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- (27)Weekly News Update 20 April – 25 April(Iran war Update,SIR,Bulgaria election etc)
- (28)Weekly News Update 26 April – 2 May 2026 (Iran war, ACR SMART TV,Cyborg Botany,Methanol-Ethanol Production)
- (29)Weekly News Update 4 May – 9 May 2026 (Iran war, Metamaterials, Claude Mythos, Dual-Use Satellites)
- 30.Weekly News Update 10 – 16 may 2026( iran war, Pathfinder mission, sir, Taiwan issue)
(4 – 9 May) isw, reuters, Aljazeera
ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष: प्रमुख घटनाएँ और विस्तार (4 मई – 9 मई 2026)
इस सप्ताह में अमेरिका–ईरान तनाव के साथ-साथ युद्ध समाप्ति की संभावनाएँ और कूटनीतिक प्रयास भी तेज होते दिखाई दिए। पाकिस्तान, चीन ,रूस, ब्रिटेन और खाड़ी देशों सहित कई शक्तियाँ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस संकट में सक्रिय रहीं।
दूसरी ओर इज़राइल ने संघर्षविराम और वार्ताओं के बीच भी हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अपना आक्रामक रुख बनाए रखा, जबकि Strait of Hormuz को लेकर सैन्य तनाव, आर्थिक दबाव और वैश्विक समुद्री व्यापार पर संकट लगातार बना रहा।
4 मई
अमेरिकी राष्ट्रपति ने “Project Freedom” शुरू करते हुए अरब सागर में फँसे लगभग 1550 commercial ships को Strait of Hormuz से सुरक्षित निकालने के लिए 15,000 सैनिक, fighter aircraft, drones और guided missile destroyers तैनात किए। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी कि उसकी अनुमति के बिना जलडमरूमध्य पार करने वाले किसी भी जहाज़ पर हमला किया जाएगा। अमेरिका ने दो जहाज़ों के पार होने का दावा किया, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया।
कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान और ईरान के विदेश मंत्री के बीच क्षेत्रीय स्थिति और शांति प्रयासों पर बातचीत हुई। इस बीच ट्रम्प ने NATO देशों पर पर्याप्त समर्थन न देने का आरोप लगाया, जिस पर नाटो महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि यूरोपीय देश अब सैन्य समझौतों को लागू कर रहे हैं। पाकिस्तान के अनुसार, अमेरिका ने एक ईरानी कंटेनर जहाज से 22 चालक दल को निकालकर पाकिस्तान पहुंचाया, जिन्हें ईरानी अधिकारियों को सौंपा जाएगा। दूसरी ओर, इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में कम से कम आठ स्थानों पर हमले किए, जिनसे पहले नागरिकों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी गई; रात में फ़्लेयर्स गिराए गए और कई इलाकों में गोलाबारी भी हुई।
5 मई
Strait of Hormuz में तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दावे–खंडन तेज हुए। IRGC ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा कि जिन नौकाओं को अमेरिका ने “Project Freedom” के दौरान निशाना बनाने का दावा किया, वे IRGC से जुड़ी नहीं बल्कि नागरिक नौकाएँ थीं, जिनमें पाँच लोगों की मौत हुई। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति ने Hormuz के प्रबंधन को देश का “वैध अधिकार” बताया, जबकि विदेश मंत्री ने कहा कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। इस बीच UAE के फुजैराह ऊर्जा केंद्र पर हमले में तीन भारतीय घायल हुए, जबकि ओमान में भी हमले की खबर सामने आई; हालांकि ईरान ने इन घटनाओं से इंकार किया। इन हमलों की कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और सऊदी अरब सहित कई देशों ने निंदा की।
लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने कहा कि इज़राइल के साथ किसी भी वार्ता से पहले सुरक्षा समझौता और हमलों का अंत जरूरी है, जबकि हिज़्बुल्लाह ने दक्षिणी सीमा पर इज़रायली बलों के साथ झड़प की खबर सामने आई।
6 मई
अमेरिकी राष्ट्रपति ने Strait of Hormuz में जहाज़ों को एस्कॉर्ट करने के लिए शुरू किए गए “Project Freedom” को शुरुआती चरण में ही रोक दिया, ताकि ईरान के साथ समझौते की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। कूटनीतिक स्तर पर Abbas Araghchi ने बीजिंग में Wang Yi से मुलाकात की, जिसे संकट के बीच चीन की मध्यस्थ भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। वहीं Marco Rubio और Sergey Lavrov के बीच भी बातचीत हुई।
अमेरिका ने “Epic Fury” अभियान के आक्रामक चरण की समाप्ति की घोषणा की, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि Hormuz में किसी भी हमले की स्थिति में “कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया” दी जाएगी। ट्रम्प ने ईरान से “समझदारी भरा निर्णय” लेने की अपील करते हुए कहा कि वे संघर्ष को और नहीं बढ़ाना चाहते। वहीं Volodymyr Zelenskyy ने बहरीन को रूस और ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोन से निपटने के लिए अपनी तकनीकी विशेषज्ञता (air defence और counter-drone systems) साझा करने की पेशकश की।
इजराइल Democracy Institute के सर्वे के अनुसार 59% इज़राइली इस चरण में ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के खिलाफ हैं, जबकि लगभग दो-तिहाई लोगों को बड़े पैमाने पर संघर्ष फिर से शुरू होने की आशंका है। सर्वे में इज़राइली रक्षा फैसलों पर अमेरिकी प्रभाव को लेकर चिंता और हिज़्बुल्लाह के साथ स्थायी समझौते की संभावना पर गहरी निराशा भी सामने आई।
7 मई
ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी प्रस्ताव को “विचाराधीन” बताते हुए कहा कि अंतिम निर्णय के बाद अपनी स्थिति मध्यस्थ पाकिस्तान को बताएगा। इस बीच ईरानी संसद अध्यक्ष ने अमेरिकी सैन्य अभियानों का मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें विफल बताया।
कूटनीतिक स्तर पर Abbas Araghchi ने युद्ध के बाद के क्षेत्रीय ढाँचे के लिए चीन के समर्थन की उम्मीद जताई, जबकि शेह्बाज़ शरीफ ने चल रही वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम को लेकर आशा व्यक्त की। वहीं ट्रम्प ने अपने चीन दौरे से पहले समझौता करने की कोशिश तेज करते हुए संकेत दिया कि बातचीत अंतिम चरण में पहुँच सकती है। अमेरिका ने एक ओर शीघ्र समझौते की उम्मीद जताई, वहीं ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान सहमत नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई फिर से तेज की जा सकती है।
इजराइल के उत्तरी हिस्से में लेबनान से आए संदिग्ध हवाई लक्ष्य को इंटरसेप्ट किया गया, जबकि लेबनान में संघर्षविराम के बावजूद इज़रायली हमले जारी रहे। हिज़्बुल्लाह ने दावा किया कि उसने इज़रायली बलों के खिलाफ 17 लक्षित हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
8 मई
ईरान के राष्ट्रपति ने देश के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei के साथ हालिया बैठक का खुलासा करते हुए कहा कि बातचीत “विश्वास और स्पष्टता” के माहौल में हुई।
कूटनीतिक स्तर पर Marco Rubio ने Pope Leo से मुलाकात कर युद्ध पर चर्चा की, जबकि Emmanuel Macron ने Hormuz के पास नागरिक ढांचे पर हमलों की निंदा की। अमेरिका ने 14–15 मई को वॉशिंगटन में लेबनान–इजराइल वार्ता की नई पहल का संकेत दिया। क्षेत्रीय तनाव के बीच UAE ने मिसाइल और ड्रोन खतरे को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी। इस बीच ट्रम्प ने Hormuz में झड़प के दौरान ईरानी नौकाओं को नष्ट करने का दावा किया, जबकि दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण “जवाबी कार्रवाई” का दौर जारी रहा, हालांकि अमेरिका ने संघर्षविराम लागू रहने की बात कही।
दूसरी ओर, Benjamin Netanyahu ने हिज़्बुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखने की बात दोहराई। दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हमलों में 11 लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की खबर है, जिससे संघर्षविराम पर दबाव बढ़ा।
9 मई
यूनाइटेड किंगडम ने Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा के लिए destroyer युद्धपोत HMS Dragon को मध्य पूर्व भेजने की घोषणा की। ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में बनने वाला बहुराष्ट्रीय गठबंधन अमेरिका–ईरान तनाव और Hormuz संकट के कारण प्रभावित समुद्री व्यापार को बहाल करने, जहाज़ों की सुरक्षा और mine clearance अभियान के लिए एक बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन की तैयारी कर रहे हैं।
इस बीच अमेरिका ने “Economic Fury” अभियान के तहत ईरान के रक्षा और ड्रोन कार्यक्रमों से जुड़े कथित नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 10 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। कूटनीतिक स्तर पर ईरानी विदेश मंत्री ने ब्रिटेन और तुर्किये के विदेश मंत्रियों से क्षेत्रीय हालात और युद्ध समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा की। दूसरी ओर रूस ने अमेरिका और बहरीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र में पेश उस प्रस्ताव का विरोध किया, जिसमें ईरान से Hormuz नाकाबंदी समाप्त करने की मांग की गई थी। क्षेत्रीय स्तर पर मिस्र और क़तर ने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।
इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के नौ गांवों के लिए निकासी चेतावनी जारी करने के बाद कई हवाई हमले किए। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में कम से कम आठ लोगों की मौत और कई अन्य घायल हुए। संघर्षविराम लागू होने के बावजूद हिज़्बुल्लाह और इज़राइली बलों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
(9 May) economic times
Claude Mythos: Banking Cyber Security के सामने उभरती नई चुनौतियाँ
अमेरिका की AI कंपनी Anthropic ने “Claude Mythos” नामक एक उन्नत AI सिस्टम विकसित किया है, जिसे विशेष रूप से software systems की कमजोरियों को खोजने के लिये तैयार किया गया है। यह सिस्टम विशेष रूप से “Dormant Bug” की पहचान करने में सक्षम माना जा रहा है। Dormant Bug अर्थात सॉफ्टवेयर में छिपी हुई ऐसी कमज़ोरियाँ या गलतियाँ, जो अभी तक सामान्य उपयोग के दौरान सामने नहीं आयी हों, लेकिन भविष्य में सुरक्षा-खामी का दुरुपयोग (exploit) की जा सकती हों।
बताया जा रहा है कि Claude Mythos पुराने software systems, विशेषकर बैंकिंग प्रणाली में मौजूद छिपी कमजोरियों को बहुत तेजी से पहचान सकता है और कई मामलों में cyber security experts से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। इस दृष्टि से यह cyber security के क्षेत्र में उपयोगी तकनीक साबित हो सकती है, क्योंकि AI की सहायता से भेद्यता (vulnerabilities) को पहले ही खोजकर ठीक किया जा सकता है।
हालाँकि चिंता इस बात को लेकर व्यक्त की जा रही है कि यदि इस प्रकार की तकनीक गलत हाथों में चली जाए, तो इसका उपयोग बैंकिंग प्रणाली को hack करने, payment systems को बाधित करने तथा व्यापक आर्थिक अस्थिरता (Financial Chaos) पैदा करने के लिये किया जा सकता है। इसके साथ ही “Cascading Failure” का खतरा भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। चूँकि बैंकिंग और वित्तीय प्रणालियाँ आपस में जुड़ी होती हैं, इसलिये यदि किसी एक बड़े संस्थान पर सफल cyber हमला होता है, तो उसका प्रभाव दूसरे बैंकों, payment systems, financial markets और व्यापक अर्थव्यवस्था तक फैल सकता है।
इन्हीं संभावित जोखिमों को देखते हुए Anthropic ने “Project Glasswing” नामक एक प्रतिबंधित प्रोग्राम (Restricted program) शुरू किया है, जिसमें कई प्रमुख तकनिकी कंपनियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य विश्व के महत्त्वपूर्ण software systems को अधिक सुरक्षित बनाना और AI की सहायता से भेद्यता (vulnerabilities) की पहचान कर उन्हें पहले ही ठीक करना बताया जा रहा है। इस विषय को लेकर IMF और कई केंद्रीय बैंकों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि यदि इस प्रकार के AI tools का दुरुपयोग हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और बड़े cyber attacks की आशंका बढ़ सकती है। इसी दिशा में चीन द्वारा विकसित “Qihoo 360” नामक AI vulnerability search system का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर बड़ी संख्या में software flaws की पहचान की है। इससे AI आधारित cyber capabilities को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चिंता दोनों बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
भारत के संदर्भ में banking sector को वर्तमान में अपेक्षाकृत मजबूत माना जा रहा है, लेकिन cyber security और operational resilience को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। इसी कारण भारतीय बैंकों को भविष्य के AI आधारित cyber खतरों के प्रति तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।
(4 May) spacetechtimes, The Hindu
आधुनिक अंतरिक्ष युद्ध और “साइलेंट वॉर” की उभरती चुनौती
पहले युद्ध मुख्यतः जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित थे, लेकिन अब अंतरिक्ष भी एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र बनता जा रहा है। आधुनिक जीवन और सैन्य संरचनाएँ बड़ी मात्रा में उपग्रहों (Satellites) पर निर्भर हैं। संचार, इंटरनेट, बैंकिंग, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन और सैन्य निगरानी जैसी अनेक सेवाएँ अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों से संचालित होती हैं।
इसी के साथ “ड्यूल-यूज़ सैटेलाइट्स” (Dual-Use Satellites) की अवधारणा ने नागरिक और सैन्य उपयोग के बीच की सीमाओं को धुंधला करना शुरू कर दिया है।
ड्यूल-यूज़ सैटेलाइट्स (Dual-Use Satellites)
ड्यूल-यूज़ सैटेलाइट्स ऐसे उपग्रह हैं जिनका उपयोग नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिये किया जा सकता है। उदाहरण के लिये GPS, इंटरनेट सैटेलाइट्स और पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (Earth Observation Satellites) सामान्य परिस्थितियों में नागरिक सेवाएँ प्रदान करते हैं, लेकिन इन्हें सैन्य अभियानों में भी प्रयोग किया जा सकता है।
पहले सैन्य उपग्रह और नागरिक उपग्रह स्पष्ट रूप से अलग होते थे, किन्तु अब निजी कंपनियाँ भी ऐसी सेवाएँ प्रदान कर रही हैं जिनका उपयोग युद्धकाल में सैन्य सहायता के लिये किया जा सकता है। SpaceX की Starlink सेवा और व्यावसायिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इससे यह निर्धारित करना कठिन होता जा रहा है कि कोई उपग्रह केवल नागरिक अवसंरचना का हिस्सा है या सैन्य प्रणाली का भी।
अंतरिक्ष युद्ध का बदलता स्वरूप
आधुनिक अंतरिक्ष संघर्ष अब केवल उपग्रहों को मिसाइल से नष्ट करने तक सीमित नहीं है। वर्तमान में साइबर हमले (Cyber Attacks), डिजिटल हस्तक्षेप (Digital Interference), सिग्नल मैनीपुलेशन (Signal Manipulation), सिग्नल जैमिंग (Signal Jamming) और ग्राउंड स्टेशन हैकिंग (Ground Station Hacking) जैसे तरीके अधिक महत्त्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
इसी कारण आधुनिक अंतरिक्ष संघर्ष को “साइलेंट वॉर” (Silent War) की संज्ञा दी गई हैं। इसका अर्थ ऐसा युद्ध है जिसमें बिना गोली या बम के किसी देश की संचार, नेविगेशन और निगरानी प्रणालियों को निष्क्रिय किया जा सकता है।
साइलेंट वॉर की प्रमुख तकनीकें
सिग्नल जैमिंग (Signal Jamming)
इसमें उपग्रह संकेतों को जानबूझकर बाधित किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप GPS सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं तथा संचार व्यवस्था टूट सकती है।
जीपीएस स्पूफिंग (GPS Spoofing)
इस तकनीक में नकली GPS संकेत भेजे जाते हैं, जिससे जहाज़ या विमान अपनी वास्तविक स्थिति के बजाय गलत स्थान को पहचानने लगते हैं। यह नेविगेशन प्रणाली को भ्रमित करने की प्रक्रिया है।
ग्राउंड स्टेशन हैकिंग (Ground Station Hacking)
उपग्रहों को पृथ्वी स्थित नियंत्रण केंद्रों से संचालित किया जाता है। यदि कोई हैकर इन नियंत्रण केंद्रों में घुसपैठ कर ले, तो वह उपग्रह को निष्क्रिय कर सकता है या महत्त्वपूर्ण डेटा चुरा सकता है।
साइबर हमले (Cyber Attacks)
साइबर हमलों के माध्यम से संचार नेटवर्क और उपग्रह आधारित प्रणालियों को बाधित किया जा सकता है, जिससे किसी देश की महत्त्वपूर्ण सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध में अनुप्रयोग
रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक अंतरिक्ष संघर्ष के इस नए स्वरूप को स्पष्ट रूप से सामने रखा। यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण से पहले रूस से जुड़े Viasat KA-SAT साइबर हमले ने यूरोप के कई क्षेत्रों में संचार सेवाओं को बाधित कर दिया था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आधुनिक युद्ध में डिजिटल और अंतरिक्ष आधारित प्रणालियाँ प्रत्यक्ष युद्धक्षेत्र का हिस्सा बन चुकी हैं।
एट्रिब्यूशन गैप (Attribution Gap) और फंक्शनल स्ट्राइक (Functional Strike)
आधुनिक अंतरिक्ष संघर्ष की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक “एट्रिब्यूशन गैप” (Attribution Gap) है। कई बार यह निश्चित रूप से पता लगाना कठिन होता है कि हमला किसने किया। इसके पीछे प्रॉक्सी नेटवर्क (Proxy Networks), छिपे हुए हैकर समूह और गुप्त साइबर अभियानों की भूमिका हो सकती है। इससे जवाबी कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रीय कानून का अनुप्रयोग जटिल हो जाता है।
इसी प्रकार “फंक्शनल स्ट्राइक” (Functional Strike) की अवधारणा भी उभर रही है। पहले हमला वही माना जाता था जिसमें प्रत्यक्ष भौतिक विनाश दिखाई दे, किन्तु अब यदि कोई साइबर हमला किसी उपग्रह को निष्क्रिय कर देता है, तो उसे भी आक्रमण माना जा रहा है, भले ही वहाँ किसी प्रकार का भौतिक विस्फोट न हुआ हो।
केसलर सिंड्रोम (Kessler Syndrome) और अंतरिक्ष मलबा
यदि उपग्रहों को मिसाइलों द्वारा नष्ट किया जाता है, तो बड़ी मात्रा में अंतरिक्ष मलबा (Space Debris) उत्पन्न होता है। यह मलबा अन्य उपग्रहों से टकराकर और अधिक मलबा उत्पन्न करता है। इस शृंखलाबद्ध प्रक्रिया को “केसलर सिंड्रोम” (Kessler Syndrome) कहा जाता है।
ऐसी स्थिति में पृथ्वी की निम्न कक्षा (Low Earth Orbit) भविष्य में उपयोग के लिये असुरक्षित या अनुपयोगी हो सकती है, जिससे अंतरिक्ष अनुसंधान, संचार और अन्य उपग्रह गतिविधियाँ गंभीर रूप से प्रभावित होंगी।
व्यापक प्रभाव
आधुनिक अंतरिक्ष संघर्ष के प्रभाव केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। उपग्रह आधारित प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता के कारण इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, संचार व्यवस्था और सामरिक स्थिरता तक पहुँच सकता है। बैंकिंग, शेयर बाज़ार, वैश्विक व्यापार, इंटरनेट और नेविगेशन जैसी अनेक सेवाएँ उपग्रह नेटवर्क पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी बड़े साइबर या अंतरिक्ष हमले की स्थिति में वित्तीय अव्यवस्था, संचार बाधा और लॉजिस्टिक संकट उत्पन्न हो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों या सैन्य संचार नेटवर्क में हस्तक्षेप गलत आकलन और संघर्ष वृद्धि का कारण बन सकता है। वहीं बढ़ता अंतरिक्ष मलबा (Space Debris) और प्रकाश प्रदूषण भविष्य की अंतरिक्ष परियोजनाओं तथा खगोलीय अनुसंधान के लिये भी चुनौती बनते जा रहे हैं।
निष्कर्ष
उपग्रह आधारित प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता के साथ आधुनिक अंतरिक्ष संघर्ष केवल सैन्य चुनौती नहीं रह गया है। साइबर हस्तक्षेप, सिग्नल व्यवधान और अंतरिक्ष मलबे जैसी समस्याएँ अब वैश्विक संचार, अर्थव्यवस्था और सामरिक स्थिरता से सीधे जुड़ती जा रही हैं। इसी कारण अंतरिक्ष गतिविधियों, साइबर हस्तक्षेप और कक्षीय सुरक्षा से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय कानूनों तथा वैश्विक मानकों को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
लेकिन यदि हाल के वर्षों में हुई वैश्विक घटनाओं को देखें, तो मालूम पड़ता है कि ये व्यवस्थाएँ व्यवहारिक रूप से कितनी प्रभावी होंगी, यह अलग प्रश्न है। और इससे जान पड़ता है कि यह व्यवस्थाएँ संभवतः संतोष, दस्तावेजीकरण और इतिहास लेखन के लिये तो आवश्यक हो सकती हैं। परन्तु केवल बाहरी कानून पर्याप्त नहीं हैं। अब मनुष्य अपने इतने निचले स्तर पर आ गया है और उसकी पाशविक भूख इतनी बढ़ गयी है कि जब उसकी इच्छाएँ, स्वार्थ और शक्ति की प्रवृत्ति तीव्र हो जाती हैं, तब वह नियमों का पालन भी केवल उतनी ही देर तक करता है, जब तक वे उसकी आकांक्षाओं में बाधा न डालें।
ऐसी स्थिति में समस्या केवल राजनीतिक या तकनीकी नहीं रह जाती, बल्कि मनुष्य की आंतरिक चेतना से जुड़ जाती है। इसी कारण स्थायी समाधान केवल बाहरी नियंत्रण से नहीं, बल्कि भीतर की उस सच्चाई के संपर्क में आने से संभव हो सकता है, जो मनुष्य को अधिक संतुलित और उत्तरदायी बनाती है।
(7 May) Nature.com, eurekalert.org, The Hindu
मेटामटेरियल्स(Metamaterials): जब पदार्थ स्वयं सीखने लगें
पहले सामान्य पदार्थों का व्यवहार निश्चित होता था। यदि उन पर कोई बल लगाया जाए तो वे पहले से निर्धारित तरीके से ही प्रतिक्रिया देते हैं। इसी प्रकार रोबोट भी पहले से प्रोग्राम किये गये निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं। लेकिन जीवित प्रणालियाँ, जैसे कोशिकाएँ या कुछ सूक्ष्म जीव, बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल सकती हैं और नया व्यवहार सीख सकती हैं।
इसी दिशा में University of Amsterdam के शोधकर्ताओं ने ऐसे कृत्रिम पदार्थ विकसित किये हैं जिन्हें “मेटामटेरियल्स” (Metamaterials) कहा जा रहा है। ये पदार्थ केवल आकार बदलने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अनुभव के आधार पर नया आकार सीख सकते हैं, पुराने व्यवहार को भूल सकते हैं तथा परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार को बदल सकते हैं।
इन मेटामटेरियल्स की संरचना कई मोटरयुक्त जोड़ (Motorised Hinges) और एक लचीले ढाँचे (Elastic Skeleton) से मिलकर बनी है। प्रत्येक जोड़ में एक सूक्ष्म नियंत्रक (Microcontroller) लगा होता है, जो यह मापता है कि जोड़ कितना घूमा है, उसकी पूर्व गतिविधियों को याद रखता है तथा पास के अन्य जोड़ से जानकारी साझा करता है। इसी जानकारी के आधार पर प्रत्येक जोड़ अपनी कठोरता (Stiffness) और स्थिति को बदल सकता है, जिससे पूरा पदार्थ धीरे-धीरे नया आकार सीखने लगता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार ये पदार्थ प्रशिक्षण के माध्यम से विभिन्न आकार सीख सकते हैं। वे किसी पुराने आकार को भूलकर नया आकार अपना सकते हैं या एक साथ कई आकारों को याद रख सकते हैं। इसी क्षमता के कारण वे वस्तुओं को पकड़ने (Grabbing) या स्वयं चलने (Locomotion) जैसे कार्य भी कर सकते हैं।
यह शोध पहले किये गये “ब्रेनलेस लोकोमोशन” (Brainless Locomotion) संबंधी अध्ययनों का विस्तार है, जिसमें ऐसे पदार्थ विकसित किये गये थे जो अपने आप लुढ़क (Roll), रेंग (Crawl) या हिल (Wiggle) सकते थे। हालांकि वे नया व्यवहार सीखने या याद रखने में सक्षम नहीं थे। वर्तमान शोध में पहली बार सीखने (Learning) और स्मृति (Memory) जैसी क्षमताओं को इन पदार्थों के साथ जोड़ा गया है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में ऐसे पदार्थ केवल स्थिर आकार ही नहीं, बल्कि समय के साथ बदलने वाले व्यवहार भी सीख सकेंगे। उदाहरण के लिये वे वातावरण के अनुसार अलग-अलग प्रकार की गति, जैसे रेंगना या लुढ़कना, सीख सकते हैं। साथ ही वैज्ञानिक ऐसे तंत्र विकसित करने पर भी कार्य कर रहे हैं जो अनिश्चितता (Uncertainty) और अधूरी जानकारी की स्थिति में भी स्वयं को अनुकूलित (Adapt) कर सकें।
पिछले कुछ वर्षों में ऐसे रोबोट और पदार्थों में रुचि तेजी से बढ़ी है जो स्वयं सीख सकें और परिस्थितियों के अनुसार अपना व्यवहार बदल सकें। इसी कारण भविष्य में इनका उपयोग सॉफ्ट रोबोटिक्स (Soft Robotics), चिकित्सा उपकरणों, आपदा प्रबंधन तथा स्वचालित मशीनों जैसे क्षेत्रों में किये जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
(7 May) theguardian
प्रति माह 2 सेंटीमीटर धँसता मेक्सिको सिटी और बढ़ता जल संकट
मेक्सिको सिटी आज धीरे-धीरे जमीन में धँसता हुआ शहर बनता जा रहा है। इसका सबसे स्पष्ट प्रभाव शहर की पुरानी ऐतिहासिक इमारतों में देखा जा सकता है, जहाँ कई चर्च, भवन और स्मारक एक ओर झुकते दिखाई दे रहे हैं। यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले एक शताब्दी से लगातार बढ़ती रही है।
हाल ही में NASA और ISRO के संयुक्त satellite mission “NISAR” ने इस धँसाव (Land Subsidence) को real-time में दर्ज किया है। यह satellite radar imaging technology की सहायता से पृथ्वी की सतह में होने वाले बहुत छोटे परिवर्तनों को भी देख सकता है। NISAR के अनुसार मेक्सिको सिटी के कुछ हिस्से प्रति माह 2 सेंटीमीटर से अधिक की दर से नीचे धँस रहे हैं, जिसे विश्व के सबसे तेज subsidence rates में माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण भूमिगत जल (Groundwater) का अत्यधिक दोहन है। मेक्सिको सिटी एक प्राचीन झील के तल पर बसा हुआ शहर है, जहाँ की मिट्टी अत्यंत नरम और clay जैसी मानी जाती है। जब लगातार aquifer से पानी निकाला जाता है, तब नीचे की मिट्टी सिकुड़ने लगती है और पूरा शहर धीरे-धीरे नीचे बैठने लगता है।
इसका प्रभाव केवल भवनों तक सीमित नहीं है। सड़कें टेढ़ी हो रही हैं, underground metro system प्रभावित हो रहा है, पानी की पाइपलाइनें टूट रही हैं और शहरी ढाँचे पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। बताया जा रहा है कि शहर अपने लगभग 40 प्रतिशत पानी को leakage के कारण खो देता है। इससे एक प्रकार का vicious cycle बनता दिखाई देता है – पानी की कमी बढ़ती है, अधिक groundwater निकाला जाता है और शहर और अधिक धँसने लगता है।
मेक्सिको सिटी का प्रसिद्ध “Angel of Independence” स्मारक भी इस समस्या का प्रतीक बन चुका है। समय के साथ उसके आसपास की जमीन नीचे धँसती गयी, जिसके कारण उसके आधार में अतिरिक्त सीढ़ियाँ जोड़नी पड़ीं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि NISAR जैसी technology केवल मेक्सिको सिटी के लिये ही नहीं, बल्कि volcanoes, earthquakes, landslides, coastal flooding और climate change जैसे विषयों के अध्ययन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालाँकि सबसे बड़ी समस्या यह है कि शहर की लगभग आधी जल आपूर्ति अभी भी उसी underground aquifer पर निर्भर करती है, जिसके अत्यधिक उपयोग के कारण यह संकट पैदा हुआ है। ऐसे में groundwater extraction को रोकना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं माना जा रहा। इसी कारण मेक्सिको सिटी आज urban expansion, जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन के संयुक्त प्रभाव का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण बनता जा रहा है।
