करने होंगे।
(“पृथ्वी की ग्रहीय सीमाएँ (Planetary Boundaries)” एक वैज्ञानिक अवधारणा है, जो बताती है कि पृथ्वी के प्राकृतिक सिस्टम कितनी सीमा तक मानव गतिविधियों का दबाव सह सकते हैं। अगर ये सीमाएँ पार हो जाएँ, तो जलवायु, पर्यावरण और जीवन के लिए बड़ा खतरा पैदा होता है। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के लिए 9 प्रमुख सीमाएँ तय की हैं – 1.जलवायु परिवर्तन 2. मीठे पानी का उपयोग (जल संसाधन) 3. जैव विविधता का खत्म होना (प्रजातियों का नाश) 4.भूमि उपयोग में बदलाव (जंगल से खेती/उद्योग बनाना) 5.नाइट्रोजन और फॉस्फोरस प्रदूषण 6.समुद्र का अम्लीकरण 7.टॉक्सिक केमिकल्स और प्रदूषण 8.वायु प्रदूषण (एयरोसोल) 9.ओज़ोन परत का नुकसान)
Science and Technology
- वैज्ञानिकों ने विकासशील मस्तिष्क के एटलस का पहला मसौदा जारी किया (The Hindu)
वैज्ञानिकों ने विकासशील मस्तिष्क का पहला “एटलस” (मानचित्र) तैयार किया है। इसमें यह दिखाया गया है कि मस्तिष्क की अलग-अलग कोशिकाएँ भ्रूण अवस्था से वयस्क होने तक कैसे विकसित होती हैं, कैसे विभाजित होती हैं और उनके जीन कैसे काम करते हैं।
इससे निम्नलिखित बातों की जानकारी मिलती है:
- मनुष्य और अन्य जानवरों के मस्तिष्क में क्या समानता और क्या अनोखा है।
- पहले अज्ञात मस्तिष्क कोशिका प्रकारों की पहचान हुई।
- मस्तिष्क संबंधी रोगों जैसे ऑटिज़्म, ADHD और सिज़ोफ्रेनिया के कारण समझने में मदद मिलेगी।
- कुछ मस्तिष्क ट्यूमर भ्रूणीय कोशिकाओं की तरह व्यवहार करते हैं, जिससे कैंसर शोध में मदद मिल सकती है।
यह एटलस मस्तिष्क विकास और रोगों को समझने के लिए एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
- भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप और NexCAR19(PIB)
प्रधानमंत्री ने ESTIC 2025 में भारत के तीन बड़े तकनीकी और बायोटेक नवाचारों का अनावरण किया:
- QSIP (क्वांटम सिक्योरिटी इंटीग्रेटेड प्रोसेसर)
- यह भारत का पहला हार्डवेयर-आधारित क्वांटम सुरक्षा चिप है।
- डेटा को सुरक्षित रखने के लिए क्वांटम तकनीक का उपयोग करता है।
- भविष्य के क्वांटम साइबर खतरों से महत्त्वपूर्ण नेटवर्क की सुरक्षा करेगा।
- 25-क्यूबिट क्वांटम प्रोसेसिंग यूनिट (QPU)
- स्टार्टअप QpiAI ने भारत का पहला 25-क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर चिप बनाया।
- यह कंप्यूटर क्वांटम तकनीक की सभी परतों को एकीकृत करता है और उन्नत गणना में मदद करेगा।
- NexCAR19 (CAR-T सेल थेरपी)
- IIT बॉम्बे की स्पिन-ऑफ कंपनी ImmunoACT ने विकसित की।
- यह भारत की पहली स्वदेशी CAR-T सेल थेरपी है और दुनिया की पहली ह्यूमनाइज़्ड CAR-T थेरपी।
- यह Acute Lymphocytic Leukemia जैसे रक्त कैंसर के उपचार में मदद करती है।
- इसमें रोगी की T-कोशिकाओं को प्रयोगशाला में बदलकर कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने योग्य बनाया जाता है
- वैज्ञानिकों ने वर्षा की बूंदों से ऊर्जा प्राप्त करने वाला तैरता हुआ उपकरण विकसित किया जनरेटर (National Science Review, Sciencetechdaily )
वैज्ञानिकों ने एक नया फ्लोटिंग बूंद विद्युत जनरेटर विकसित किया है जो जल सतहों पर तैरते हुए उच्च विद्युत उत्पादन करता है। बारिश की बूंदें ताजा पानी का स्रोत होने के साथ-साथ अप्रयुक्त ऊर्जा भी लेकर आती हैं, जिसे बिजली में बदलने के लिए शोधकर्ता प्रयासरत थे।
पारंपरिक बूंद विद्युत जनरेटर भारी, महंगे और कम प्रभावी होते हैं क्योंकि वे ठोस आधार और धातु इलेक्ट्रोड पर आधारित होते हैं। इसके विपरीत, नया डिज़ाइन पानी को खुद आधार और चालक इलेक्ट्रोड के रूप में इस्तेमाल करता है, जिससे सामग्री का वजन लगभग 80% और लागत 50% तक कम हो जाती है।
जब बारिश की बूंदें फ्लोटिंग डाइलेक्ट्रिक सतह पर गिरती हैं, तो पानी की असंपीड़्यशीलता और सतही तनाव उनकी ऊर्जा को कुशलता से अवशोषित करते हैं। पानी में उपस्थित आयन चार्ज स्रोत का कार्य करते हैं, जिससे प्रति बूंद करीब 250 वोल्ट तक वोल्टेज उत्पन्न होता है, जो पारंपरिक डिजाइनों के बराबर है।
यह फ्लोटिंग जनरेटर कठोर पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी स्थिर रहता है, जिसमें विभिन्न तापमान, जल की नमक सांद्रता और जैविक वृद्धि शामिल हैं। इसके ड्रेनेज सिस्टम की मदद से अतिरिक्त पानी बाहर निकाला जाता है, जिससे आउटपुट में कमी नहीं आती।
शोधकर्ताओं ने 0.3 वर्ग मीटर के एक बड़े उपकरण का निर्माण किया है, जो 50 LED लाइटें एक साथ चलाने में सक्षम है। इसके साथ ही, यह सिस्टम छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वायरलेस सेंसर भी चला सकता है।
भविष्य में ऐसे उपकरणों को झीलों, जलाशयों और तटीय इलाकों में जल सतहों पर व्यापक रूप से लगाया जा सकता है।
यह डिज़ाइन न केवल हल्का और सस्ता है, बल्कि पर्यावरण के लिए अनुकूल भी है, और सौर तथा पवन ऊर्जा जैसी अन्य नवीनीकरणीय तकनीकों के साथ मिलकर काम कर सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए बूंदों के आकार और गति में विविधता जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन यह अनुसंधान आर्थिक और टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रोफेसर Wanlin Guo ने इसे भूमि-मुक्त हाइड्रोवोल्टाइक सिस्टम बताया है।
यह तकनीक प्राकृतिक सामग्रियों जैसे पानी का उपयोग कर, पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा उत्पादन में नई संभावनाएं खोलती है।







