(23) Weekly News Update 15 March – 21 March (Global E-waste report, Iran war update)

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(16 March)

थाईलैंड में 284 टन ई-कचरा जब्त, Global E-waste Monitor 2024 में बढ़ते संकट का संकेत

अमेरिका से आया करीब 284 टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा थाईलैंड के लाएम चाबांग बंदरगाह पर अवैध रूप से पकड़ा गया है। यह कचरा 12 कंटेनरों में लाया गया था, जिसे अब वापस अमेरिका भेजने की तैयारी की जा रही है।

जांच में सामने आया कि इस शिपमेंट को ‘स्क्रैप मेटल’ के रूप में घोषित किया गया था और इसे हैती से आया दिखाकर अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की गई। निरीक्षण के दौरान कंटेनरों में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) जैसे खतरनाक ई-कचरे पाए गए।

थाईलैंड ने इस कार्रवाई को अवैध कचरे के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया है। साथ ही, पारगमन में मौजूद सैकड़ों (700+) अन्य कंटेनरों की भी निगरानी की जा रही है ताकि देश को वैश्विक कचरा डंपिंग का केंद्र बनने से रोका जा सके।

तस्करी का बढ़ता नेटवर्क

थाईलैंड लंबे समय से अवैध ई-कचरे की तस्करी का निशाना रहा है। संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य एवं अपराध कार्यालय (UNODC) के अनुसार, वर्ष 2018 के बाद इस प्रकार के अवैध व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

हाल के मामलों में:

  • मई 2025: “ऑपरेशन कैन ओपनर” के तहत बैंकॉक बंदरगाह पर अमेरिका से आए 238 मीट्रिक टन ई-कचरे को जब्त किया गया
  • जनवरी 2025: लाएम चाबांग में ही जापान और हांगकांग से आए 256 टन ई-कचरे को रोका गया

रिपोर्टो के अनुसार इस तरह के शिपमेंट अक्सर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हैं और पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

(बासेल कन्वेंशन (1989, प्रभावी 1992) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य खतरनाक कचरे के सीमा-पार परिवहन और निपटान को नियंत्रित करना है। इसके तहत किसी भी ऐसे कचरे को दूसरे देश में भेजने से पहले पूर्व-सूचित सहमति (Prior Informed Consent – PIC) लेना अनिवार्य होता है, और यदि कोई शिपमेंट अवैध पाया जाता है तो उसे मूल देश द्वारा वापस लेना आवश्यक होता है।)

दुनियाभर में तेजी से बढ़ते ई-कचरे (E-waste) का मुद्दा पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इस संदर्भ में Global E-waste Monitor 2024” रिपोर्ट महत्वपूर्ण आंकड़े और विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह रिपोर्ट ई-कचरे के उत्पादन, संग्रह, पुनर्चक्रण और नीतिगत प्रयासों की वर्तमान स्थिति को समझने में मदद करती है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. ई-कचरे का उत्पादन (Generation)
  • रिकॉर्ड वृद्धि: 2022 में दुनिया भर में 62 मिलियन टन (Mt) ई-कचरा पैदा हुआ। यह 2010 की तुलना में 82% अधिक है।
  • भविष्य का अनुमान: यह आंकड़ा 2030 तक बढ़कर 82 मिलियन टन होने की उम्मीद है।
  • प्रति व्यक्ति कचरा: औसतन, दुनिया में हर व्यक्ति सालाना 7.8 किलोग्राम ई-कचरा पैदा कर रहा है।
  1. रीसाइक्लिंग की स्थिति (Recycling)
  • बड़ा अंतर: ई-कचरा पैदा होने की गति, उसे रीसायकल करने की गति से 5 गुना तेज़ है।
  • कम रीसाइक्लिंग: कुल कचरे का केवल 22.3% ही आधिकारिक तौर पर इकट्ठा और सही तरीके से रीसायकल किया जा पा रहा है।
  • आर्थिक नुकसान: हर साल लगभग $62 बिलियन (अरब डॉलर) मूल्य के कीमती संसाधन (जैसे सोना, तांबा और लोहा) बिना रीसायकल हुए नष्ट हो जाते हैं या फेंक दिए जाते हैं।

  1. क्षेत्रीय स्थिति (Regional Breakdown)
क्षेत्र कचरा उत्पादन (प्रति व्यक्ति) रीसाइक्लिंग दर
यूरोप 17.6 किग्रा 42.8% (सबसे अधिक)
ओशिनिया 16.1 किग्रा 41.4%
अमेरिका 14.1 किग्रा 30.0%
एशिया 6.4 किग्रा 11.8% (कुल मात्रा में सबसे ज़्यादा कचरा यहीं पैदा होता है)
अफ्रीका 2.5 किग्रा <1% (सबसे कम)

 

2022 में अलग-अलग देशों में ई-कचरे को इकट्ठा करने और रीसायकल करने की स्थिति काफी अलग रही। यूरोप में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा ई-कचरा (17.6 किलो) बना और वहीं सबसे ज्यादा हिस्सा (करीब 42.8%) सही तरीके से इकट्ठा करके रीसायकल भी किया गया। जबकि अफ्रीकी देशों में स्थिति बहुत खराब रही, जहाँ 1% से भी कम ई-कचरा सही तरीके से इकट्ठा और रीसायकल किया गया।

  1. भारत की स्थिति
  1. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा पैदा करने वाला देश है (चीन और अमेरिका के बाद)।
  2. 2021-22 में भारत में ई-कचरे की मात्रा बढ़कर 1.6 मिलियन टन हो गई थी।
  1. वैश्विक ई-कचरा विधान, नीति या विनियमन

वैश्विक स्तर पर ई-कचरा प्रबंधन के लिए नीतियों और नियमों का विस्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाया है। जून 2023 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के केवल 81 देशों (करीब 42%) में ही ई-कचरे से जुड़ी नीति, कानून या नियम लागू हैं, जो ITU के 2023 तक 50% (97 देशों) के लक्ष्य से कम है। इन 81 देशों में से:

  • 67 देशों ने Extended Producer Responsibility (EPR) सिद्धांत लागू किया है (यानी उत्पाद बनाने वाली कंपनी भी उसके कचरे की जिम्मेदार होगी)
  • 46 देशों ने ई-कचरा संग्रह (collection) के लक्ष्य तय किए हैं
  • 36 देशों ने ई-कचरे के रीसायक्लिंग के राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए हैं

भारत में ई-कचरा प्रबंधन की स्थिति

भारत में ई-कचरा प्रबंधन के लिए नियम मौजूद हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन और प्रभाव अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

  1. ई-कचरा प्रबंधन के नियम

भारत में ई-कचरे के लिए पहली बार 2011 में नियम बनाए गए थे, जिन्हें 2016 में और मजबूत किया गया। वर्तमान में E-Waste (Management) Rules, 2022 लागू हैं, जो 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हैं।

  1. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)

भारत ने Extended Producer Responsibility (EPR) को लागू किया है। इसके तहत मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने उत्पादों के कचरे को वापस इकट्ठा करें और उसका रीसायक्लिंग सुनिश्चित करें। नए नियमों में कंपनियों के लिए हर साल रीसायक्लिंग के लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं।

  1. उत्पादन और रीसायक्लिंग की स्थिति

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा उत्पादक देश है, जहाँ हर साल लगभग 1.6 से 1.7 मिलियन टन ई-कचरा उत्पन्न होता है। हालांकि, इसका केवल 25% से 33% हिस्सा ही औपचारिक रूप से इकट्ठा और रीसायक्ल किया जाता है, जो एक बड़ी चुनौती को दर्शाता है।

  1. प्रमुख चुनौतियाँ

भारत में ई-कचरा प्रबंधन के सामने कई समस्याएँ मौजूद हैं:

  • अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व: लगभग 90% ई-कचरा अभी भी कबाड़ियों और असंगठित क्षेत्र द्वारा संभाला जाता है, जहाँ असुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल होता है
  • जागरूकता की कमी: आम लोगों में ई-कचरे के सही निपटान को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है
  1. सरकारी पहल

सरकार ने ई-कचरे की निगरानी के लिए डिजिटल ट्रैकिंग पोर्टल शुरू किया है, जिससे कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, नियमों का पालन न करने पर कंपनियों पर पर्यावरणीय जुर्माना (Environmental Compensation) लगाने का प्रावधान भी किया गया है।

  1. आर्थिक प्रभाव

वर्ष 2022 में ई-कचरे के प्रबंधन का कुल आर्थिक प्रभाव 37 अरब डॉलर (USD 37 billion) का नुकसान रहा। इसमें मुख्य खर्च 78 अरब डॉलर का है, जो पर्यावरण और लोगों पर पड़े नुकसान से जुड़ा है। यह नुकसान मुख्य रूप से:

  • सीसा (lead) और पारा (mercury) के उत्सर्जन
  • प्लास्टिक प्रदूषण
  • और ग्लोबल वार्मिंग में योगदान

के कारण होता है, खासकर तब जब खतरनाक पदार्थों को सही तरीके से संभाला नहीं जाता।

  1. 2030 तक ई-कचरे का बढ़ता संकट और भविष्य की चुनौतियाँ

रिपोर्ट में भविष्य के लिए 2030 तक चार संभावित स्थिति (scenarios) बनाई गई हैं:

  1. सामान्य स्थिति (Business as usual)
  2. प्रगतिशील (Progressive)
  3. महत्वाकांक्षी (Ambitious)
  4. आदर्श (Aspirational)

अनुमान है कि 2030 तक दुनिया में 82 अरब किलोग्राम (82 billion kg) ई-कचरा पैदा होगा। अगर वर्तमान स्थिति (Business as usual) बनी रहती है, तो औपचारिक रूप से इकट्ठा और रीसायकल होने वाला ई-कचरा घटकर 20% रह जाएगा।

जबकि 2022 में यह दर 22.3% थी, जिससे साफ है कि दुनिया ITU के 2023 के 30% लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगी।

चुनौतियाँ

  • जहरीले पदार्थ: ई-कचरे में पारा (Mercury), सीसा (Lead) और कैडमियम जैसे खतरनाक तत्व होते हैं, जो मिट्टी और पानी को प्रदूषित करते हैं।
  • अवैध व्यापार: लगभग 5.1 मिलियन टन ई-कचरा हर साल सीमाओं के पार भेजा जाता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा विकसित देशों से विकासशील देशों की ओर अवैध रूप से जाता है।
  • दुर्लभ संसाधन: आधुनिक तकनीक के लिए जरूरी ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ की मांग का केवल 1% हिस्सा ही ई-कचरे की रीसाइक्लिंग से पूरा हो पाता है।

सन्दर्भ :

 

(1- 21 March)

ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष: प्रमुख घटनाएँ और विस्तार (1–21 मार्च 2026)

28 फरवरी 2026 को शुरू हुए बड़े सैन्य हमलों के बाद ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच संघर्ष तेजी से एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल गया। इस दौरान केवल सैन्य ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि missile infrastructure, energy facilities, internal security systems और Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण maritime routes तक को निशाना बनाया गया। इस जलमार्ग में बढ़ते तनाव के कारण global oil supply प्रभावित हुई, shipping बाधित हुई और तेल की कीमतों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया।

1 मार्च से 21 मार्च के बीच यह युद्ध लगातार विकसित होता रहा, जिसमें air superiority, cyber attacks, leadership targeting, proxy warfare और energy routes पर नियंत्रण जैसे कई आयाम सामने आए।

नीचे 1 मार्च से 21 मार्च 2026 तक की प्रमुख घटनाओं का दिन-प्रतिदिन क्रम दिया गया है, जो इस संघर्ष के बदलते स्वरूप और विस्तार को समझने में मदद करता है।

 

Day 1 (1 March 2026)

अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, missile bases, drone facilities और naval assets को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में 2000 से अधिक targets शामिल रहे और तेहरान के ऊपर air superiority स्थापित की गई।

आंतरिक सुरक्षा संस्थानों पर हमला

संयुक्त बलों ने ईरान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को भी निशाना बनाया।

  • West Azerbaijan और Ilam में Border Guard units पर हमले
  • Mehran Border Regiment पर strike, जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी मारे गए
  • तेहरान में Law Enforcement Command station को निशाना बनाया गया

Cyber हमले

ईरान की कई news websites और एक धार्मिक mobile application को hack किया गया। इन प्लेटफॉर्म्स पर “it’s time for reckoning” जैसे संदेश प्रदर्शित किए गए। इन संदेशों में सुरक्षा बलों से हथियार डालने और सरकार के खिलाफ आम लोगों के साथ खड़े होने की अपील की गई।

 ईरान की जवाबी कार्रवाई

ईरान ने इज़राइल और खाड़ी देशों पर missile और drone हमले किए।

  • इज़राइल के विभिन्न क्षेत्रों को निशाना बनाया गया
  • UAE, कुवैत और बहरीन में भी हमलों की खबरें सामने आईं
  • अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए

 संघर्ष का विस्तार

1 मार्च की घटनाओं के बाद संघर्ष का दायरा बढ़ गया है। Iraq, UAE और Oman सहित कई क्षेत्रों में हमले और तनाव की स्थिति देखी गई।

समुद्री मार्ग प्रभावित

संघर्ष का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ा है।

  • Persian Gulf में जहाजों की आवाजाही में कमी आई
  • Hormuz Strait में जहाजों की आवाजाही में लगभग 70% तक गिरावट दर्ज की गई

यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

Day 2 (2 March 2026)

अमेरिका और इज़राइल ने 2 मार्च को अपने संयुक्त सैन्य अभियान को जारी रखते हुए ईरान की air defense प्रणाली को और कमजोर किया, जिससे पश्चिमी ईरान और तेहरान के ऊपर उनकी air superiority बनी रही। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अब “local air superiority” स्थापित हो चुकी है, जिसके कारण दोनों देश अब कम advanced aircraft का भी सुरक्षित रूप से उपयोग कर पा रहे हैं।

इस दिन हमलों का फोकस केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईरान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को भी निशाना बनाया गया। protest suppression और regime control से जुड़े Intelligence, Basij और propaganda नेटवर्क पर हमले किए गए। इसी क्रम में Natanz nuclear facility पर भी strike की गई, जिसमें कम से कम तीन buildings को गंभीर नुकसान पहुँचा। यह इस अभियान का पहला सीधा nuclear target attack था।

क्षेत्रीय स्तर पर, इज़राइल ने Lebanon में Hezbollah के 70 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें weapons depots और launch sites शामिल थे। वहीं, अमेरिका और इज़राइल ने Iraq में Iran-backed militias के खिलाफ भी हमले जारी रखे, जबकि इन militias ने Jordan जैसे देशों तक अपने हमले बढ़ाने की धमकी दी।

इसके साथ ही संघर्ष का असर व्यापक क्षेत्र में दिखाई देने लगा। Houthis के संभावित हस्तक्षेप की आशंका जताई गई, जबकि ईरान ने Strait of Hormuz में shipping को बाधित करने की कोशिश की। इन घटनाओं के कारण Gulf क्षेत्र में oil और gas infrastructure पर दबाव बढ़ा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी।

Day 3 (3 March 2026)

अमेरिका और इज़राइल ने 3 मार्च को अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुए ईरान की ballistic missile क्षमता को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने पर फोकस किया। इस रणनीति के तहत missile launchers को नष्ट किया जा रहा है, जिससे ईरान की हमले करने की क्षमता कम हो और US–Israel को अपने interceptor stockpile पर कम दबाव पड़े। इसी का असर दिखा, क्योंकि इज़राइल और UAE पर ईरान के missile हमलों में कमी दर्ज की गई

इस दिन इज़राइल ने ईरान के निर्णय लेने वाले संस्थानों (decision-making bodies) को भी निशाना बनाया। तेहरान में Assembly of Experts building पर हमला किया गया, जो 88 सदस्यों वाली संस्था है और Supreme Leader के चयन की जिम्मेदारी रखती है। इस तरह के हमले ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था की वैधता (legitimacy) को प्रभावित कर सकते हैं।

लगातार हमलों के कारण ईरानी नेतृत्व ने अपनी कुछ शक्तियाँ lower-level officials को transfer करना शुरू किया, ताकि केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव के बावजूद शासन की कार्यप्रणाली जारी रह सके।

साथ ही, इज़राइल ने ईरान के nuclear program से जुड़े ठिकानों पर भी हमले जारी रखे, जिनमें weaponization research से जुड़े facilities शामिल थे।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में US bases और Gulf देशों में drone और missile हमले जारी रखे, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से UAE और Bahrain में अमेरिकी दूतावासों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इसके अलावा, अमेरिका और इज़राइल ने Iraq में Iran-backed militias के खिलाफ भी 2 और 3 मार्च को लगातार हमले किए, ताकि उनकी जवाबी क्षमता को सीमित किया जा सके।

Day 4 (4 March 2026)

4 मार्च को तेहरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में स्थित कई सैन्य परिसरों पर हमले किए गए, जहाँ IRGC और अन्य आंतरिक सुरक्षा बलों के मुख्यालय मौजूद थे। इन हमलों का उद्देश्य ईरान के command and control system को बाधित करना था।

इसी दौरान, तेहरान और उत्तर-पश्चिमी ईरान के कुर्द बहुल क्षेत्रों में भी आंतरिक नियंत्रण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। Iraqi Kurdistan से संभावित ground operation की खबरें सामने आईं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई और स्थानीय अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया।

इस दिन ईरान के हमलों में drones का उपयोग बढ़ा, जबकि ballistic missile हमलों में कमी देखी गई। साथ ही, Strait of Hormuz में shipping को बाधित करने के प्रयास जारी रहे, हालांकि ईरान की naval क्षमता पहले से काफी कमजोर हो चुकी है।

Day 5 (5 March 2026)

5 मार्च को ईरान की ballistic missile infrastructure पर हमले तेज किए गए, जिनमें सैकड़ों launch sites को निशाना बनाया गया और 28 फरवरी के बाद से 300 से अधिक missile launchers को निष्क्रिय (inoperable) कर दिया गया। इसके साथ ही अभियान अब अगले चरण में प्रवेश कर गया, जहाँ फोकस defense industrial base, खासकर missile production facilities, पर शिफ्ट होता दिखा। इसी क्रम में तेहरान के पास Pakdasht के Abbas Abad और Shenzar industrial zones के लिए evacuation warning जारी की गई।

इस दिन तेहरान और उत्तर-पश्चिमी ईरान के internal security ठिकानों, जैसे IRGC और police bases, पर हमले जारी रहे। साथ ही, दक्षिण-पश्चिमी ईरान में IRGC special forces और rapid response units को भी निशाना बनाया गया।

राजनीतिक स्तर पर, Donald Trump ने Kurdish offensive को समर्थन देने की बात कही, हालांकि Iraqi Kurdish अधिकारियों ने किसी भी ऐसे अभियान से इनकार किया। Trump ने यह भी कहा कि अमेरिका को ईरान में नए Supreme Leader के चयन प्रक्रिया में भूमिका निभानी चाहिए।

ईरान की ओर से drone हमले जारी रहे, जिनमें Kuwait के Camp Buehring और Iraq के Erbil स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया।

Day 6 (6 March 2026)

6 मार्च को संघर्ष में एक नया आयाम जुड़ा, जब रिपोर्ट्स में सामने आया कि Russia ईरान को intelligence support दे रहा है, जिससे ईरान के US targets पर हमलों की क्षमता बढ़ सकती है। साथ ही, संकेत मिले कि China भी financial सहायता और missile components प्रदान करने की तैयारी में है, जो इस संघर्ष को और व्यापक बना सकता है।

इस दिन संयुक्त बलों ने ईरान की ballistic missile क्षमता को कमजोर करने के अभियान को जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप missile हमलों में लगभग 90% तक गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही हमले अब defense industrial base, खासकर drone और missile production से जुड़े ठिकानों पर केंद्रित रहे।

इसी क्रम में Qom के Shokouhiyeh Industrial Zone और Tehran के Esteghlal Industrial Zone, साथ ही ammunition production और storage facilities को निशाना बनाया गया।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में हमले जारी रखे, लेकिन पिछले छह दिनों में केवल छह missile attack waves दर्ज हुईं।

Day 7 (7 March 2026)

7 मार्च को ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद सामने आए, जब राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के एक बयान पर hardline नेताओं ने नाराज़गी जताई।

इस दिन संयुक्त बलों ने पहली बार ईरान के energy sector को सीधे निशाना बनाया। दो oil refineries और दो oil storage facilities पर हमले किए गए, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा।

सैन्य स्तर पर, Tehran में IRGC Aerospace Force infrastructure पर strike की गई, जो ईरान के missile और drone कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र है। उपलब्ध आकलनों के अनुसार, ईरान के पास अब लगभग 120 missile launchers शेष हो सकते हैं

क्षेत्रीय स्तर पर, ईरानी हमलों का pattern बदलता दिखा, जहाँ missile हमलों की संख्या कम रही लेकिन drone attacks जारी रहे। Saudi Arabia में इन हमलों से infrastructure को नुकसान पहुँचा, जिसके बाद Volodymyr Zelensky ने Saudi नेतृत्व से बातचीत कर Shahed drones के खतरे से निपटने में सहयोग की पेशकश की।

Day 8 (8 March 2026)

8 मार्च को ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ, जब Assembly of Experts ने Mojtaba Khamenei को नया Supreme Leader चुना। यह निर्णय hardline गुटों की बढ़त को दर्शाता है। Mojtaba अब legitimacy स्थापित करने और विभिन्न गुटों को एकजुट करने जैसी चुनौतियों का सामना करेंगे।

सैन्य स्तर पर, संयुक्त बलों ने ईरान की ballistic missile infrastructure पर हमले तेज किए। पिछले 24 घंटों में 400 से अधिक targets को निशाना बनाया गया और अनुमानतः लगभग 75% missile launchers नष्ट किए जा चुके हैं। साथ ही Tehran और पश्चिमी ईरान में internal security sites पर भी strikes जारी रहीं।

क्षेत्रीय स्तर पर, ईरान के हमले जारी रहे, जिनमें Bahrain में desalination plant को नुकसान और Saudi Arabia के Kharj में एक हमले में 2 लोगों की मौत और 12 घायल हुए। वहीं, Lebanon में पिछले 24 घंटों में 100+ strikes किए गए, जबकि युद्ध की शुरुआत से अब तक 600 strikes और 820 munitions का उपयोग किया जा चुका है।

Day 9 (9 March 2026)

9 मार्च तक संयुक्त बलों के हमलों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा, जहाँ ईरान की missile और drone capabilities काफी हद तक कमजोर हो चुकी थीं, जिससे उसकी क्षेत्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमले करने की क्षमता सीमित हुई।

इस दौरान Tehran और पश्चिमी ईरान में internal security apparatus को लगातार निशाना बनाया गया। 28 फरवरी के बाद से अब तक दर्जनों internal security institutions पर हमले किए जा चुके हैं, जिससे शासन की आंतरिक नियंत्रण क्षमता प्रभावित हुई। इसी क्रम में Tehran स्थित Sahab Pardaz Company को भी निशाना बनाया गया, जो इंटरनेट censorship और surveillance tools उपलब्ध कराती थी।

क्षेत्रीय स्तर पर, Hezbollah की गतिविधियों में बदलाव देखा गया। इज़राइल के अनुसार, Hezbollah अब long-range projectiles का उपयोग कर रहा है और आने वाले दिनों में उसके rocket और drone हमलों में वृद्धि की संभावना जताई गई है।

Day 10 (10 March 2026)

10 मार्च को संघर्ष का फोकस समुद्री क्षेत्र में भी दिखाई दिया, जब अमेरिकी बलों ने Strait of Hormuz के पास 16 Iranian minelayers को नष्ट किया। यह कदम ईरान द्वारा maritime traffic को बाधित करने की कोशिशों के जवाब में था, जिसका असर उसके खुद के oil exports, विशेषकर China को होने वाली आपूर्ति, पर भी पड़ सकता है।

इसी बीच, ईरान ने आंतरिक स्तर पर अपनी security और counterintelligence गतिविधियों को बढ़ाया, जो बाहरी हस्तक्षेप की आशंका और शासन की सुरक्षा प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाता है। दूसरी ओर, संयुक्त बलों ने पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी ईरान में internal security संस्थानों पर हमले जारी रखे, साथ ही Iraq में Iran-backed militias के ठिकानों को भी निशाना बनाया।

क्षेत्रीय मोर्चे पर, Hezbollah की गतिविधियों में तेज़ी देखी गई, जहाँ उसने 9–10 मार्च के बीच 24 घंटे में 29 हमलों का दावा किया, जो अब तक का सबसे अधिक दैनिक आंकड़ा है।

Day 11 (11 March 2026)

11 मार्च को ईरान के हमलों की सीमाएँ स्पष्ट रहीं, जहाँ Gulf देशों में radars और missile defense systems को निशाना बनाए जाने के बावजूद interception rates में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। साथ ही, ईरान ने Strait of Hormuz में पूर्ण अवरोध की बजाय selective disruption की रणनीति अपनाने के संकेत दिए, ताकि shipping पर दबाव बनाया जा सके लेकिन उसके अपने oil exports पूरी तरह प्रभावित न हों।

इसी दौरान Tehran और उत्तर-पश्चिमी ईरान, विशेषकर Kurdistan Province के Marivan City, में internal security sites पर हमले जारी रहे, जो लंबे समय से anti-regime गतिविधियों के केंद्र रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, Russia द्वारा advanced drone tactics और US assets की intelligence साझा करने की रिपोर्ट्स सामने आईं, जबकि China missile fuel precursors की आपूर्ति जारी रखे हुए है, जिससे ईरान के missile program को समर्थन मिल रहा है।

वहीं Lebanon में, Hezbollah की भागीदारी के कारण उसकी राजनीतिक स्थिति में दरार दिखी, जब उसके प्रमुख सहयोगी Amal Movement ने उसके सैन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध के पक्ष में मतदान किया।

Day 12 (12 March 2026)

12 मार्च को नए Supreme Leader Mojtaba Khamenei ने अपना पहला बयान जारी करते हुए ईरान की युद्ध नीति को दोहराया, जिसमें अमेरिकी प्रभाव को क्षेत्र से हटाना और इज़राइल के खिलाफ संघर्ष जारी रखना शामिल है। इसी दौरान, एक Iranian-linked hacker group ने US healthcare company पर cyberattack किया, जिसे राजनीतिक दबाव बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सैन्य स्तर पर, संयुक्त बलों ने ईरान के internal security और military sites पर हमले जारी रखे, जहाँ एक ही दिन में 10 प्रांतों में strikes दर्ज किए गए। इसके साथ ही US CENTCOM ने 30 से अधिक Iranian minelaying ships नष्ट करने और naval mine infrastructure को निशाना बनाने की जानकारी दी, जिससे Hormuz क्षेत्र में ईरान की गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।

आंतरिक स्थिति में, रिपोर्ट्स के अनुसार Artesh और IRGC के बीच तनाव और supply shortages की समस्या उभर रही है, हालांकि बड़े स्तर पर टूट या विद्रोह के संकेत नहीं मिले हैं। वहीं, Hezbollah की रणनीति में बदलाव देखा गया, जहाँ वह अब drones का अधिक उपयोग कर रहा है।

Day 13 (13 March 2026)

13 मार्च को संयुक्त बलों ने ईरान के internal security infrastructure पर हमले जारी रखे, जिनका उद्देश्य शासन की repressive capabilities को कमजोर करना था। इसी बीच, इज़राइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि अभियान का लक्ष्य “regime change के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाना” है।

सैन्य स्तर पर, ईरान की defense industrial capacity को बड़ा झटका लगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री के अनुसार, missile components बनाने वाली कंपनियों और production lines पर हमलों के कारण ईरान की ballistic missile production क्षमता लगभग निष्क्रिय (functionally defeated) हो चुकी है।

समुद्री क्षेत्र में, ईरान ने Strait of Hormuz में selective approach अपनाई, जहाँ कुछ जहाजों को गुजरने दिया गया और हाल के दिनों में civilian vessels पर हमले नहीं देखे गए। यह संकेत देता है कि ईरान shipping को बाधित करना चाहता है, लेकिन पूर्ण अवरोध से बच रहा है।

क्षेत्रीय स्तर पर, इज़राइल Lebanon में ground operations के विस्तार पर विचार कर रहा है, जिसमें सीमित कार्रवाई से लेकर Litani River तक बड़े ऑपरेशन के विकल्प शामिल हैं।

Day 14 (14 March 2026)

14 मार्च को इज़राइल ने Lebanon में अपने अभियान को “significantly expand” करने की योजना बनाई, जिसका उद्देश्य दक्षिणी क्षेत्रों में Hezbollah के military infrastructure को खत्म करना और उसे Litani River के उत्तर की ओर धकेलना है।

इस बीच, कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगा, जब Oman और Egypt की मध्यस्थता के बावजूद ईरान और अमेरिका दोनों ने ceasefire वार्ता से इनकार कर दिया

सैन्य स्तर पर, अमेरिका ने Bushehr Province के Kharg Island पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिनमें naval mine storage, missile facilities और अन्य सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया, जिससे Hormuz क्षेत्र में ईरान की क्षमता को सीमित करने की कोशिश की गई।

समुद्री क्षेत्र में पिछले 48 घंटों में किसी बड़े हमले की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन खतरा बना रहा। वहीं, Hezbollah ने 24 घंटे में 43 हमलों का दावा किया, जो अब तक का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा है।

Day 15 (15 March 2026)

15 मार्च को सामने आया कि ईरान Russian-produced (संभवतः modified) Shahed drones का उपयोग कर रहा है, जिन्हें US bases और Gulf देशों पर हमलों में इस्तेमाल किया गया। Ukrainian नेतृत्व के अनुसार इन drones में “Russian details” पाए गए हैं, जो दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को दर्शाता है।

सैन्य स्तर पर, संयुक्त बलों ने ईरान के military और internal security infrastructure पर हमले जारी रखे, जहाँ पिछले 24 घंटों में छह प्रांतों में strikes दर्ज किए गए। इसी बीच, ईरान ने पहली बार Sejjil ballistic missile के उपयोग का दावा किया, जो उसकी long-range strike क्षमता को दर्शाता है।

राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर, रिपोर्ट्स के अनुसार IRGC निर्णय लेने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है, जबकि Supreme Leader Mojtaba Khamenei के घायल होने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही ईरानी अधिकारी Gulf देशों पर हमलों में अपनी भूमिका को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

कूटनीतिक स्तर पर, दोनों पक्षों के बीच ceasefire की कोई ठोस संभावना नहीं दिखी, जहाँ अमेरिका और ईरान दोनों ही वार्ता के लिए तैयार नहीं दिखे।

Day 16 (16 March 2026)

16 मार्च को ईरान की नई सत्ता संरचना को लेकर संकेत मिले कि Supreme Leader Mojtaba Khamenei का inner circle मुख्यतः IRGC के पुराने hardline कमांडरों से बना है, जो भविष्य में अधिक सख्त और anti-West नीतियों को आगे बढ़ा सकता है।

इसी दौरान, ईरानी शासन ने information control को और कड़ा किया, जहाँ internet restrictions बढ़ा दिए गए, Starlink उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाया गया और VPN access को सीमित किया गया। इससे देश के भीतर की जानकारी बाहर आना और कठिन हो गया।

सैन्य स्तर पर, संयुक्त बलों ने South Khorasan Province में एक drone facility को निशाना बनाया, जो अब तक के सबसे पूर्वी हमलों में से एक था और इससे ईरान के अंदर गहराई तक संचालन की क्षमता का संकेत मिलता है।

समुद्री क्षेत्र में 12 मार्च के बाद किसी जहाज पर हमला दर्ज नहीं हुआ, जबकि रिपोर्ट्स के अनुसार US aircraft ने Chabahar तट के पास low-altitude operations करते हुए targets को engage किया, जो क्षेत्र में air control की स्थिति को दर्शाता है।

Day 17 (17 March 2026)

17 मार्च को संघर्ष का फोकस समुद्री सुरक्षा और नेतृत्व पर हमलों पर रहा, जहाँ अमेरिका और इज़राइल ने Strait of Hormuz में shipping को सुरक्षित रखने के लिए सैन्य दबाव बनाए रखा। इसी क्रम में Tehran में IRGC Navy headquarters पर strike की पुष्टि हुई, जिसका उपयोग क्षेत्रीय naval operations को निर्देशित करने के लिए किया जा रहा था।

इस दिन एक बड़ा झटका तब लगा जब Supreme National Security Council के वरिष्ठ नेता Ali Larijani की हवाई हमलों में मृत्यु की पुष्टि हुई। Larijani लंबे समय से शासन के प्रमुख चेहरों में से एक थे, और उनकी मौत से आंतरिक शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।

इसी बीच, क्षेत्रीय स्तर पर नई तकनीकी वृद्धि के संकेत मिले, जहाँ एक Iranian-backed militia group ने fiber-optic FPV drones के उपयोग के संकेत दिए, जो US forces के लिए एक नई प्रकार की चुनौती प्रस्तुत कर सकते हैं।

 

Day 18 (18 March 2026)

18 मार्च को ईरान के energy infrastructure पर बड़े हमले किए गए, जिनमें Bushehr Province के South Pars gas field और Asaluyeh processing hub से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। ये सुविधाएँ ईरान की घरेलू गैस आपूर्ति और आर्थिक ढांचे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनका प्रभाव क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

इसी दिन एक बड़े नेतृत्व नुकसान में, ईरान के Intelligence Minister Esmail Khatib की हवाई हमले में मृत्यु हुई, जो देश के internal repression system के प्रमुख संचालक थे। लगातार हो रहे ऐसे हमलों के कारण ईरानी सुरक्षा तंत्र में भय और अस्थिरता बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई, जहाँ कई कर्मी संभावित हमलों से बचने के लिए असामान्य स्थानों पर रहने को मजबूर हुए।

क्षेत्रीय मोर्चे पर, Hezbollah ने 57 हमलों का दावा किया, जो हाल के दिनों में तेज़ी को दर्शाता है। इसके साथ ही इज़राइल ने southern Lebanon में Hezbollah के military, social और financial networks को निशाना बनाते हुए strikes जारी रखीं।

Day 19 (19 March 2026)

19 मार्च को ईरान के internal security apparatus पर लगातार हो रहे हमलों के प्रभाव के संकेत मिले, जहाँ decapitation strikes के कारण shock और confusion की स्थिति बनी हुई है, जिससे आंतरिक सुरक्षा संचालन कुछ हद तक प्रभावित हुए हैं।

सैन्य स्तर पर, इज़राइल ने उत्तरी ईरान के Bandar Anzali (Caspian Sea port) पर बड़े हमले किए, जहाँ दर्जनों vessels, जिनमें IRIS Deylaman frigate भी शामिल थी, को निशाना बनाया गया। यह पोर्ट ईरान के Russia के साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही संयुक्त बलों ने missile और air defense capabilities पर हमले जारी रखते हुए लगभग 85% surface-to-air missiles को नष्ट करने का दावा किया।

क्षेत्रीय स्तर पर, ईरान ने Gulf में हमले जारी रखे, जिनमें Qatar के Ras Laffan Industrial City को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने South Pars gas field को निशाना बनाने की चेतावनी दी। वहीं, Hezbollah ने लगभग 200 किमी दूर southern Israel तक long-range missile attack किया, जो उसके अब तक के सबसे लंबे दूरी के हमलों में से एक माना जा रहा है।

Day 20 (20 March 2026)

20 मार्च को ईरान के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी रही, जहाँ संकेत मिले कि Supreme Leader Mojtaba Khamenei अभी भी गंभीर रूप से घायल या सक्रिय भूमिका निभाने में असमर्थ हो सकते हैं। इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, जिससे स्थिति और अस्पष्ट बनी हुई है।

इसी दौरान, ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिया कि युद्ध के बाद भी Strait of Hormuz में shipping को प्रभावित करने की नीति जारी रह सकती है। संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि इस जलमार्ग की स्थिति “pre-war जैसी नहीं रहेगी।”

क्षेत्रीय मोर्चे पर, Hezbollah ने 24 घंटों में 55 हमलों का दावा किया, जिनमें अधिकांश हमले northern Israel और southern Lebanon में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए किए गए।

Day 21 (21 March 2026)

21 मार्च को ईरान ने पहली बार Indian Ocean में स्थित Diego Garcia US-UK base को निशाना बनाते हुए दो ballistic missiles लॉन्च किए, जो अब तक का सबसे दूर का हमला प्रयास था। एक missile उड़ान के दौरान विफल हो गया, जबकि दूसरे को अमेरिका ने intercept कर लिया। यह घटना दर्शाती है कि ईरान की missile range उसकी घोषित सीमाओं से अधिक हो सकती है।

इसी दौरान, रिपोर्ट्स के अनुसार IRGC ने regime decision-making में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली, जो leadership losses और Supreme Leader Mojtaba Khamenei की सीमित भूमिका के बीच बढ़ते power vacuum को दर्शाता है।

आर्थिक स्तर पर, अमेरिका ने Iranian oil shipments (जो पहले से transit में थे) के लिए एक short-term waiver जारी किया, हालांकि नए oil deals की अनुमति नहीं दी गई।

सैन्य मोर्चे पर, संयुक्त बलों ने Tehran में कम से कम पाँच missile production sites पर हमले किए, जिससे ईरान की production क्षमता को और कमजोर करने की कोशिश की गई।

Strait of Hormuz पर प्रभाव, वैश्विक निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष के दौरान Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा संकट का केंद्र बन गया, जहाँ से दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति गुजरती है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद तेल की कीमतें लगभग $65 प्रति बैरल से बढ़कर $100–105 प्रति बैरल तक पहुँच गईं, यानी 40% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

भारत जैसे देशों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ा, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भारी रूप से आयात पर निर्भर है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85–90% आयात करता है, जिसमें से करीब 40–50% सप्लाई Hormuz क्षेत्र से आती है। LPG (घरेलू गैस) के मामले में निर्भरता और अधिक है—भारत अपनी लगभग 60% LPG जरूरत आयात करता है, और इसमें से करीब 90% सप्लाई इसी मार्ग से होकर आती है। LNG के क्षेत्र में भी भारत की लगभग 50% से अधिक निर्भरता Middle East पर है, जिससे Hormuz में किसी भी बाधा का सीधा असर भारतीय ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।

भारत सरकार ने इस स्थिति में बहु-स्तरीय कदम उठाए। कूटनीतिक स्तर पर, भारत ने ईरान के साथ संपर्क बनाए रखा और अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की। साथ ही, भारत ने अपने energy imports को diversify करने की रणनीति पर जोर दिया, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके। व्यावहारिक स्तर पर, भारत ने strategic petroleum reserves (तेल भंडार) के उपयोग की तैयारी रखी, shipping routes पर नजर बढ़ाई और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालयों के बीच समन्वय बढ़ाया। इसके अलावा, भारत ने क्षेत्रीय तनाव के बावजूद neutral और balanced foreign policy stance बनाए रखा, जिससे वह सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रख सके।

इस संकट के दौरान ईरान ने पूर्ण blockade के बजाय selective control की रणनीति अपनाई। उसने संकेत दिया कि यह मार्ग सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के जहाजों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

इस स्थिति में कई देशों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। भारत के कुछ जहाजों को विशेष अनुमति देकर सुरक्षित मार्ग दिया गया, जबकि पाकिस्तान और तुर्किये के जहाजों को भी सीमित अनुमति दी गई। वहीं चीन, जो अपने लगभग 45% तेल आयात के लिए इस मार्ग पर निर्भर है, ने ईरान के साथ safe passage के लिए वार्ता शुरू की। France और Italy ने भी अपने जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए Iran से बातचीत की पहल की। दूसरी ओर, इस संकट का सीधा प्रभाव खाड़ी देशों—Qatar, Saudi Arabia और UAE—पर पड़ा, जहाँ energy infrastructure पर दबाव बढ़ा और उत्पादन तथा आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हुआ, shipping गतिविधियाँ बाधित हुईं और insurance costs में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

अमेरिका ने इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय naval coalition बनाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन जर्मनी, ग्रीस और ब्रिटेन जैसे देशों ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी।

इस पूरे घटनाक्रम में ईरान ने एक संतुलित रणनीति अपनाई—एक ओर उसने shipping पर दबाव बनाए रखा और वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया, वहीं दूसरी ओर कुछ देशों को सीमित अनुमति देकर अपने आर्थिक हितों को भी सुरक्षित रखने की कोशिश की।

सन्दर्भ :

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