(05) Weekly News 10 – 15 nov

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 (10-11-25) Indian express , Drishtinews

सरकारी कामकाज में GenAI पर बढ़ी चिंता, डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित केंद्र में

भारत में जेनरेटिव AI (GenAI) के तेज़ उपयोग ने केंद्र सरकार की चिंताएँ बढ़ा दी हैं, खासकर विदेशी AI प्लेटफॉर्मों के उपयोग को लेकर। सरकार का मानना है कि इन टूल्स में अनुमान जोखिम (Inference Risk) अधिक है—यानी मॉडल उपयोगकर्त्ताओं के प्रश्नों और व्यवहार से संवेदनशील नीतिगत संकेत, प्राथमिकताएँ या रणनीतिक इरादे का अनुमान लगा सकते हैं, भले ही डेटा गोपनीय रखा गया हो। इसके साथ ही विदेशी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह, डेटा गोपनीयता की कमी और डिजिटल संप्रभुता पर खतरा प्रमुख चिंताएँ हैं।

वित्त मंत्रालय सहित कई विभागों ने आधिकारिक उपकरणों पर विदेशी GenAI टूल्स के उपयोग पर रोक लगाई है। इसी बीच सरकार ‘इंडिया AI मिशन’ के तहत स्वदेशी LLM विकसित कर रही है और एक AI जोखिम मूल्यांकन ढाँचा तैयार कर रही है। प्रस्तावित उपायों में AI प्रॉम्प्ट सैनिटाइजेशन, राष्ट्रीय सिंथेटिक डेटा फैब्रिक, क्षेत्र-विशिष्ट भारतीय LLM, डेटा स्थानीयकरण और संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी AI पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य सुरक्षित, संप्रभु और भारत-केंद्रित AI इकोसिस्टम तैयार करना है।

 

(10-11-25) The Hindu

ICAR अध्ययन: जलवायु परिवर्तन और उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन तेजी से घटा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा छह वर्षों (2017-2023) तक किए गए व्यापक अध्ययन में यह सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और उर्वरकों के असंतुलित उपयोग के कारण भारत की कृषि भूमि में मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन (Soil Organic Carbon – SOC) चिंताजनक गति से कम हो रहा है। अध्ययन में देश के 620 जिलों से 2.5 लाख से अधिक मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए, जिनमें पाया गया कि कई क्षेत्रों में SOC सुरक्षित स्तर 0.5% से नीचे पहुँच गया है, जबकि कुछ इलाकों में यह 0.25% से भी कम है।

 

सबसे अधिक गिरावट उन राज्यों में दर्ज की गई जहां यूरिया और रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग होता है—जैसे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश। अध्ययन बताता है कि गलत फसल चक्र (विशेषकर गेहूं-धान एकरूप प्रणाली), जैविक पदार्थ की कमी, और बढ़ती गर्मी SOC के क्षय को तेज कर रहे हैं। इसके विपरीत, दाल आधारित और मिश्रित खेती वाले क्षेत्रों में SOC अपेक्षाकृत बेहतर पाया गया।

ICAR ने चेतावनी दी है कि कम SOC से मिट्टी की उर्वरता घटती है, फसल उत्पादन प्रभावित होता है और मिट्टी से CO₂ उत्सर्जन बढ़कर जलवायु परिवर्तन को और तेज करता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि किसानों को जैव-उर्वरक, कंपोस्ट, फसल अवशेष प्रबंधन, कार्बन संवर्धन तकनीक और क्लाइमेट-स्मार्ट खेती अपनानी चाहिए। साथ ही SOC बढ़ाने वाले किसानों को कार्बन क्रेडिट देने की भी सिफारिश की गई है ताकि मिट्टी के स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

 

 (11-11-25) Indian express

गुजरात में रिकिन जहर बनाने की साजिश का पर्दाफाश

गुजरात ATS ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके ऊपर अरंडी (castor) के बीज से Ricin नामक जानलेवा जहर तैयार करने की साजिश का आरोप है। ये आरोपी कथित रूप से भीड़-भाड़ वाले इलाकों और RSS कार्यालयों पर हमला करने की योजना बना रहे थे। रिसिन एक प्राकृतिक प्रोटीन है, जो सांस, निगलने या इंजेक्शन के माध्यम से शरीर में जाकर कोशिकाओं को प्रोटीन बनने से रोक देता है, जिससे मृत्यु हो सकती है इसका 1 मिलीग्राम भी जानलेवा हो सकता है।  इस जहर का असर शरीर की कोशिकाओं को निष्क्रिय कर देता है, और इसका कोई विशेष एंटीडोट नहीं है। मामले की जांच अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेन्सियां कर रही हैं ताकि जैव-आतंकवाद को रोका जा सके।

 

(12-11-25) PIB

भारत-पेरू व चिली व्यापारिक वार्ताएँ, लैटिन अमेरिका से आर्थिक साझेदारी मजबूत करने पर फोकस

भारत ने लैटिन अमेरिका के दो महत्त्वपूर्ण देशों—पेरू और चिली—के साथ व्यापार वार्ता के नए दौर पूरे करते हुए अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मज़बूत किया है। पेरू के साथ व्यापार समझौते की 9वीं दौर की वार्ता में वस्तुओं व सेवाओं का व्यापार, उत्पत्ति के नियम, तकनीकी मानक और महत्त्वपूर्ण खनिजों पर विशेष चर्चा हुई। पेरू, लैटिन अमेरिका में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है और द्विपक्षीय व्यापार 2023 में 3.68 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। भारत पेरू से सोना और तांबा बड़ी मात्रा में आयात करता है, जबकि तकनीकी, चिकित्सा और आपदा राहत सहयोग भी दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख हिस्सा है।

चिली के साथ CEPA वार्ता के तीसरे दौर ने भी द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा दी है। भारत–चिली व्यापार 2024 में 3.84 बिलियन डॉलर तक पहुँचा है, जिसमें भारत के मोटर वाहन, दवाइयाँ और मशीनरी प्रमुख निर्यात हैं, जबकि चिली से ताँबा, फल और खनिज आयात किए जाते हैं।

लैटिन अमेरिका भारत के लिये बढ़ते हुए व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और महत्त्वपूर्ण खनिजों का प्रमुख स्रोत बन रहा है। यह क्षेत्र भारत को तेल, लिथियम और खाद्य तेलों की विश्वसनीय आपूर्ति देता है। हालाँकि, दूरी, लॉजिस्टिक लागत, चीन से प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय संगठनात्मक कमजोरियाँ चुनौतियाँ बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर संपर्क, व्यापक व्यापार समझौते और तकनीकी सहयोग से भारत–LAC साझेदारी और गहरी हो सकती है।

 

 (13-11-25) Econoic Times

न्योमा एयरबेस

भारत ने लद्दाख के न्योमा में 13,700 फीट की ऊँचाई पर अपना सबसे ऊँचा लड़ाकू विमान-सक्षम एयरबेस शुरू किया। LAC से 35 किमी दूर यह ठिकाना सामरिक क्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया, निगरानी और लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाएगा। यह पूर्वी लद्दाख में भारत की सैन्य स्थिति को और मज़बूत करता है।

 (13-11-25) PIB

भारत–भूटान संबंध

भारत के प्रधानमंत्री ने भूटान के चौथे नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के 70वें जन्मोत्सव में भाग लेते हुए भूटान की राजकीय यात्रा की। इस दौरान दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े तीन MoUs पर हस्ताक्षर किए। भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए समर्थन और नई ऊर्जा परियोजनाओं हेतु 40 अरब रुपये की ऋण सहायता की घोषणा की। पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन हुआ और सीमा-पार संपर्क जैसे रेल और सड़क प्रोजेक्ट्स पर प्रगति की सराहना की गई। भारत ने आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित की।

 

 (14-11-25) TOI

यूपी के क्रोमियम-प्रदूषित इलाकों में सुरक्षित पेयजल की भारी कमी  

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर, कानपुर देहात और फतेहपुर जिलों में भूजल में क्रोमियम और भारी धातुओं की बेतहाशा मौजूदगी पाई गई है को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्टों में सामने आया कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं है। NGT ने पाया कि पानी की आपूर्ति बेहद कम है और कई स्थानों पर चिकित्सा परीक्षण तथा स्वास्थ्य निगरानी की सुविधाएँ भी नहीं हैं। न्यायाधिकरण ने यूपी के मुख्य सचिव को तत्काल कार्रवाई, सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति बढ़ाने, प्रदूषण रोकने और प्रभावित आबादी के लिए स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए।

 

 (15-11-25) IE

ट्रम्प–नाइजीरिया विवाद: बढ़ता कूटनीतिक तनाव

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाइजीरिया सरकार पर आरोप लगाया है कि वह देश में ईसाइयों की हत्या और हिंसा को रोकने में विफल रही है। ट्रम्प ने दावा किया कि नाइजीरिया में “क्रिस्चियन नरसंहार” हो रहा है और चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो अमेरिका नाइजीरिया को दी जाने वाली सहायता बंद कर सकता है और “तेज़ तथा कड़ा” सैन्य कदम उठाने पर विचार कर सकता है। उनके इन बयानों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है।

नाइजीरियाई सरकार ने ट्रम्प के आरोपों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि देश में हिंसा को केवल धार्मिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार नाइजीरिया की सुरक्षा चुनौतियाँ जटिल हैं, जहाँ चरवाहों और किसानों के बीच जमीन विवाद, आतंकवादी संगठन Boko Haram व ISWAP की गतिविधियाँ तथा अपराधी गिरोह समान रूप से हिंसा बढ़ाते हैं। सरकार का कहना है कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है और “राज्य-प्रायोजित” उत्पीड़न का आरोप तथ्यहीन है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रम्प का बयान नाइजीरिया की वास्तविक सुरक्षा संरचना को अत्यधिक सरल बना देता है। विश्लेषणों के अनुसार यह संकट धार्मिक नहीं बल्कि शासन, भूमि-संघर्ष, आतंकी नेटवर्क और कमजोर राज्य नियंत्रण का मिश्रित परिणाम है। यदि अमेरिका इस मुद्दे पर अपने रुख को सख्त करता है, तो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नाइजीरिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट व तथ्य-आधारित जवाब पेश करना चाहिए।

 

Science and Technology

 (10-11-25) (The Hindu)

अल्टरमैग्नेटिज़्म: चुंबकत्व का नया रूप 

वैज्ञानिकों ने चुंबकत्व का एक नया प्रकार खोजा है, जिसे अल्टरमैग्नेटिज़्म कहा जा रहा है। यह चुंबकीय व्यवहार पहले से ज्ञात फेरोमैग्नेट और एंटी-फेरोमैग्नेट — दोनों से अलग है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अल्टरमैग्नेट ऐसे पदार्थों में पाया गया है जो बाहर से चुंबक जैसे बिल्कुल नहीं दिखते, लेकिन अंदर उनके इलेक्ट्रॉन चुंबक की तरह व्यवहार करते हैं।

इस नए प्रकार की विशेषता यह है कि पदार्थ के अंदर मौजूद एटॉमिक “स्पिन” उलटी दिशाओं में होते हैं, जिससे बाहरी चुंबकीय प्रभाव पूरी तरह से खत्म हो जाता है। हालांकि, इन स्पिनों की खास व्यवस्था इलेक्ट्रॉनों को अलग तरह से चलने और प्रतिक्रिया देने पर मजबूर करती है, जिससे इस सामग्री के अंदर “चुंबकीय गुण” जीवित रहते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अल्टरमैग्नेटिज़्म भविष्य की तकनीकों — खासकर स्पिनट्रॉनिक्स, तेज़ और ऊर्जा-कुशल कंप्यूटर चिप्स तथा क्वांटम तकनीक — में बड़ी भूमिका निभा सकता है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बाहरी मैग्नेटिक फील्ड नहीं होता, जिससे यह संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज चुंबकत्व की समझ को एक नए स्तर पर ले जाती है और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

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