(03) Weekly News 27 – 1 nov

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 (27-10-25) www.undoc.org

साइबर अपराध के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की पहल पर एक वैश्विक समझोता

साइबर अपराध जैसे रैंसमवेयर, वित्तीय धोखाधड़ी और बिना सहमति के अंतरंग तस्वीरों के साझा करना, ऑनलाइन बाल यौन शोषण व शोषण सामग्री, तथा बच्चों की ऑनलाइन ग्रूमिंग, तस्करी, धोखाधड़ी, और हिंसा एवं घृणा के लिए उकसाना आदि को नियंत्रित करने और रोकने के लिय संयुक्त राष्ट्र की पहल पर  विश्व का पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक समझौता पर  72 देशों ने हक्षातर किये . जिसका उद्देश्य साइबर अपराधों को अपराध बनाना, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साझाकरण को बढ़ाना और तीव्र अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सक्षम बनाना है। इसमें दक्षिण पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों को संगठित साइबर अपराधों की वजह से “ग्राउंड जीरो” के रूप में चिन्हित किया गया है .

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 (27-10-25) www.undoc.org

22 वां भारत – आसियान शिखर सम्मेलन

भारत और आसियान ने 22वें शिखर सम्मेलन में अपने संबंधों को सुदृढ़ करते हुए आसियान-भारत कार्य योजना (2026-2030) को मंजूरी दी। दोनों पक्षों ने 2026 को “आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष” घोषित किया तथा सतत पर्यटन पर संयुक्त वक्तव्य अपनाया। नालंदा विश्वविद्यालय में दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र की स्थापना और लोथल में समुद्री विरासत महोत्सव आयोजित करने की घोषणा की गई। भारत ने आसियान को अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति और एक्ट ईस्ट नीति का केंद्र बताया। लगभग 123 अरब डॉलर का व्यापार और बहुपक्षवाद व पूर्वोत्तर विकास इस साझेदारी के प्रमुख आधार हैं।

 

 (27-10-25) www.scitechdaily.com

डार्क मैटर से जुड़ा नया सुराग

वैज्ञानिकों ने मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र से आने वाली रहस्यमय गामा-रे चमक के स्रोत को समझने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जर्मनी के लेबनिज इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिकों ने नई “Hestia सिमुलेशन” के ज़रिए संकेत दिए हैं कि यह चमक डार्क मैटर के पुनर्गठित वितरण से उत्पन्न हो सकती है। पहले इसे मिलिसेकंड पल्सर तारों का प्रभाव माना जा रहा था। अध्ययन से पता चला कि आकाशगंगा के शुरुआती टकरावों ने डार्क मैटर की आकृति को बदला, जिससे NASA के फर्मी टेलीस्कोप द्वारा देखी गई गामा किरणों का पैटर्न समझाया जा सकता है।

 

 (27-10-25) Al Jazeera

गाजा में पुनः अशांति – हिंसा
गाजा में इजराइल और हमास के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है। 27 अक्टूबर को राफा इलाके में इजरायली कार्रवाई में 45 लोगों की मौत हो गई, जिससे संघर्ष विराम खतरे में पड़ गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने हमास को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, बंधकों के शव लौटाने की मांग की। जॉर्डन ने अमेरिकी शांति-बल प्रस्ताव ठुकरा दिया। गाजा में मानवीय संकट गहरा गया है—सीमा बंद है और राहत पहुँचाने में कठिनाई हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा रोकने व मदद पहुँचाने की अपील की है।

 (27-10-25) BBC

आयरलैंड में नयी सरकार: यूरोपीय संघ में परिवर्तन की संभावना
आयरलैंड में 27 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित हुए। कैथरीन कन्नॉली, जो स्वतंत्र समाजवादी विचारधारा की नेता हैं, आयरलैंड की नई राष्ट्रपति चुनी गईं। उन्होंने NATO की सदस्यता का विरोध और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाइयों को अपने चुनावी एजेंडे का केंद्र बनाया था।

उनकी जीत को देश में तटस्थ कूटनीति और पर्यावरण-हित चिंतन के मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद कैथरीन ने देश में सामाजिक न्याय और सतत विकास की दिशा में काम करने का संकल्प जताया

 

(27-10-25) dristinewsportal

चीन की वाइल्डलाइफ डिप्लोमेसीगोल्डन स्नब-नोज़्ड मंकीज़
चीन ने वाइल्डलाइफ डिप्लोमेसी को नया आयाम दिया है। दस साल के समझौते में फ्राँस और बेल्जियम के चिड़ियाघरों को संकटग्रस्त गोल्डन स्नब-नोज़्ड मंकीज़ भेजी गई हैं। ये मंकीज़ “एनिमल एंबेसडर” के रूप में चीन की छवि मजबूत करेंगी। पहले चीन ने पांडा को डिप्लोमेसी का प्रतीक बनाया था, अब यह परंपरा नई प्रजातियों तक बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय जैव विविधता भी ऐसा कदम उठा सकती है।

 

 (28-10-25) www.firststops.com

पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र (WIOR) में बढती भू-राजनीतिक केंद्रीयता
चीन ने अदन की खाड़ी और सोमालिया के तट पर एस्कॉर्ट मिशन के लिए नया नौसैनिक बेड़ा भेजा है। सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया के कारोबारी समुद्री मार्गों को जोड़ता है।

भारत के लिए यह क्षेत्र हिंद-प्रशांत सहयोग, सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी के लिहाज से अहम है। हालाँकि यहाँ समुद्री डकैती, तस्करी, संघर्षों और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसी चुनौतियाँ भी सामने हैं। चीन ने ऋण-जाल नीति के जरिए जिबूती में सैन्य अड्डा और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर भी अपना असर बढ़ाया है।

 

 (28-10-25) www.firststops.com

भारत 6G नेतृत्व की ओर अग्रसर

नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस-2025 के दौरान दूसरे अंतर्राष्ट्रीय भारत 6G संगोष्ठी का आयोजन हुआ। भारत ने 6G को वैश्विक सार्वजनिक संपदा बनाने का लक्ष्य‍ लिया। सरकार ने 2035 तक 1.2 ट्रिलियन डॉलर GDP और 6G पेटेंट्स में 10% हिस्सेदारी पाने का रोडमैप जारी किया।
सम्मेलन में पाँच मूल सिद्धांत—सुरक्षा, लचीलापन, सुलभता, समावेशिता और टिकाऊपन—पर सहमति बनी। भारत 6G एलायंस समेत इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों का सहयोग लिया जा रहा है। सरकार ने रिसर्च लैब और फंडिंग के लिए नई पहलें शुरू की हैं।
पार्टनरशिप, कौशल विकास और स्वदेशी इनोवेशन पर जोर है। 6G से तेज गति, रियल टाइम सर्जरी, स्मार्ट रोबोटिक्स तथा एडवांस्ड AI नेटवर्क सुविधाएँ आएँगी। चुनौतियों में नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, सुरक्षा व प्राइवेसी मुद्दे हैं हालाँकि इसे  भारत नवाचार व वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसरता के रूप में देखा जा रहा है।

 

 (28-10-25) www.firststops.com

भारत के पांच सबसे बड़े शहरों के नीचे की जमीन भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण धंस रही है : अध्ययन

भारत के पांच सबसे बड़े शहर—दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु—में जमीन तेजी से डूब रही है, जिसका मुख्य कारण है भूजल का अत्यधिक दोहन। यह समस्या 2015 से 2023 तक सैटेलाइट डेटा से मिली जानकारी पर आधारित अध्ययन में सामने आई है, जिसमें 878 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र प्रभावित है। दिल्ली में प्रति वर्ष जमीन 51 मिमी तक डूब रही है, जबकि चेन्नई और मुंबई में भी इसी प्रकार की गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। इससे लाखों इमारतें और करोड़ों लोग संरचनात्मक जोखिम में हैं। भूजल निकासी की वजह से मिट्टी के तलछट दब रहे हैं, जो इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों ने भूजल निष्कर्षण को रोकने, सतही जल प्रबंधन और पुनःजल संचित करने जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी है। यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में कई और इमारतें खतरे में पड़ सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक क्षति हो सकती है। यह संकट भारत के शहरीकरण और जल-संसाधन प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है।

 

 (28-10-25) Danikbhaskar

रूस में दुनिया की पहली न्यूक्लियर पावर्ड मिसाइल का टेस्ट

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली क्रूज मिसाइल बुरेवेस्तनिक का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल लगभग 14,000 किलोमीटर की दूरी तय कर 15 घंटे तक उड़ान भर सकती है, जिससे इसकी रेंज असीमित मानी जाती है। इसके छोटे परमाणु रिएक्टर की वजह से यह किसी भी मौजूदा या भविष्य की मिसाइल रक्षा प्रणाली को चकमा दे सकती है। पुतिन ने इसे “दुनिया का अद्वितीय और अजेय हथियार” बताया।

बुरेवेस्तनिक मिसाइल का उद्देश्य अमेरिका और नाटो के मिसाइल रक्षा तंत्र को मात देना है। यह मिसाइल नए सैन्य रणनीतियों में रूस की ताकत बढ़ाती है। हालांकि, इसे पूरी तरह तैनात नहीं किया गया है, क्योंकि इसमें रेडिएशन सुरक्षा जैसी तकनीकी चुनौतियां हैं।

इस परीक्षण ने वैश्विक सुरक्षा संतुलन को प्रभावित किया है और अमेरिका ने भी अपनी परमाणु हथियार परीक्षण बढ़ाने की तैयारी की है। रूस ने साफ किया कि यह परीक्षण परमाणु विस्फोट नहीं था, बल्कि एक परमाणु-संचालित मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण था। यह मिसाइल रूस की परमाणु सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

 (29-10-25) various source

रूस – उक्रेन युद्ध

28 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई रूस-नाटो तनाव और यूक्रेन युद्ध आज भी गंभीर है। रूस ने डोनेट्स्क में 1,70,000 सैनिक तैनात कर दिए हैं और यूक्रेन पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले जारी हैं, जिससे नागरिक और ऊर्जा अवसंरचना प्रभावित हुई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा है कि रूस जानबूझकर नागरिकों को निशाना बना रहा है। नाटो सदस्य देशों की हवाई सीमाएं रूसी हवाई गतिविधियों से असुरक्षित हैं और NATO ने इसका कड़ा प्रतिकार किया है।

राजनीतिक रूप से, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप से रूस के साथ वार्ता को बढ़ावा देने के लिए बातचीत की है। युद्ध अब एक उच्च तनाव वाले गतिरोध में है, जिसमें युद्ध भूमि पर लड़ाई धीमी लेकिन लगातार हो रही है, जबकि कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है।

रूस की अर्थव्यवस्था पर भी युद्ध का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका की भूमिका बदल रही है, जहां ट्रंप ने रूस के प्रति समर्थन के संकेत दिए हैं लेकिन नीति स्पष्ट नहीं है। इस बीच, यूक्रेन और रूस के बीच जटिलताएं बरकरार हैं और NATO-रूस टकराव का खतरा कम नहीं हुआ है। यह स्थिति विश्व सुरक्षा के लिए सबसे अधिक तनावपूर्ण दौर दिखाती है।

 

 (29-10-25) Al Jazeera English

सूडान सत्ता संघर्ष से बदहाली और बढती हुई

सूडान के दरफुर क्षेत्र में संघर्ष ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। अर्द्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) ने उत्तरी दरफुर की राजधानी एल-फाशर पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका पिछले कई महीनों से सेना और RSF के बीच भीषण संघर्ष का केंद्र बना हुआ था।

संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों के अनुसार, शहर पर कब्जे के बाद सैकड़ों नागरिक विस्थापित हो गए हैं और खाद्य, पानी व दवाओं की भारी कमी हो रही है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कई इलाकों में मानवीय सहायता पूरी तरह ठप पड़ गई है।

सूडान में यह संघर्ष अप्रैल 2023 से जारी है, जब सेना और RSF के बीच सत्ता को लेकर विवाद शुरू हुआ था। अब तक हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग पड़ोसी देशों में शरण लेने को मजबूर हैं। दरफुर की बिगड़ती स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गहरी चिंता व्यक्त की है।

 

 (30-10-25) The Hindu

भारत की EV योजनाओं पर चीन की आपत्ति, WTO में दी शिकायत

चीन ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि भारत की इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और बैटरी निर्माण से जुड़ी तीन PLI योजनाएँ WTO के नियमों का उल्लंघन करती हैं। इन योजनाओं में देशी मूल्य संवर्धन (DVA) की शर्त रखी गई है, जिसके तहत कंपनियों को अधिक वित्तीय सहायता तब मिलती है जब वे अधिक भारतीय पुर्ज़ों का उपयोग करती हैं।

चीन का कहना है कि यह नियम विदेशी वस्तुओं के उपयोग को हतोत्साहित करता है और WTO के Subsidies and Countervailing Measures (SCM) समझौते का उल्लंघन है। इस समझौते के अनुसार ऐसी सब्सिडियाँ जो स्थानीय सामग्री के उपयोग पर निर्भर करती हैं, “निषिद्ध” मानी जाती हैं।

भारत का तर्क है कि ये योजनाएँ देश में स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करने और EV उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं। WTO अब इस विवाद की जांच करेगा।

 

 (31-10-25) The Hindu

AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को शिक्षा में शामिल करेगा मंत्रालय

शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) को पढ़ाई में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 के तहत तैयार किया जाएगा। मंत्रालय को इसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, CBSE, NCERT, KVS और NVS जैसी संस्थाओं का सहयोग मिल रहा है।

CBSE ने इस विषय पर IIT मद्रास के प्रोफेसर कार्तिक रमन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री की सुविधा निष्ठा (NISHTHA) प्लेटफॉर्म से दी जाएगी।

यह पहल छात्रों में आलोचनात्मक सोच, तार्किक विवेक, नैतिक समझ और समस्या-समाधान क्षमता को विकसित करेगी। मंत्रालय का मानना है कि शुरुआती कक्षाओं में AI और CT पढ़ाने से छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और तेजी से बदलते रोजगार बाजार के लिए अधिक तैयार हो सकेंगे।

 

 (1-11-25) downtoearth.com

IIT खड़गपुर के अध्ययन में चेतावनी — पश्चिमी घाट और हिमालय क्षेत्र पारिस्थितिक सूखे की चपेट में

IIT खड़गपुर के एक हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत के पश्चिमी घाट, हिमालय, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और मध्य भारत की खेती वाली भूमि अब तेजी से पारिस्थितिक सूखे (Ecological Drought) का सामना कर रही हैं। यह स्थिति पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।

अध्ययन के अनुसार, पारिस्थितिक सूखा तब होता है जब लंबे समय तक नमी की कमी के कारण पेड़-पौधों की वृद्धि, पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना और कार्बन संतुलन प्रभावित हो जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सूखा केवल बारिश की कमी का नतीजा नहीं है, बल्कि बढ़ते तापमान, महासागरों के गर्म होने और वातावरण में नमी घटने से भी जुड़ा है।

इसके कारण स्थानीय प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं, वन क्षेत्र सिकुड़ सकते हैं और मिट्टी की उर्वरता घट सकती है। अध्ययन में बताया गया है कि भारत को अब पारिस्थितिक दृष्टि से अधिक संवेदनशील इलाकों में जलवायु अनुकूल प्रबंधन नीति अपनाने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि इस पर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह सूखा आने वाले वर्षों में देश की पर्यावरणीय स्थिरता और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बन सकता है।

 

 (31-10-25) Dainik bhaskar

अफगानिस्तान के सतत जल विकास के लिए भारत देगा समर्थन

भारत ने हाल ही में अफगानिस्तान को दीर्घकालिक जल प्रबंधन और जलविद्युत परियोजनाओं में सहयोग देने का ऐलान किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नई दिल्ली अफगानिस्तान में बांध, जलाशय और विद्युत संयंत्र जैसी अधोसंरचना के निर्माण में सहायता करेगी। तालिबान सरकार ने कुनार नदी पर नए बांध की घोषणा की है, जिससे पाकिस्तान को पानी के प्रवाह में कमी की चिंता है। भारत पहले भी सलमा डैम जैसी परियोजनाओं में अफगानिस्तान के साथ मिलकर काम कर चुका है। यह सहयोग अफगानिस्तान की कृषि, ऊर्जा और जल सुरक्षा के लिए अहम है, जबकि क्षेत्रीय राजनीति में भी इसका असर दिख सकता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता और आवश्यकताओं के समर्थन में है तथा तकनीकी व वित्तीय मदद के लिए प्रतिबद्ध है। अफगानिस्तान को यह भारतीय सहयोग वहां की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में मददगार साबित होगा।

 

Science and Technology

कंप्यूटर चिप में मशरूम: पर्यावरण-अनुकूल ‘लिविंग हार्डवेयर’ की दिशा में नया कदम

(The Times of India)

वैज्ञानिकों ने अब पारंपरिक सिलिकॉन-आधारित सेमीकंडक्टर चिप्स के विकल्प के रूप में मशरूम की संरचना से प्रेरित नई तकनीक विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हालिया शोध में शिटाके मशरूम (Shiitake Mushroom) के माइसेलियम नेटवर्क का उपयोग करके एक ऐसा जैविक ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो विद्युत संकेतों को पहचानने और संचालित करने में सक्षम है।

माइसेलियम एक महीन जाल जैसा तंतु होता है जो मिट्टी में फैला रहता है और पोषक तत्वों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह नेटवर्क इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की तरह व्यवहार कर सकता है। इसका उपयोग भविष्य में जैविक या “लिविंग” कंप्यूटर चिप्स के रूप में किया जा सकता है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल होना है। पारंपरिक चिप निर्माण प्रक्रिया में भारी ऊर्जा और रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जबकि माइसेलियम पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल है। इसके अलावा, यह स्वयं को आंशिक रूप से मरम्मत करने की क्षमता भी रखता है।

भविष्य में यह खोज ग्रीन कंप्यूटिंग, न्यूरोमोर्फिक प्रोसेसिंग, और अंतरिक्ष मिशनों में उपयोगी साबित हो सकती है। यह नवाचार बताता है कि भविष्य की कंप्यूटिंग केवल मशीनों की नहीं, बल्कि जीव विज्ञान और तकनीक के संगम की होगी।

 

गूगल ने हासिल किया पहला वेरिफिएबल क्वांटम एडवांटेज the hindu

गूगल (Google) ने क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने घोषणा की है कि उसके नए क्वांटम प्रोसेसर “विलो” (Willow) ने “क्वांटम इकोज़ (Quantum Echoes)” नामक एक नए एल्गोरिदम का उपयोग करके अब तक का पहला वेरिफिएबल क्वांटम एडवांटेज प्राप्त किया है। इसका मतलब है कि इस प्रोसेसर ने ऐसी गणना की, जिसे पारंपरिक सुपरकंप्यूटरों की तुलना में 13,000 गुना तेज़ी से पूरा किया गया।

क्वांटम एडवांटेज वह स्थिति है जब कोई क्वांटम कंप्यूटर किसी विशेष कार्य को सुपरकंप्यूटरों से तेज़ और अधिक कुशलता से करता है। लेकिन गूगल की यह उपलब्धि इससे भी आगे बढ़ी है — क्योंकि इसे अन्य क्वांटम या क्लासिकल प्रणालियों द्वारा सत्यापित (verified) भी किया जा सकता है। इसलिए इसे दुनिया का पहला वास्तविक और प्रमाणित क्वांटम एडवांटेज कहा जा रहा है।

विलो प्रोसेसर में 105 क्यूबिट्स (qubits) हैं। इसने क्वांटम इकोज़ एल्गोरिदम चलाकर यह दिखाया कि क्वांटम अवस्थाएँ समय के साथ आगे-पीछे कैसे विकसित होती हैं और सूचना एनटैंगलमेंट के माध्यम से कैसे फैलती या स्क्रैम्बल होती है। यह मापन OTOC (Out-of-Time-Order Correlator) नामक प्रक्रिया से किया गया। विलो प्रोसेसर ने यह कार्य मात्र दो घंटे में पूरा कर लिया, जबकि पारंपरिक सुपरकंप्यूटर को यही काम करने में कई वर्ष लगते।

इस उपलब्धि से हैमिल्टोनियन लर्निंग (Hamiltonian Learning) जैसी तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा, जिनसे वैज्ञानिक किसी अणु या पदार्थ की ऊर्जा, संरचना और बलों का सटीक अनुमान लगा सकते हैं। यह नई दवाओं के विकास, प्रोटीन विश्लेषण, और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध होगी।

गूगल का यह प्रयोग क्वांटम कंप्यूटिंग को शोध से वास्तविक उपयोग की दिशा में ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह भविष्य में विज्ञान, तकनीक और औद्योगिक अनुप्रयोगों के नए द्वार खोल सकता है।

 

अजीब लेकिन जीवनरक्षक खोजें ScienceDaily

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मानव मस्तिष्क जैसी संरचनाएँ (Brain Organoids) विकसित करने में सफलता हासिल की है। ये सूक्ष्म जैविक नमूने असली मस्तिष्क की तरह न्यूरॉन संकेत उत्पन्न करते हैं। इनका उपयोग नई दवाओं की परीक्षण प्रक्रिया में किया जा सकता है, जिससे मस्तिष्क संबंधी बीमारियों जैसे अल्ज़ाइमर, पार्किंसन या मिर्गी के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं। यह तकनीक वास्तविक मस्तिष्क ऊतक की बजाय प्रयोगशाला में सुरक्षित रूप से परीक्षण की अनुमति देती है, जिससे पशु प्रयोगों की आवश्यकता भी कम होगी। इसके अतिरिक्त, एक अन्य शोध में वैज्ञानिकों ने मकड़ी के रेशों (Spider Silk) से बने अत्यंत मजबूत और हल्के दस्ताने तैयार किए हैं। मकड़ी के रेशे प्राकृतिक रूप से बेहद मज़बूत, लचीले और बायोडिग्रेडेबल होते हैं। इनसे बने दस्ताने सर्जरी, जैविक अनुसंधान और रक्षा उपकरणों में उपयोगी हो सकते हैं।वे न केवल अधिक सुरक्षा प्रदान करते हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं।

 

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