- (01) Weekly News 6 – 9 october 2025
- (02) Weekly News 12 – 25 oct
- (03) Weekly News 27 – 1 nov
- (04) Weekly News 1 – 8 nov
- (05) Weekly News 10 – 15 nov
- (06) Weekly News 17 – 22 nov
- (07) Weekly News 24 – 29 Dec
- (08) Weekly News 30 Nov – 6 Dec
- (09) Weekly News 7 – 13 Dec
- (10) Weekly News 14 – 20 Dec
- (11) Weekly News 21 – 27 Dec
- (12) Weekly News 28 Dec – 3 Jan
- (13) Weekly News 4 – 10 Jan 2026
- (14) Weekly News 11 – 17 Jan
- (15) Weekly News 18 – 24 Jan
- (16) Weekly News 25 – 31 Jan
- (17) Weekly News 1 – 7 Feb
- (18) Weekly News 8-14 February 2026
- (19) Weekly News 15 – 21 Feb
- (20) Weekly News 22 Feb – 28 Feb
- (21) Weekly News 1 March – 7 March (Conflict between Iran, Israel, and the United States)
- (22) News Update 8 March – 14 March (Nepal Election 2026)
- (23) Weekly News Update 15 March – 21 March (Global E-waste report, Iran war update)
- (24) Weekly News Update 22 March – 5 April (Water Crisis | Iran War | Russia–Ukraine War)
- (25)Weekly News Update 6 April – 12 April (Iran war Update, various research)
- (26)Weekly News Update (13 April – 18 April) Iran Ukrain war, ken-betwa Pariyojana, Hungary election
- (27)Weekly News Update 20 April – 25 April(Iran war Update,SIR,Bulgaria election etc)
- (28)Weekly News Update 26 April – 2 May 2026 (Iran war, ACR SMART TV,Cyborg Botany,Methanol-Ethanol Production)
????️ (19 April) Reuters, politico, EN
ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष: प्रमुख घटनाएँ और विस्तार (20 अप्रैल – 25 अप्रैल 2026)
????20अप्रैल
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ है, फिर भी अमेरिका और ईरान के बीच समझौता संभव है। उन्होंने 21 अप्रैल को इस्लामाबाद में वार्ता के दूसरे दौर की घोषणा की, हालांकि तेहरान ने भागीदारी की पुष्टि नहीं की। इसी दिन अमेरिका ने समुद्री नाकेबंदी जारी रखते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के निकट एक ईरानी ध्वज वाले कंटेनर जहाज को कब्जे में लिया। दूसरी ओर ईरान ने जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा रखा और कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी, धमकियाँ और अत्यधिक मांगें समझौते में बाधा हैं।
शहबाज़ शरीफ़ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत कर मध्यस्थता की तत्परता दोहराई। इसी दौरान अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने के निर्णय का उल्लेख करते हुए इज़राइल के युद्ध अभियान का समर्थन किया। लेबनान में इज़राइली सेना ने दक्षिणी क्षेत्र में चेतावनी जारी रखते हुए अपनी तैनाती बनाए रखने की बात कही। इसी दौरान दक्षिणी लेबनान के देबल क्षेत्र में इज़राइली सेना द्वारा जीसस क्राइस्ट की प्रतिमा को तोड़ने और चर्च और अन्य सामुहित जगह से लोगो निकलने और सार्वजानिक सम्पति को नुकसान पहुचाने की घटना सामने आयी।
????21अप्रैल
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम समाप्ति के निकट पहुँचा। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि समय सीमा तक समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर युद्ध के लिए तैयार है। साथ ही अमेरिका ने कहा कि ईरानी प्रस्ताव आने और वार्ता पूरी होने तक युद्धविराम जारी रखा जा सकता है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी समुद्री नाकेबंदी जारी रखी। ट्रंप ने कहा कि यह प्रतिबंध तब तक रहेगा जब तक तेहरान शांति समझौते को स्वीकार नहीं करता। वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी रही। इस्लामाबाद में प्रस्तावित अगले दौर की बातचीत पर पाकिस्तान को ईरान की औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली। ईरान ने अमेरिकी मांगों को भी अस्वीकार किया, जिनमें परमाणु कार्यक्रम रोकना और समृद्ध यूरेनियम सौंपना शामिल था। दूसरी ओर ईरान ने अपनी जमी हुई संपत्तियों की रिहाई और युद्ध में हुए नुकसान के मुआवज़े की मांग दोहराई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस ने युद्धविराम बढ़ाने का समर्थन किया। चीन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में ईरानी जहाज की जब्ती पर चिंता जताई और वार्ता फिर शुरू करने की अपील की। इमैनुएल मैक्रों ने दोनों पक्षों की नाकेबंदी को त्रुटिपूर्ण बताया। लेबनान मोर्चे पर हिज़्बुल्लाह ने युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इज़राइल की दिशा में हमला किया। इसके बाद इज़राइली सेना ने जवाबी कार्रवाई की।
????22अप्रैल
अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने की पुष्टि की। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक तेहरान अपना नया प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं करता और वार्ता पूरी नहीं होती। युद्धविराम बढ़ने के साथ अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी समुद्री नाकेबंदी भी जारी रखी। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया और कहा कि नाकेबंदी तथा धमकियों के बीच वार्ता संभव नहीं है। ईरानी नेतृत्व ने यह भी कहा कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को सामान्य रूप से नहीं खोला जाएगा। इसी दौरान ईरानी बलों ने तीन कंटेनर जहाजों को निशाना बनाने, जिनमें दो को कब्जे में लेने का दावा किया।
कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका ने ईरान के हथियार कार्यक्रम से जुड़े नए प्रतिबंध लगाए, जबकि यूरोपीय संघ ने भी अतिरिक्त कदमों की तैयारी शुरू की। इसी बीच लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने संघर्ष से उत्पन्न मानवीय स्थिति से निपटने के लिए 58.7 करोड़ डॉलर की सहायता की मांग की।
????23अप्रैल
अमेरिका ने कहा कि ईरान से शांति प्रस्ताव देने के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। व्हाइट हाउस के अनुसार आगे की प्रक्रिया का निर्णय परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा। अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध अपनी समुद्री नाकेबंदी जारी रखी। अमेरिकी बलों ने कई जहाजों को लौटाया और भारतीय महासागर में एक ऐसे पोत पर कार्रवाई की, जिस पर ईरान को सहायता पहुँचाने का आरोप लगाया गया।
वॉशिंगटन में अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के विरुद्ध सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिससे प्रशासन की नीति को समर्थन मिला। अमेरिकी रक्षा विभाग में फेरबदल भी हुआ। रक्षा मंत्री ने नौसेना सचिव जॉन फेलन को पद से हटा दिया जो ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के तहत हटाए गए 34वें सीनियर अधिकारी हैं।
????24अप्रैल
ट्रंप ने इज़राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की। इसी दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता तुरंत किया जा सकता है, लेकिन अमेरिका दीर्घकालिक समझौते की प्रतीक्षा करेगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद पहुँचे, जबकि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के पाकिस्तान जाने की सूचना दी गई। इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा कि इज़राइल युद्ध फिर शुरू करने के लिए तैयार है और वॉशिंगटन की अनुमति की प्रतीक्षा कर रहा है। इसी बीच इज़राइली सूत्रों ने ईरान पर हवाई हमले की खबरों से इंकार किया।
????25अप्रैल
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उससे जुड़े 34.4 करोड़ डॉलर के क्रिप्टोकरेंसी संसाधनों को फ्रीज़ करने की घोषणा की। साथ ही वॉशिंगटन ने चीन स्थित एक रिफाइनरी तथा ईरानी तेल परिवहन से जुड़े अनेक जहाजरानी नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी तेल से संबंधित किसी प्रकार की छूट बढ़ाने का प्रश्न नहीं है और समुद्री नाकेबंदी जारी रहेगी।
पाकिस्तान की मध्यस्थता के बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष वार्ता पर अनिश्चितता बनी रही। इसी दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बिना प्रतिबंध और बिना शुल्क के तुरंत खोला जाना चाहिए। इस बिच इज़राइल हिज़्बुल्लाह के बिच आंशिक संघर्ष जारी रहा।
इसी अवधि में ईरान के भीतर सार्वजनिक जीवन भी जारी रहा। दुकानें, रेस्तराँ, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक स्थल खुले रहे। पार्कों और कैफ़े में लोगों की उपस्थिति भी देखी गई। इसके साथ ही देश युद्ध से हुए नुकसान, आर्थिक दबाव और राजनीतिक नियंत्रण की स्थिति का सामना करता रहा।
विदेशी हमलों के बावजूद देश की मौजूदा शासन व्यवस्था में परिवर्तन नहीं हुआ। धार्मिक नेतृत्व आधारित राजनीतिक संरचना कायम रही। IRGC और अन्य सुरक्षा संस्थाएँ सक्रिय रहीं। जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद आंतरिक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कड़ी रही। वर्तमान समय में सरकार का ध्यान बाहरी संघर्ष, युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं पर केंद्रित रहा।
देश की अर्थव्यवस्था पर युद्ध और पहले से लागू प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ा। बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचा। व्यापार, रोजगार, संचार और निजी आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हुईं। इंटरनेट प्रतिबंधों का असर व्यवसायों और परिवारों के संपर्क पर भी पड़ा। सामाजिक जीवन में भी बदलाव दिखाई दिए। कुछ स्थानों पर महिलाएँ बिना हिजाब सार्वजनिक स्थानों पर देखी गईं। यह स्थिति पहले हुए सामाजिक आंदोलनों के बाद सामने आई। नागरिकों के बीच भविष्य, आर्थिक स्थिति, स्वतंत्रताओं और सरकारी नीतियों को लेकर चिंता व्यक्त की गई। कई लोगों ने अनिश्चितता, दबाव और कठिनाइयों का उल्लेख किया।
समग्र रूप से वर्तमान ईरान में शासन व्यवस्था कायम रही और सार्वजनिक जीवन चलता रहा, लेकिन युद्ध, आर्थिक दबाव, सामाजिक असंतोष और सुरक्षा नियंत्रण साथ-साथ मौजूद रहे।
????️ (21April) IE
पश्चिम बंगाल की वोटर सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया और ‘Logical Discrepancy’ का प्रश्न
पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा SIR के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में एक केंद्रीय एल्गोरिथ्म के माध्यम से बड़ी संख्या में नामों की पहचान “Logical Discrepancy” के आधार पर की गई है। इससे प्रक्रिया की कार्यप्रणाली, मानदंडों और अपील व्यवस्था को लेकर प्रश्न उठे हैं।
मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग एक सेंट्रल एल्गोरिथ्म (सॉफ्टवेयर) का उपयोग कर रहा है। यह सॉफ्टवेयर वोटर लिस्ट में दर्ज नामों का चयन तथाकथित Logical Discrepancies के आधार पर करता है। सरल शब्दों में कहें तो मशीन उपलब्ध डेटा के आधार पर यह तय करती है कि कहीं कोई असंगति या रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी है या नहीं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि Logical Discrepancy शब्द का उपयोग निर्वाचन आयोग ने पहले सार्वजनिक रूप से नहीं किया था। बाद में अदालत में दिए गए उत्तर में बताया गया कि इसके कुछ मानदंड हैं, जैसे—
- पुरानी वोटर लिस्ट और नई सूची में नाम का mismatch
- माता-पिता से उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना
- दादा-दादी से उम्र का अंतर 40 वर्ष से कम होना
- एक व्यक्ति के नाम से 6 या उससे अधिक बच्चों का जुड़ा होना
इन मानदंडों के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों को जांच के दायरे में लाया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1.36 करोड़ नामों की पहचान की गई। इनमें से 60.06 लाख मामले adjudication (जांच/निर्णय प्रक्रिया) में भेजे गए, जबकि शेष मामलों का निस्तारण नोटिस अवधि में किया गया। इन 60.06 लाख मामलों में से 27.10 लाख नाम बाद में डिलीट कर दिए गए।
इस प्रक्रिया को लेकर यह प्रश्न भी उठा कि पहले यदि किसी नाम पर संदेह होता था, तो नोटिस, सुनवाई और अपील का अवसर दिया जाता था। लेकिन कई शिकायतों में कहा गया कि पर्याप्त समय मिलने से पहले ही नाम हट गए।
कुछ उदाहरण इस प्रक्रिया की प्रकृति को स्पष्ट करते हैं—
क) एक मतदाता के पुराने रिकॉर्ड में जन्म वर्ष सही था, लेकिन बाद में बने नए वोटर ID कार्ड में जन्मतिथि गलत टाइप हो गई। इस त्रुटि के कारण रिकॉर्ड में उसकी उम्र ऐसी दिखाई देने लगी कि पिता और संतान की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर बन गया। बाद में यही “Logical Discrepancy” का आधार बना।
ख) एक अन्य मामले में किसी व्यक्ति का नाम इसलिए जांच में गया क्योंकि एक ही पिता के नाम से छह से अधिक संतानें दर्ज थीं। जबकि संबंधित परिवार वास्तव में बड़ा परिवार था और कई भाई-बहन उसी पिता की संतान थे।
ग) एक मामले में व्यक्ति के पुराने वोटर रिकॉर्ड में नाम का एक रूप दर्ज था, जबकि पासपोर्ट, पेंशन कागज़ात और नए रिकॉर्ड में वही नाम थोड़े बदले हुए रूप में लिखा गया था। नाम की इस भिन्नता को mismatch माना गया।
घ) एक अन्य मामले में परिवार के कुछ सदस्यों ने समान दस्तावेज और समान पारिवारिक लिंक प्रस्तुत किए, फिर भी कुछ नाम सूची में बने रहे और कुछ नाम हटा दिए गए।
इससे पहले बिहार में भी लगभग 9,968 नाम इसी प्रकार हटाए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन विस्तृत आधार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया।
यह पूरा विषय केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह प्रश्न भी जुड़ता है कि डेटा त्रुटि, नाम की वर्तनी, बड़े परिवार, पुराने और नए रिकॉर्ड के अंतर, तथा अपील की समय-सीमा जैसी स्थितियों में जांच की प्रक्रिया किस प्रकार लागू की गई।
इस बीच, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर मामला Supreme Court of India तक पहुंचा है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले चरण (23 अप्रैल) से पहले अदालत ने Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश से उन Appellate Tribunals के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी है, जहां मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की अपीलों की सुनवाई हो रही है।
सुनवाई के दौरान यह कहा गया कि कई मामलों में ट्रिब्यूनल के कामकाज, सुनवाई की प्रक्रिया और प्रतिनिधित्व को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन ट्रिब्यूनलों के समक्ष 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं, जिनमें न केवल नाम हटाए जाने के खिलाफ बल्कि कुछ मामलों में नाम जोड़े जाने पर भी आपत्तियाँ शामिल हैं।
इससे पहले, 13 अप्रैल के आदेश में अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि जिन मामलों में अपीलों का निस्तारण पहले चरण (21 अप्रैल) और दूसरे चरण (27 अप्रैल) से पहले हो जाता है, उनके नाम पूरक मतदाता सूची में जोड़े जा सकते हैं। हालांकि, केवल अपील लंबित रहने के आधार पर मतदान का अधिकार नहीं दिया जाएगा।
????️ (21April) IE
Hormuz बाधा के बाद वैकल्पिक मार्गों पर खाड़ी देशों की केंद्रितता
Strait of Hormuz में हालिया तनाव और समुद्री यातायात में रुकावट के बाद खाड़ी क्षेत्र के देश इस मार्ग पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर काम तेज कर रहे हैं। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का लगभग एक-पाँचवां हिस्सा वहन करता है, जिससे इसमें व्यवधान का असर सीधे ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
इस स्थिति के बाद Saudi Arabia और United Arab Emirates सहित अन्य खाड़ी देशों ने पाइपलाइन और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर ध्यान बढ़ाया है, ताकि निर्यात को एक ही समुद्री मार्ग पर निर्भर न रहना पड़े।
वर्तमान में कुछ वैकल्पिक पाइपलाइन पहले से मौजूद हैं, जिनमें सऊदी अरब की East–West पाइपलाइन, जो तेल को Red Sea के Yanbu पोर्ट तक ले जाती है, और UAE की ADCOP पाइपलाइन, जो Habshan से Fujairah तक जाती है, शामिल हैं। हालांकि, इनकी क्षमता समुद्री मार्ग की तुलना में सीमित है।
इस स्थिति के बाद क्षेत्र में कई संभावित परियोजनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें मौजूदा पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाना, नई पाइपलाइन बनाना और बंद पड़ी परियोजनाओं को फिर से शुरू करना शामिल है। प्रमुख विकल्पों में Iraq–Turkey पाइपलाइन (Kirkuk–Ceyhan), Basra–Aqaba पाइपलाइन (Iraq–Jordan) और IPSA पाइपलाइन जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो वर्तमान में आंशिक रूप से निष्क्रिय हैं।
हालांकि, इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बड़े निवेश, समय और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता होगी। पूर्व में भी कई पाइपलाइन परियोजनाएं क्षेत्रीय राजनीतिक तनाव और देशों के बीच विवादों के कारण प्रभावित रही हैं। कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों के पास भौगोलिक कारणों से सीमित विकल्प हैं, जबकि इराक जैसे देशों के लिए निर्यात बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों का विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
????️ (21April) IE
Deepathoon विवाद के बीच ‘mama–machan’ संबंध कायम
Thiruparankundram में Subramanya Swamy Temple और Sikandar Badusha Dargah से जुड़ा Deepathoon (पत्थर का स्तंभ) विवाद एक बार फिर सामने आया है, हालांकि स्थानीय स्तर पर स्थिति सामान्य बनी हुई है। यह विवाद पहाड़ी पर स्थित उस स्थान को लेकर है, जहां Karthigai Deepam जलाने की परंपरा जुड़ी रही है।
1 दिसंबर 2025 को मद्रास हाईकोर्ट के जज G R Swaminathan ने आदेश दिया कि Deepathoon दरगाह के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और वहां दीप जलाने की अनुमति दी जा सकती है। इसके बाद यह मुद्दा फिर सक्रिय हुआ। बाद में इस आदेश से जुड़े कुछ मामलों पर अदालत की मदुरै बेंच द्वारा रोक भी लगाई गई, जिससे मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में बना हुआ है।
यह विवाद करीब एक सदी पुराना बताया जाता है। पहाड़ी के नीचे मुरुगन मंदिर, बीच में Uchipillayar मंदिर और ऊपर दरगाह तथा Deepathoon स्थित हैं। परंपरा के अनुसार, दीप Uchipillayar मंदिर पर भी जलाया जाता रहा है।
राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को विभिन्न दलों द्वारा उठाया गया, हालांकि मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है।
स्थानीय लोगों और दुकानदारों के अनुसार, क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच संबंध सामान्य बने हुए हैं, जिन्हें वे “mama–machan” (करीबी संबंध) के रूप में बताते हैं। दोनों समुदायों की आजीविका मंदिर और दरगाह पर आने वाले श्रद्धालुओं पर निर्भर है। विवाद के दौरान कुछ समय के लिए पुलिस की मौजूदगी बढ़ी थी और कारोबार प्रभावित हुआ, हालांकि वर्तमान में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि बाहरी लोगों की वजह से तनाव बढ़ा, जबकि दीप जलाने की परंपरा को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग राय मौजूद है।
????️ (2April) apnews
बुल्गारिया के संसदीय चुनाव और राजनीतिक स्थिरता की नई संभावना
बुल्गारिया में हुए संसदीय चुनाव में रूमेण रादेव के नेतृत्व वाले Progressive Bulgaria गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिली है। आधिकारिक परिणामों के अनुसार गठबंधन को 44.6% वोट मिले, जो दूसरे स्थान पर रही Boyko Borissov की GERB पार्टी (13.4%) और We Continue the Change (12.6%) से काफी अधिक है।
इस परिणाम के साथ देश में पिछले कुछ वर्षों से बनी राजनीतिक अस्थिरता के कम होने की संभावना जताई जा रही है। 2021 के बाद से लगातार खंडित जनादेश के कारण कमजोर सरकारें बनीं, जो लंबे समय तक नहीं टिक सकीं।
रूस-यूक्रेन मुद्दे पर रादेव ने EU की सैन्य सहायता नीतियों पर आपत्ति जताई है और समाधान के लिए वार्ता को प्राथमिकता दी है।
पूर्व फाइटर पायलट और राष्ट्रपति रहे रादेव ने प्रधानमंत्री बनने के उद्देश्य से चुनाव लड़ा। उन्होंने अपने अभियान में भ्रष्टाचार और प्रभावशाली समूहों के नियंत्रण को समाप्त करने की बात कही। यह चुनाव ऐसे समय में हुआ जब पिछली सरकार भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद गिर गई थी। नई सरकार के सामने संस्थाओं में भरोसा बहाल करना और प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौती होगी।
????️ (21April) bbc
ट्रम्प के ऐलानों से पहले बाजार में असामान्य ट्रेडिंग के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के प्रमुख सार्वजनिक बयानों से पहले वित्तीय बाजारों में असामान्य ट्रेडिंग गतिविधि के पैटर्न सामने आए हैं। कई मामलों में देखा गया कि बड़े ऐलान से ठीक पहले तेल और शेयर बाजारों में ट्रेडिंग वॉल्यूम अचानक बढ़ गया।
उपलब्ध बाजार आंकड़ों के विश्लेषण में यह पाया गया कि यह बढ़ोतरी कई बार घोषणा से मिनटों या घंटों पहले दर्ज की गई। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी गतिविधि में insider trading के संकेत दिखाई देते हैं, जहां सार्वजनिक होने से पहले जानकारी के आधार पर दांव लगाया जाता है। जबकि अन्य इसे बाजार प्रतिभागियों द्वारा नीतिगत संकेतों का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता से जोड़ते हैं।
इस संदर्भ में विभिन्न उदाहरण सामने आए हैं – जैसे मार्च 2026 में ईरान से जुड़े बयान से पहले तेल बाजार में बड़े पैमाने पर दांव लगाए गए, जिसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई। इसी तरह, 2025 में टैरिफ नीति में बदलाव की घोषणा से पहले शेयर बाजार में असामान्य निवेश दर्ज हुआ, जिसके बाद बाजार में उल्लेखनीय उछाल देखा गया।
इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन prediction markets में भी कुछ खातों द्वारा संभावित राजनीतिक या सैन्य घटनाओं से पहले दांव लगाए जाने के मामले सामने आए, जिनसे बाद में बड़ा लाभ हुआ। हालांकि, इन गतिविधियों के बावजूद अब तक किसी नियामक संस्था द्वारा insider trading की पुष्टि नहीं की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में सूचना के स्रोत की पहचान करना कठिन होता है, जिससे कानूनी कार्रवाई जटिल हो जाती है।
इस बीच, नियामक संस्थाओं ने बाजार की पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही है, जबकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों को आधारहीन बताया गया है।
????️ (22April) Dainik Bhaskar
पढ़ाई-नौकरी के लिए गए युवा रूस में युद्ध में फंसे
पढ़ाई या नौकरी के लिए रूस गए भारतीय युवाओं के युद्ध में फंसने और मौत के मामले सामने आ रहे हैं। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के कई परिवारों ने बताया कि उनके बच्चे स्टडी या टूरिस्ट वीजा पर रूस गए थे, लेकिन बाद में उन्हें सेना में भर्ती कर यूक्रेन युद्ध में भेज दिया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले करीब डेढ़ साल में इन चार राज्यों के कम से कम 13 युवाओं के शव भारत लाए जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों युवाओं के लापता होने की बात सामने आई है। कई मामलों में परिवारों ने बताया कि एजेंटों ने झांसा देकर युवाओं को विदेश भेजा और वहां पहुंचने के बाद उनसे जबरन सैन्य कॉन्ट्रैक्ट साइन कराया गया।
परिजनों के अनुसार, युवाओं को 10–15 दिन की ट्रेनिंग देने के बाद युद्ध क्षेत्र की अग्रिम पंक्ति (फ्रंट लाइन) में तैनात कर दिया गया। इसके बाद कई युवाओं की मौत की सूचना मिली, जबकि कुछ के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं है। राज्यवार उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं, जहां कई युवक लापता हैं और कुछ की मौत हो चुकी है। पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर से भी ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं।
इस मामले में चार राज्यों के 26 परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर 24 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है। याचिका में लापता युवाओं की स्थिति स्पष्ट करने, मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने और एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
24 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े मामलों में कुल 26 भारतीयों का मुद्दा अदालत के सामने है, जिनमें से 10 की मौत हो चुकी है। सरकार के अनुसार, कुछ लोग स्वेच्छा से रूसी सेना में शामिल हुए थे, जबकि कुछ मामलों में एजेंटों द्वारा गुमराह किए जाने की संभावना भी सामने आई है।
अदालत ने सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिसमें रूस गए भारतीयों की कुल संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है और सुनवाई जारी है।
????️ (24April) Dainik Bhaskar
मणिपुर में मैतेई बच्चों की मौत के बाद तनाव, विरोध तेज
मणिपुर में हालिया हमलों के बाद फिर तनाव बढ़ गया है। 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के त्रोंग्लाओबी गांव में प्रोजेक्टाइल हमले में मैतेई समुदाय के दो बच्चों की मौत हो गई और उनकी मां घायल हुई। यह इलाका सुरक्षा बलों के बनाए “बफर जोन” के करीब है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
इस घटना के बाद इंफाल घाटी में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। ‘मीरा पाइबी’- मणिपुर की महिलाओं का पारंपरिक समूह ने मशाल जुलूस निकाले। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प भी हुई।
18 अप्रैल को नेशनल हाईवे-202 पर एक पूर्व सैनिक समेत दो लोगों की हत्या की घटना भी सामने आई। इस हमले के लिए कुकी उग्रवादी समूहों पर संदेह जताया गया है, हालांकि आधिकारिक तौर पर सभी मामलों की जांच जारी है। इन घटनाओं के विरोध में 19 अप्रैल से घाटी के जिलों में पांच दिन का शटडाउन किया गया, जिससे बाजार, स्कूल और परिवहन प्रभावित रहे।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 25 अप्रैल तक हमले में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही बफर जोन की सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय बलों की भूमिका की जांच की भी मांग उठी है।
मणिपुर में यह तनाव मुख्यतः मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच लंबे समय से चल रहे जातीय संघर्ष से जुड़ा है। मैतेई समुदाय, जो मुख्य रूप से घाटी में रहता है, राज्य की आबादी का लगभग 50% से अधिक हिस्सा है, जबकि कुकी-जो और अन्य जनजातीय समुदाय पहाड़ी इलाकों में बसे हैं और उनकी हिस्सेदारी लगभग 40% के आसपास मानी जाती है।
सरकार के अनुसार, कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है। राज्य में 34,000 से अधिक सुरक्षाबल तैनात हैं, लेकिन करीब 7,000 अतिरिक्त जवानों की आवश्यकता बताई गई है।
पिछले करीब तीन वर्षों से जारी इस संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत और 60,000 से ज्यादा लोगों के विस्थापन की जानकारी सामने आई है। हालिया घटनाओं के बाद एक बार फिर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।


