(20) Weekly News 22 Feb – 28 Feb

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(Feb) reuters

पाकिस्तान–अफगानिस्तान तनाव: सीमा पार हमलों से बढ़ा संघर्ष का खतरा

पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के काबुल, पक्तिका और कंधार क्षेत्रों में किए गए हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है। पाकिस्तान का दावा है कि इन हमलों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य चरमपंथी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

यह कार्रवाई हाल के वर्षों में पाकिस्तान द्वारा अपने पश्चिमी पड़ोसी देश में की गई सबसे बड़ी सैन्य घुसपैठों में से एक मानी जा रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने स्थिति को “खुली जंग” जैसी स्थिति बताया है।

अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया

अफगानिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों पर हमले किए हैं। दोनों पक्षों ने जान-माल के नुकसान की पुष्टि की है, हालांकि सटीक आंकड़े सामने नहीं आए हैं।

अफगान तालिबान सरकार ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की। साथ ही, उसने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बड़े संघर्ष के “गंभीर परिणाम” होने की चेतावनी भी दी।

आतंकवाद पर आरोप–प्रत्यारोप

पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान TTP को पनाह दे रहा है, जो उसकी आंतरिक सुरक्षा और शांति के लिए बड़ा खतरा है। इसके विपरीत, अफगान सरकार ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है और कहा है कि यह पाकिस्तान का आंतरिक मुद्दा हैं और इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पाकिस्तान अपने देश की सुरक्षा बेहतर करे.

सीमा पर लंबे संघर्ष का खतरा

दोनों देशों के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी कठिन और संवेदनशील सीमा पर लंबे समय तक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। यह क्षेत्र पहले से ही उग्रवाद और सीमा विवादों के कारण अस्थिर रहा है।

अफगानिस्तान की आंतरिक स्थिति

अफगानिस्तान इस समय शासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार, दस में से आठ अफगान परिवार जीविका चलाने के लिए घरेलू सामान तक बेचने को मजबूर हैं।

सैन्य क्षमता की तुलना

  • अफगानिस्तान: लगभग 1,72,000 सक्रिय लड़ाके; सीमित बख्तरबंद वाहन; प्रभावी वायुसेना का अभाव; गुरिल्ला युद्ध का अनुभव प्रमुख ताकत।
  • पाकिस्तान: लगभग 6,60,000 सक्रिय सैनिक; परमाणु हथियार संपन्न; लगभग 465 लड़ाकू विमान; बड़ी संख्या में टैंक, बख्तरबंद वाहन और तोपखाना।

क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव

यदि तनाव बढ़ता है, तो यह दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव डाल सकता है।

 

(27 Feb) reuters

यूएन रिपोर्ट: अफगान महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं में प्रतिबंधों का सामना

अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं पर लगाए गए विभिन्न प्रतिबंध उनके और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम का कारण बन रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार को सौपी रिपोर्ट के अनुसार, आपातकालीन उपचार तक पहुँच कई मामलों में बाधित हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार बीमार या घायल महिलाओं को ड्रेस कोड का पालन करना अनिवार्य है, उनके साथ एक पुरुष अभिभावक होना आवश्यक है और उनका उपचार पुरुष चिकित्सकों द्वारा किया जाना होता है। पुरुष अभिभावक के बिना कई मामलों में महिलाओं को एम्बुलेंस सेवा भी नहीं दी जाती।

रिपोर्ट में वर्णित एक मामले में, एक महिला को अस्पताल के गेट पर अकेले बच्चे को जन्म देने के लिए छोड़ दिया गया क्योंकि उसके साथ कोई पुरुष अभिभावक नहीं था। एक अन्य महिला अपने चार वर्षीय बेटे को खो बैठी क्योंकि वह अकेले उसके साथ अस्पताल नहीं जा सकी।

तालिबान का कहना है कि वह इस्लामी कानून की अपनी व्याख्या के अनुसार महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करता है।

2021 में सत्ता में आने के बाद तालिबान ने लड़कियों की प्राथमिक स्तर से आगे की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाया और नैतिकता संबंधी कानून लागू किए, जिनसे अभिव्यक्ति और रोजगार के अवसर भी सीमित हुए।

एक वर्ष पूर्व तक अफगानिस्तान के लगभग एक चौथाई चिकित्सा कर्मी महिलाएँ थीं। महिला चिकित्सा शिक्षा पर प्रतिबंध के कारण भविष्य में महिला स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या कम होने की आशंका है, जिससे लिंग पृथक्करण नीतियों के बीच महिला मरीजों के उपचार पर प्रभाव पड़ सकता है।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने प्रसव के दौरान मृत्यु के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार स्वास्थ्यकर्मियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण आने वाले वर्षों में मातृ और शिशु मृत्यु दर बढ़ने की आशंका है।

 

(27 Feb) reuters

दक्षिण सूडान में बढ़ती हिंसा, शांति समझौता दबाव में

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि दक्षिण सूडान बढ़ती हिंसा के कारण खतरनाक मोड़ पर है और 2018 का शांति समझौता दबाव में है। यह समझौता पाँच वर्ष के गृहयुद्ध के बाद हुआ था, जिसमें लगभग 4 लाख लोग मारे गए थे। जोंगलेई राज्य में 21 फरवरी को सेना से जुड़े तत्वों द्वारा कम से कम 16 लोगों की हत्या की पुष्टि हुई, जबकि गवाहों ने 21 नागरिकों के मारे जाने की बात कही। सरकार ने कहा कि नागरिकों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया और यदि कोई नागरिक मारा गया है तो वह गोलीबारी के दौरान फँसने के कारण हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जनवरी में 189 नागरिकों की हत्या दर्ज हुई और मानवाधिकार उल्लंघनों में 45% वृद्धि हुई। कई देशों ने जोंगलेई के पनकोर गाँव की घटनाओं पर चिंता जताई है।

 

(26 Feb) amecopress

अटलांटिक में “भूरा महाद्वीप” बना सारगैसम संकट, समुद्री पारिस्थितिकी पर बढ़ा खतरा

अटलांटिक महासागर में पिछले डेढ़ दशक में एक अभूतपूर्व पर्यावरणीय संकट उभरकर सामने आया है। समुद्र की सतह पर तैरने वाली भूरी समुद्री घास सारगैसम (Sargassum) ने अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक हजारों किलोमीटर लंबी पट्टी बना ली है। इस विशाल विस्तार को वैज्ञानिकों ने Great Atlantic Sargassum Belt (GASB) नाम दिया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार 2011 से पहले इस प्रकार का अटलांटिक-व्यापी बेल्ट मौजूद नहीं था। पहले सारगैसम मुख्य रूप से Sargasso Sea तक सीमित रहता था। लेकिन अब यह हर साल रिकॉर्ड स्तर पर फैल रहा है। हाल के वर्षों में इसका भार लगभग 3.7 करोड़ टन तक दर्ज किया गया और इसकी लंबाई करीब 8,850 किलोमीटर तक पहुँच गई।

उपग्रह आंकड़ों ने दिखाई गंभीर तस्वीर

फ्लोरिडा स्थित Harbor Branch Oceanographic Institute के शोधकर्ताओं ने 40 वर्षों के उपग्रह आंकड़ों का अध्ययन कर पुष्टि की कि यह बेल्ट 2011 के बाद ही बना। अब यह केवल मौसमी घटना नहीं, बल्कि स्थायी उपस्थिति बनती जा रही है।

तेजी से बढ़ने के पीछे कारण

विशेषज्ञों के अनुसार इस असामान्य वृद्धि का मुख्य कारण समुद्र में पोषक तत्वों (नाइट्रोजन और फॉस्फोरस) की अधिकता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में “Eutrophication” कहा जाता है।

मुख्य स्रोत:

  • कृषि उर्वरकों का बहाव
  • शहरी सीवेज
  • औद्योगिक अपशिष्ट
  • वायुमंडलीय प्रदूषण

1980 से 2020 के बीच सारगैसम में नाइट्रोजन की मात्रा लगभग 55% बढ़ी है। पोषक तत्वों से भरपूर पानी में यह समुद्री घास मात्र 11 दिनों में अपनी मात्रा दोगुनी कर सकती है।

अमेज़न नदी और समुद्री धाराओं की भूमिका

दक्षिण अमेरिका की Amazon River हर वर्ष भारी मात्रा में पोषक तत्व अटलांटिक में छोड़ती है। बाढ़ के वर्षों में यह मात्रा और बढ़ जाती है। इसके बाद समुद्री धाराएँ, विशेषकर Gulf Stream, इन शैवालों को हजारों किलोमीटर दूर तक पहुँचा देती हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है, जिससे सारगैसम की वृद्धि और तेज हो रही है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

हालाँकि सीमित मात्रा में सारगैसम मछलियों और समुद्री जीवों के लिए आवास प्रदान करता है, लेकिन अत्यधिक वृद्धि गंभीर संकट बन जाती है।

पर्यावरणीय नुकसान:

  • प्रवाल भित्तियों (coral reefs) को ढक देना
  • समुद्र तल पर ऑक्सीजन की कमी
  • “Dead Zones” का निर्माण
  • सड़ने पर हाइड्रोजन सल्फाइड और मीथेन जैसी गैसों का उत्सर्जन

आर्थिक नुकसान:

अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र के शहरों जैसे Miami और Cancún को समुद्र तटों की सफाई पर भारी खर्च करना पड़ रहा है। पर्यटन, मत्स्य उद्योग और बंदरगाह संचालन प्रभावित हो रहे हैं।

अध्ययन के अनुसार यह स्थिति एक खतरनाक चक्र बना सकती है —

समुद्र गर्म → शैवाल वृद्धि → ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन → और अधिक गर्मी

 

भारत में मिलते-जुलते संकेत

अटलांटिक जैसा विशाल सारगैसम बेल्ट भारत में नहीं है, लेकिन कुछ संकेत चिंताजनक हैं।

अरब सागर में ऑक्सीजन न्यून क्षेत्र

अरब सागर दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे समुद्री क्षेत्रों में है। यहाँ पहले से ही बड़े “ऑक्सीजन न्यून क्षेत्र” मौजूद हैं, जिससे मछलियों की मृत्यु की घटनाएँ सामने आती रही हैं।

गोवा और केरल तट पर Red Tide

हाल के वर्षों में समुद्र का पानी लाल-भूरा होने और मछलियों की सामूहिक मृत्यु की घटनाएँ दर्ज हुई हैं।

ओडिशा की चिल्का झील

चिल्का झील में समय-समय पर हरी शैवाल की अत्यधिक वृद्धि देखी गई है, जिससे मत्स्य उत्पादन प्रभावित हुआ है।

इन घटनाओं के पीछे भी वही कारण हैं —

  • उर्वरकों का बहाव
  • सीवेज प्रदूषण
  • बढ़ता समुद्री तापमान

अटलांटिक में फैला “भूरा महाद्वीप” केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री संतुलन में बदलाव का संकेत है। यदि पोषक तत्वों के प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ऐसे संकट अन्य महासागरों में भी उभर सकते हैं।

 

(27 Feb) DTE

बीकानेर में सोलर प्लांट विस्तार: बढ़ता तापमान, घटती जैव विविधता और किसानों की चिंता

राजस्थान के बीकानेर जिले में सौर ऊर्जा कंपनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। कंपनियां किसानों से जमीन 30 साल की लीज पर ले रही हैं या सीधे खरीद रही हैं। लीज दर लगभग 15,625 रुपये प्रति बीघा प्रतिवर्ष बताई जा रही है, जबकि कई गांवों में जमीन 50 हजार से 2 लाख रुपये प्रति बीघा तक खरीदी गई है। कई किसानों का कहना है कि कागजात अंग्रेज़ी में होने के कारण वे शर्तें पूरी तरह समझ नहीं पाए और बाद में उन्हें पछतावा हुआ।

                                                                   S: dte webportal

 तापमान में 3–5 डिग्री वृद्धि

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार बड़े सोलर प्लांट के केंद्र से लगभग 1000 मीटर के दायरे में तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है। सोलर पैनलों की काली सतह अधिक सौर विकिरण सोखती है, जिससे “हीट आइलैंड प्रभाव” पैदा हो रहा है। शुष्क थार क्षेत्र में यह बदलाव पौधों, पशुओं और मानव जीवन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

25 लाख पेड़ों की कटाई

अध्ययनों में सामने आया है कि जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में सौर परियोजनाओं के लिए खेजड़ी, रोहिड़ा, केर, बेर और देसी बबूल जैसे लगभग 25 लाख पेड़ काटे गए हैं। खेजड़ी थार की पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसकी कटाई से छाया, मिट्टी संरक्षण और चारे की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

जैव विविधता और पशुधन पर असर

ग्रामीणों के अनुसार पहले क्षेत्र में हिरण, मोर और नीलगाय बड़ी संख्या में दिखते थे, लेकिन अब उनकी संख्या कम हो गई है। कई स्थानों पर सांपों और छोटे जीवों के बिल कंक्रीट से भर दिए गए हैं। चारागाह खत्म होने से पशुधन में भी कमी आई है।

बिजली की नंगी तारों से गोडावन और गिद्ध जैसे पक्षियों के मरने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

जल संसाधनों पर दबाव

बीकानेर का बड़ा हिस्सा Indira Gandhi Canal के कमांड क्षेत्र में आता है। सोलर पैनलों की सफाई के लिए लाखों लीटर पानी की जरूरत पड़ती है, जिससे स्थानीय जल स्रोतों और खेतों की सिंचाई पर असर पड़ने की आशंका है। 2014 से 2022 के बीच इस क्षेत्र में जल निकाय 100 से घटकर गिने चुने ही बचे हैं।

बीकानेर में सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक कदम हैं, लेकिन इनके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।

 

(27 Feb) DTE

आर्कटिक में घटती समुद्री बर्फ से भारत के मानसून पैटर्न में बदलाव: अध्ययन

उत्तरी ध्रुव (आर्कटिक) क्षेत्र में तेजी से घटती समुद्री बर्फ का संबंध भारत के मानसूनी वर्षा पैटर्न में बदलाव से पाया गया है। यह निष्कर्ष भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है, जो अंतरराष्ट्रीय जर्नल Ocean-Land-Atmosphere Research में प्रकाशित हुआ है।

1979 से 2022 तक के 43 वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि जून–जुलाई के दौरान आर्कटिक समुद्री बर्फ जितनी कम होती है, अगस्त–सितंबर में भारत में मानसूनी वर्षा उतनी अधिक और तीव्र होती है। अध्ययन के अनुसार भारी वर्षा का क्षेत्र धीरे-धीरे पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत की ओर खिसक रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार आर्कटिक में बर्फ पिघलने से पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन तथा ऊपरी वायुमंडलीय हवाओं और दबाव के पैटर्न में बदलाव आता है, जिससे दक्षिण एशियाई मानसून की दिशा और तीव्रता प्रभावित होती है।

अध्ययन में पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत में बाढ़ जोखिम बढ़ने, मध्य और पूर्वी भारत में वर्षा कमी की संभावना तथा खरीफ फसलों, जलाशय प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति और शहरी बाढ़ पर संभावित प्रभाव का उल्लेख किया गया है।

 

(26 Feb) TH

कक्षा 8 की NCERT पुस्तक पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, न्यायपालिका पर अध्याय विवादित

उच्चतम न्यायालय ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। पुस्तक में शामिल अध्याय “The Role of the Judiciary in Our Society” में न्यायपालिका से जुड़े मुद्दों, जिनमें भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का बोझ और न्यायाधीशों की कमी का उल्लेख था, को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पुस्तक की सभी प्रतियाँ तत्काल जब्त करने और दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की सामग्री छात्रों के समक्ष पक्षपातपूर्ण धारणाएँ प्रस्तुत कर सकती है और न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा प्रभावित हो सकती है।

हालाँकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में वैध आलोचना और असहमति आवश्यक है और न्यायपालिका आलोचना से परे नहीं है।

इस बीच NCERT ने माफी जारी करते हुए पुस्तक का वितरण रोक दिया है और विवादित अध्याय को पुनर्लेखन करने की बात कही है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि बिना शर्त माफी प्रकाशित की जाएगी और अध्याय तैयार करने वाले व्यक्तियों को भविष्य की शैक्षणिक सामग्री से अलग किया जाएगा। अदालत ने शिक्षा विभाग के सचिव और NCERT निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए।

 

(28 Feb) aljazeera

ईरान पर हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा

शनिवार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विभिन्न ठिकानों, जिनमें राजधानी तेहरान भी शामिल है, पर संयुक्त सैन्य हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव तेज हो गया है। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल की ओर मिसाइलें दागीं और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार क़तर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में विस्फोटों की घटनाएँ सामने आईं, जिसके बाद कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम के बीच अमेरिका सहित कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की है। खाड़ी क्षेत्र में नागरिकों को घरों के भीतर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

भारत ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम और संवाद का आग्रह किया है। चीन और रूस ने सैन्य कार्रवाई रोकने और कूटनीतिक समाधान की अपील की है, जबकि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता जताई है। सऊदी अरब, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात ने अपने क्षेत्रों पर हमलों की निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

 

(27 Feb) reuters

अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प के दावों से असहमत अधिकांश नागरिक: सर्वे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और महंगाई पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने इसे “अमेरिका का स्वर्ण युग” बताया।

                                                        S: Reuters

हालांकि, Reuters/Ipsos के एक सर्वे के अनुसार अधिकांश अमेरिकी नागरिक इस दावे से सहमत नहीं हैं। सर्वे में 68% लोगों ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था बूम नहीं कर रही है।

सर्वे के अनुसार रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद हैं। 56% रिपब्लिकन ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया, जबकि 43% ने असहमति जताई।

महंगाई के मुद्दे पर केवल 16% लोगों ने कहा कि अमेरिका में महंगाई लगभग समाप्त हो चुकी है, जबकि 82% लोगों ने कहा कि महंगाई अभी भी एक समस्या है। 72% रिपब्लिकन ने भी महंगाई को समस्या माना।

सर्वे में शामिल लोगों ने जीवन-यापन की लागत को नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में मतदान का मुख्य मुद्दा बताया।

सर्वे के अनुसार 44% लोगों ने निवेश कंपनियों द्वारा एकल परिवार वाले घर खरीदने पर रोक संबंधी व्हाइट हाउस की योजना के बारे में नहीं सुना था, जबकि 48% लोगों को क्रेडिट कार्ड ब्याज दर 10% करने के प्रस्ताव की जानकारी नहीं थी।

इसके विपरीत, 78% लोगों ने आयातित वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने की नीति के बारे में सुना था। 54% उत्तरदाताओं ने कहा कि टैरिफ बढ़ने से जीवन-यापन की लागत बढ़ सकती है।

यह सर्वे ऑनलाइन आयोजित किया गया था, जिसमें अमेरिका भर के 4,638 वयस्कों ने भाग लिया। सर्वे की त्रुटि सीमा ±2% बताई गई है।

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