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- (22) News Update 8 March – 14 March (Nepal Election 2026)
- (23) Weekly News Update 15 March – 21 March (Global E-waste report, Iran war update)
- (24) Weekly News Update 22 March – 5 April (Water Crisis | Iran War | Russia–Ukraine War)
- (25)Weekly News Update 6 April – 12 April (Iran war Update, various research)
(6 April) dsel.education.gov.in
अब स्कूल में AI: कक्षा 3 – 8 के लिए नया पाठ्यक्रम
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए Computational Thinking (CT) और Artificial Intelligence (AI) का नया पाठ्यक्रम लॉन्च किया है। इसे औपचारिक रूप से स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। यह पहल National Education Policy 2020 के विज़न के अनुरूप है। यह पाठ्यक्रम 2026–27 शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा और इसका उद्देश्य छात्रों में प्रारंभिक स्तर से ही AI की समझ और कौशल विकसित करना है, ताकि उन्हें डिजिटल युग के अनुरूप तैयार किया जा सके।
पाठ्यक्रम का उद्देश्य
इस पहल का लक्ष्य छात्रों को “AI-ready learners” के रूप में तैयार करना है। इसके तहत बच्चों में तार्किक सोच (Logical Reasoning), पैटर्न पहचान (Pattern Recognition), समस्या समाधान (Problem Solving) और डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) जैसे कौशल विकसित किए जाएंगे।
पाठ्यक्रम की मुख्य रूपरेखा
यह पाठ्यक्रम Computational Thinking को आधार बनाकर तैयार किया गया है। इसमें छात्रों को समस्या को छोटे हिस्सों में बांटना (Decomposition), पैटर्न पहचानना, आवश्यक जानकारी को अलग करना (Abstraction) और क्रमबद्ध समाधान तैयार करना (Algorithmic Thinking) सिखाया जाएगा।
इन कौशलों को Artificial Intelligence और Machine Learning की नींव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, छात्रों को यह भी समझाया जाएगा कि AI का दैनिक जीवन में किस प्रकार उपयोग होता है।
चरणबद्ध कार्यान्वयन
पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा:
- कक्षा 3–5:इसे गणित और “The World Around Us” जैसे विषयों के साथ जोड़ा जाएगा। गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी, जिसके लिए लगभग 50 घंटे का अध्ययन समय निर्धारित किया गया है।
- कक्षा 6–8:छात्रों को प्रोजेक्ट-आधारित अध्ययन के माध्यम से AI के बुनियादी सिद्धांतों से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए लगभग 100 घंटे का अध्ययन समय निर्धारित है।

शिक्षण पद्धति और मूल्यांकन प्रणाली
शिक्षण पद्धति को व्यावहारिक और सहभागितापूर्ण बनाया गया है, जिसमें गणितीय खेल, पहेलियाँ, समस्या-समाधान आधारित गतिविधियाँ, समूह कार्य और चर्चा शामिल हैं।
मूल्यांकन प्रणाली में भी बदलाव किया गया है:
- कक्षा 3–5: गतिविधियों, कक्षा कार्य और अभ्यासों के आधार पर मूल्यांकन
- कक्षा 6–8: प्रोजेक्ट, असाइनमेंट और प्रस्तुतियों के आधार पर आकलन
इसके साथ ही Teacher Observation का भी उपयोग किया जाएगा। अब “क्या याद है” के बजाय “क्या कर सकते हैं” पर अधिक जोर दिया जाएगा।
नैतिक उपयोग पर जोर
पाठ्यक्रम में तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अंतर्गत छात्रों को AI में संभावित पक्षपात (Bias) की पहचान, जानकारी की सत्यता की जांच और तकनीक के सुरक्षित उपयोग के बारे में सिखाया जाएगा, ताकि वे “Responsible Digital Citizens” बन सकें।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने इसे केवल एक शैक्षिक सुधार नहीं, बल्कि मानव क्षमता में एक राष्ट्रीय निवेश बताया है। पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना और उनमें नवाचार की भावना विकसित करना है। इसके साथ ही, यह पहल छात्रों को उभरती तकनीकों के साथ जुड़ने में सक्षम बनाते हुए व्यापक रूप से शिक्षा के स्वरूप में बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस संदर्भ में Central Board of Secondary Education (CBSE) ने सभी संबद्ध स्कूलों को इस पाठ्यक्रम को लागू करने के निर्देश दिए हैं, जबकि National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने इसे National Curriculum Framework 2023 के अनुरूप विकसित किया है।
????️ (9 April) downtoearth
बच्चों के कपड़ों में सीसा की उपस्थिति: एक अध्ययन
आजकल बच्चों के लिए चमकीले और रंग-बिरंगे कपड़े बहुत आम हो गए हैं, लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन ने इनके खतरे की ओर ध्यान दिलाया है। Marian University की केमिस्ट्री लैब में किए गए शोध में पाया गया कि कई बच्चों के कपड़ों में सीसा (लेड) सुरक्षित सीमा से अधिक मात्रा में मौजूद है।
इस शोध की शुरुआत तब हुई जब एक वैज्ञानिक की बेटी के शरीर में सीसे का उच्च स्तर पाया गया। इसके बाद बच्चों के उपयोग की चीजों की जांच की गई। अध्ययन में यह सामने आया कि सीसा केवल जिपर या बटन में ही नहीं, बल्कि कपड़ों के रंग में भी हो सकता है। कुछ निर्माता रंग को चमकीला और टिकाऊ बनाने के लिए लेड एसीटेट जैसे रसायनों का उपयोग करते हैं।
शोधकर्ताओं ने 11 रंगीन शर्टों की जांच की, जो अलग-अलग दुकानों से खरीदी गई थीं। सभी नमूनों में सीसा की मात्रा 100 ppm की तय सीमा से अधिक पाई गई। खासकर लाल और पीले रंग के कपड़ों में इसका स्तर ज्यादा था।
बच्चों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है क्योंकि उनका शरीर विकसित हो रहा होता है। सीसा मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चे अक्सर कपड़े मुंह में डालते हैं, जिससे यह शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकता है। प्रयोग में यह भी पाया गया कि ऐसा करने से शरीर में सीसा की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक हो सकती है।
अब शोधकर्ता यह भी जांच रहे हैं कि कपड़े धोने से यह सीसा पानी या अन्य कपड़ों में फैलता है या नहीं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि कपड़ों को रंगने के लिए ओक की छाल, अनार के छिलके, रोजमेरी और एलम जैसे प्राकृतिक विकल्प अपनाए जा सकते हैं। जागरूकता बढ़ाकर और सुरक्षित विकल्प चुनकर इस खतरे को कम किया जा सकता है।
????️ (10 April) downtoearth
अध्ययन: समुद्री वायरस और मानव आंखों के रोग के बीच संभावित संबंध
हाल ही में Nature Microbiology में प्रकाशित एक अध्ययन में यह संकेत दिया गया है कि Covert Mortality Nodavirus (CMNV), जिसे अब तक केवल जलीय जीवों (जैसे मछली और झींगा) तक सीमित माना जाता था, कुछ मानव मामलों में आंखों की एक विशेष बीमारी से संबंधित हो सकता है।
यह शोध चीन में देखे गए Persistent Ocular Hypertension Viral Anterior Uveitis (POH-VAU) नामक रोग की जांच पर आधारित है। इस स्थिति में आंखों के भीतर दबाव बढ़ जाता है और लगातार सूजन बनी रहती है, जिससे दृष्टि प्रभावित हो सकती है। पहले इस बीमारी का स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं था।अध्ययन में 2022 से 2025 के बीच 70 मरीजों के नमूनों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान आंखों के ऊतकों में सूक्ष्म वायरस कण पाए गए। आणविक परीक्षणों (जैसे genetic sequencing) से यह पाया गया कि ये कण CMNV से लगभग 98–99% तक मेल खाते हैं। इसके विपरीत, स्वस्थ व्यक्तियों में इस प्रकार के कण नहीं मिले।
संभावित संक्रमण मार्ग को समझने के लिए मरीजों की जीवनशैली का भी अध्ययन किया गया। अधिकांश प्रभावित व्यक्तियों में कच्चे या अधपके समुद्री खाद्य पदार्थों के संपर्क या सेवन का आदत पाया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि ऐसे संपर्क संक्रमण के संभावित माध्यम हो सकते हैं, हालांकि इसे अंतिम रूप से सिद्ध करने के लिए और शोध आवश्यक है।
प्रयोगशाला स्तर पर किए गए परीक्षणों में, जब इस वायरस को कोशिकाओं और पशु मॉडल (जैसे चूहों) पर जांचा गया, तो आंखों के दबाव में वृद्धि और सूजन जैसे लक्षण विकसित हुए, जो मानव मामलों से मिलते-जुलते थे। इससे इस संबंध को प्रयोगात्मक स्तर पर कुछ समर्थन मिलता है।
अध्ययन यह भी दर्शाता है कि CMNV केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न महाद्वीपों में कई जलीय प्रजातियों में पाया गया है। यह व्यापक उपस्थिति इस वायरस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती है।शोधकर्ताओं के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, जलीय पारिस्थितिकी में बदलाव और मानव गतिविधियों में वृद्धि ऐसे “स्पिलओवर” घटनाओं (जहाँ रोगजनक एक प्रजाति से दूसरी में पहुंचता है) की संभावना बढ़ा सकते हैं।
हालांकि, यह अध्ययन अभी प्रारंभिक साक्ष्य प्रस्तुत करता है। CMNV और मानव रोग के बीच कारणात्मक संबंध (causal relationship) को पूरी तरह स्थापित करने के लिए आगे और व्यापक अनुसंधान की आवश्यकता है।
सावधानी के तौर पर विशेषज्ञ समुद्री खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह पकाकर खाने, कच्चे सीफूड को संभालते समय सुरक्षा बरतने और आंखों में असामान्य लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अनुशंसा करते हैं।
????️ (7 April) downtoearth
अध्ययन: मेनिन्जाइटिस वैश्विक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती
हाल के वर्षों में मेनिन्जाइटिस एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आया है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2023 में इस बीमारी से लगभग 2.59 लाख लोगों की मृत्यु हुई, जबकि 25 लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए। इस बीमारी का असर बच्चों पर विशेष रूप से अधिक देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार, कुल मौतों में लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की है, जिनमें 86,000 से अधिक बच्चों की मृत्यु दर्ज की गई। अधिकांश मामले उप-सहारा अफ्रीका क्षेत्र से जुड़े हैं।
इन निष्कर्षों को The Lancet Neurology में प्रकाशित किया गया है।
मेनिन्जाइटिस क्या है और कैसे होता है
मेनिन्जाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्लियों (मेनिन्जेस) में सूजन आ जाती है। यह संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या परजीवियों के कारण हो सकता है।
यह संक्रमण आमतौर पर नाक या गले के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और रक्त के जरिए मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस में यह प्रक्रिया तेज होती है, जिससे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ जाता है और स्थिति गंभीर हो सकती है। World Health Organization के अनुसार, बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस कई मामलों में 24 घंटे के भीतर जानलेवा हो सकता है। अनुमान है कि इससे संक्रमित हर छठे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, जबकि बचे हुए कई मरीजों को लंबे समय तक शारीरिक या मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कारण और फैलाव
बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस के प्रमुख कारणों में
- Neisseria meningitidis
- Streptococcus pneumoniae
- Haemophilus influenzae
- Streptococcus agalactiae
शामिल हैं। यह बीमारी खांसने, छींकने या संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से फैल सकती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, कुपोषण और खराब जीवन स्थितियां इसके जोखिम को बढ़ाती हैं।
वैश्विक प्रसार और हालिया स्थिति
सबसे अधिक मामले उप-सहारा अफ्रीका के उस क्षेत्र में देखे जाते हैं जिसे “मेनिन्जाइटिस बेल्ट” कहा जाता है। यह क्षेत्र सेनेगल से इथियोपिया तक फैला है, जहां नाइजीरिया, चाड और नाइजर जैसे देशों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
हालांकि यह समस्या मुख्य रूप से विकासशील देशों में अधिक है, लेकिन विकसित देशों में भी इसका खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उदाहरण के तौर पर, United Kingdom में हाल ही में एक प्रकोप के बाद दो लोगों की मृत्यु हुई और केंट क्षेत्र में दो सप्ताह के भीतर 10,000 से अधिक लोगों को टीका लगाया गया।
जोखिम कारक और चुनौती
अध्ययन के अनुसार, कम जन्म वजन, समय से पहले जन्म और घरेलू वायु प्रदूषण इस बीमारी से होने वाली मौतों के प्रमुख जोखिम कारक हैं। यह दर्शाता है कि यह केवल एक संक्रमण नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से भी जुड़ी समस्या है।
हालांकि वर्ष 2000 के बाद टीकाकरण के कारण मामलों और मौतों में कमी आई है, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है। World Health Organization ने 2030 तक मामलों में 50% और मौतों में 70% कमी लाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वर्तमान प्रगति उस गति से नहीं हो रही है।
????️ (10 April) Indian express
दुधवा टाइगर रिजर्व के पास 25 गिद्धों की मौत, विषाक्तता की आशंका
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में Dudhwa Tiger Reserve के बफर ज़ोन से सटे एक गांव में मंगलवार दोपहर एक असामान्य घटना सामने आई। एक ग्रामीण ने अपने खेत के ऊपर हिमालयी ग्रिफ़ॉन गिद्धों को मंडराते देखा, लेकिन कुछ ही देर में ये पक्षी अचानक गिरने लगे।
जब तक वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तब तक 25 गिद्धों की मौत हो चुकी थी, जबकि छह पक्षियों को जीवित लेकिन अचेत अवस्था में बचाया गया। इनमें से चार को उपचार के बाद उड़ने लायक बना दिया गया, जबकि बाकी का इलाज जारी है।
प्रारंभिक जांच में यह मामला द्वितीयक विषाक्तता (secondary poisoning) का प्रतीत हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, संभावना है कि खेतों में कीटनाशक या किसी रसायन से मिला भोजन छोड़ा गया था, जिसे आवारा कुत्तों को मारने के उद्देश्य से रखा गया हो सकता है। ऐसे में, कुत्तों के मरने के बाद उनके शव खाने वाले गिद्ध भी विषाक्तता का शिकार हो गए।
वन विभाग के अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। मृत पक्षियों का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा और उनके अंगों के नमूने Indian Veterinary Research Institute भेजे जाएंगे, ताकि मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि हाल के समय में इस तरह की घटना नहीं देखी गई है और यह जांच की जा रही है कि क्या यह जानबूझकर किया गया था या नहीं। साथ ही, स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की भी योजना है, ताकि हानिकारक रसायनों के उपयोग को रोका जा सके। यह क्षेत्र रिज़र्व के बफर ज़ोन में आता है, जहां वन्यजीवों और मानव गतिविधियों का संपर्क अधिक रहता है।
जिस प्रजाति के गिद्ध प्रभावित हुए हैं — Himalayan Griffon Vulture — उसे International Union for Conservation of Nature की रेड लिस्ट में “Near Threatened” श्रेणी में रखा गया है। हालांकि यह प्रजाति अत्यधिक संकटग्रस्त नहीं है, फिर भी इस तरह की घटनाएं इनके संरक्षण के लिए चिंता का विषय हैं।
????️ (April) Institute for the Study of War, The Guardian, aljazeera
ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष: प्रमुख घटनाएँ और विस्तार (6 अप्रैल – 12 अप्रैल 2026)
6 अप्रैल से 12 अप्रैल के बीच ईरान–अमेरिका–इज़राइल संघर्ष ने सैन्य टकराव से कूटनीतिक वार्ता की ओर एक महत्वपूर्ण मोड़ लिया, हालांकि जमीन पर तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। इस अवधि में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़, लेबनान मोर्चा और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे संघर्ष के केंद्रीय तत्व बनकर उभरे। इसी क्रम में पाकिस्तान की मध्यस्थता से युद्धविराम और इस्लामाबाद वार्ता के प्रयास भी हुए, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ सका।
???? 6 अप्रैल
ईरान ने अमेरिका के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया जिसमें संघर्ष को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को खोलने की शर्त शामिल थी। इससे पहले Donald Trump ने अंतिम समय-सीमा तय करते हुए न केवल ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले की चेतावनी दी थी, बल्कि उसे “स्टोन एज में भेजने” और उसकी पूरी संरचना को नष्ट करने जैसे कड़े बयान भी दिए थे। इसी दिन ईरान, Hezbollah और Houthis द्वारा समन्वित हमलों के संकेत मिले, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संघर्ष बहु-क्षेत्रीय रूप ले चुका है। साथ ही Israel Defense Forces ने ईरान के प्रमुख पेट्रोकेमिकल परिसरों, जो देश के लगभग 85 प्रतिशत पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े हैं जिनमें South Pars शामिल है, पर हमलों की पुष्टि की।
???? 7 अप्रैल (युद्धविराम की घोषणा)
तीव्र सैन्य दबाव और अमेरिकी धमकियों के बीच 7 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम घोषित किया गया। यह समझौता मुख्यतः इस आधार पर था कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को आंशिक रूप से खोलेगा और जहाजों की आवाजाही की अनुमति देगा, जबकि अमेरिका तत्काल बड़े हमलों को रोकेगा और वार्ता के लिए तैयार होगा।
हालांकि, इस युद्धविराम की व्याख्या शुरू से ही विवादित रही। पाकिस्तान और ईरान ने इसे व्यापक बताया जिसमें लेबनान भी शामिल था, जबकि इज़राइल और अमेरिका ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है और वहां कार्रवाई जारी रहेगी।
इसी संदर्भ में रिपोर्ट्स सामने आईं कि रूस ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले के लिए सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध करा सकता है। जानकारी के अनुसार, रूसी सैटेलाइट इस क्षेत्र की सक्रिय निगरानी कर रहे हैं और पहले भी ईरान को क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों से संबंधित सूचनाएं प्रदान की गई हैं।
आंतरिक स्तर पर, ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया के निर्णयों में Islamic Revolutionary Guards Corps के वरिष्ठ कमांडरों की भूमिका प्रमुख बनी हुई है, जिनमें ब्रिगेडियर जनरल Ahmad Vahidi और केंद्रीय मुख्यालय के कमांडर Ali Abdollahi Aliabadi शामिल बताए जा रहे हैं।
???? 8–9 अप्रैल
युद्धविराम लागू होने के बावजूद स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हो सकी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ आंशिक रूप से खुला, लेकिन ईरान द्वारा नौसैनिक बारूदी सुरंगों की संभावित मौजूदगी और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता के कारण जहाजरानी सामान्य स्तर पर नहीं लौट सकी।
इसी दौरान ईरान ने वार्ता के लिए एक संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें उसने कुछ प्रमुख मुद्दों पर अपने रुख को नरम किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव में सीमित स्तर पर यूरेनियम संवर्धन जारी रखने की अनुमति, अमेरिकी प्रतिबंधों में चरणबद्ध ढील, और जमे हुए ईरानी परिसंपत्तियों तक आंशिक पहुंच जैसे बिंदु शामिल थे। इसके साथ ही, ईरान ने मध्य पूर्व से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी की अपनी पूर्व मांग को भी अपेक्षाकृत कम महत्व दिया।
कूटनीतिक स्तर पर यह भी सामने आया कि Abbas Araghchi को युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए Islamic Revolutionary Guards Corps (IRGC) के वरिष्ठ कमांडरों को मनाना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के हफ्तों में कठोर रुख वाले IRGC कमांडरों का प्रभाव बढ़ा है, जो ईरान की रणनीतिक और सैन्य निर्णय प्रक्रिया में अधिक केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, इन प्रस्तावों के बावजूद लेबनान को लेकर मतभेद जारी रहे। ईरान और पाकिस्तान इस युद्धविराम को व्यापक मानते रहे, जबकि अमेरिका और इज़राइल ने इसे केवल ईरान–अमेरिका संदर्भ तक सीमित बताया। इसी कारण इज़राइल ने Hezbollah के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को जारी रखा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि युद्धविराम का प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर असमान है।
इसी संदर्भ में Benjamin Netanyahu ने अधिकारियों को लेबनान सरकार के साथ सीधे वार्ता शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि Hezbollah के निरस्त्रीकरण (disarmament) के मुद्दे पर चर्चा की जा सके।
???? 10 अप्रैल
कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत 10 अप्रैल को ईरानी प्रतिनिधिमंडल Islamabad पहुंचा, जिसकी अगुवाई संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi कर रहे थे। यह प्रतिनिधिमंडल “Minab-168” नामक विमान से पहुंचा, जिसे फरवरी हमले में मारे गए बच्चों की स्मृति में नाम दिया गया था।
अमेरिकी पक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance वार्ता का नेतृत्व कर रहे थे, जिनके साथ विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner भी शामिल थे।
हालांकि, युद्धविराम से जुड़ा कोई स्पष्ट और सार्वजनिक लिखित समझौता उपलब्ध नहीं था, जिससे इसके दायरे विशेषकर सैन्य गतिविधियों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर नियंत्रण को लेकर अस्पष्टता बनी रही। इसी दौरान Donald Trump ने आरोप लगाया कि ईरान होर्मुज़ में समुद्री यातायात को प्रभावित कर “short-term extortion” की रणनीति अपना रहा है।
वार्ता से पहले ही यह स्पष्ट था कि दोनों पक्ष अपने मुख्य मुद्दों पर अड़े हुए हैं—अमेरिका परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार पर कड़ा नियंत्रण चाहता था, जबकि ईरान प्रतिबंधों में तत्काल राहत और अपने अधिकारों की मान्यता पर जोर दे रहा था।
क्षेत्रीय स्तर पर तनाव जारी रहा। Kuwait ने बताया कि उसकी वायुसीमा में पिछले 24 घंटों के भीतर सात ईरानी ड्रोन को रोका गया। वहीं इराक में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमले की घटनाओं ने यह संकेत दिया कि ईरान समर्थित मिलिशिया समूह सक्रिय बने हुए हैं, जिनके पीछे Islamic Revolutionary Guards Corps (IRGC) की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है।
इसी अवधि में Hezbollah ने इज़राइल और दक्षिणी लेबनान में हमलों का सिलसिला बनाए रखा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि लेबनान मोर्चा युद्धविराम से प्रभावी रूप से बाहर है।
आर्थिक स्तर पर भी दबाव के संकेत मिले। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी बैंकिंग प्रणाली कमजोर स्थिति में है और आर्थिक संकट शासन के लिए चुनौती बन सकता है। इसी के साथ, यह भी सामने आया कि ईरान अपने संवेदनशील परमाणु ठिकानों—जैसे इस्फहान स्थित ENTC की सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है, ताकि किसी संभावित सैन्य कार्रवाई को कठिन बनाया जा सके।
???? 11 अप्रैल (वार्ता का गतिरोध)
वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के लक्ष्य स्पष्ट रूप से अलग दिखाई दिए। अमेरिका सीमित और त्वरित समझौता चाहता था, जिसका फोकस होर्मुज़ में तनाव कम करने और तत्काल स्थिरता पर था, जबकि ईरान व्यापक समझौते के पक्ष में था, जिसमें प्रतिबंध हटाना, दीर्घकालिक सुरक्षा आश्वासन और क्षेत्रीय भूमिका शामिल थी।
इसी दौरान ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी रखी, जिसमें नौसैनिक बारूदी सुरंगों की मौजूदगी का संकेत देकर जहाजों को अपने नियंत्रण वाले मार्गों से गुजरने के लिए बाध्य करना शामिल था।
साथ ही, युद्धविराम की अवधि का उपयोग ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं—विशेषकर मिसाइल लॉन्च सिस्टम और कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क—को पुनर्गठित करने के लिए किया, जिन्हें लगातार अमेरिकी और इज़राइली हमलों से नुकसान पहुंचा था।
आंतरिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता से जुड़े प्रमुख व्यक्ति Mojtaba Khamenei फरवरी के अंत में हुए हमले के बाद अभी भी चोटों से उबर रहे हैं, जिससे नेतृत्व स्तर पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की संभावित भूमिका भी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, चीन ईरान को उसकी कमजोर हुई वायु रक्षा प्रणाली को पुनर्स्थापित करने में सहायता दे सकता है, जिसमें MANPADS जैसे हथियारों की आपूर्ति शामिल हो सकती है।
???? 12 अप्रैल (विफल वार्ता)
इस्लामाबाद में लगभग 21 घंटे चली वार्ता बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई। दोनों पक्षों के बीच कई मूलभूत मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिससे वार्ता गतिरोध में चली गई।
अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मतभेद निम्न बिंदुओं पर केंद्रित रहे:
- परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका पूर्ण नियंत्रण चाहता था, जबकि ईरान सीमित संवर्धन पर अड़ा रहा
- प्रतिबंध: ईरान तत्काल राहत चाहता था, जबकि अमेरिका चरणबद्ध ढील के पक्ष में था
- सैन्य स्थिति: अमेरिका ने अपनी क्षेत्रीय सैन्य उपस्थिति पर कोई समझौता नहीं किया
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़: ईरान इसे रणनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल करता रहा
वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष ने यह भी संकेत दिया कि सैन्य स्तर पर वह पहले ही बढ़त हासिल कर चुका है, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया कि एक ही बैठक में समझौता संभव नहीं था।
ईरान के भीतर भी स्थिति जटिल बनी रही, जहां लंबे समय से जारी हवाई हमलों के कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है और अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत की सूचना है। दूसरी ओर, लेबनान में इज़राइली हमले जारी रहे, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हो सका।
कुल मिलाकर, 12 अप्रैल तक संघर्ष का कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आ सका है और सैन्य तथा आर्थिक दबाव के बीच स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।









