30.Weekly News Update 10 – 16 may 2026( iran war, Pathfinder mission, sir, Taiwan issue)

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Weekly News Update (30)

(10 May – 16 May 2026)

 (10 – 16 May) isw, reuters, Aljazeera

ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष: प्रमुख घटनाएँ और विस्तार (10 मई – 16 मई 2026)

इस सप्ताह ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव में सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास भी तेज दिखाई दिए। परमाणु कार्यक्रम, Hormuz जलडमरूमध्य की सुरक्षा, क्षेत्रीय गठबंधनों और युद्धविराम को लेकर कई महत्वपूर्ण घटनाएँ सामने आईं।

परमाणु वार्ता और अमेरिकी–ईरानी मतभेद

ईरान ने युद्ध समाप्ति और तनाव कम करने के लिए 14 बिंदुओं वाला प्रस्ताव रखा। विभिन्न कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया और अपनी अलग शर्तें सामने रखीं।

अमेरिका की प्रमुख माँगों में अगले 20 वर्षों तक uranium enrichment बंद करना, highly enriched uranium को हटाना, कुछ nuclear facilities को dismantle करना और Hormuz shipping को पूरी तरह खुला रखना शामिल बताया गया।

वहीं ईरान ने पूर्ण रूप से nuclear enrichment छोड़ने से इनकार किया। तेहरान ने अपने ऊपर होने वाले हमलों को पूरी तरह रोकने, सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने, जब्त किए गए Iranian assets लौटाने तथा Hormuz पर अपनी sovereignty को मान्यता देने की माँग दोहराई।

कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता

क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयासों के बीच क़तर के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति से मुलाकात की। बातचीत में क्षेत्रीय स्थिरता और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक में Pakistan द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता प्रयासों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

रूस और चीन की भूमिका

पुतिन ने संकेत दिया कि रूस ईरान के enriched uranium stockpile के हस्तांतरण और भंडारण की निगरानी में भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उधर चीन ने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और Hormuz जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहना चाहिए। साथ ही चीनी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि ईरान पर अमेरिका या इज़राइल द्वारा सैन्य हमले नहीं होने चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में चीन के दूत ने Hormuz से जुड़े अमेरिका समर्थित सुरक्षा परिषद प्रस्ताव की आलोचना की। संकेत मिले कि चीन और रूस इस प्रस्ताव का विरोध कर सकते हैं।

Hormuz जलडमरूमध्य और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक मिशन

ब्रिटेन ने घोषणा की कि वह Hormuz जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए मध्य पूर्व में एक destroyer भेजेगा। प्रस्तावित मिशन का नेतृत्व ब्रिटेन और फ्रांस संयुक्त रूप से करेंगे। ब्रिटेन और फ्रांस ने स्पष्ट किया कि यह मिशन क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती से अलग होगा। ईरान ने इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।

इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व वाले समुद्री सुरक्षा मिशन में शामिल होगा। साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त अरब अमीरात को निगरानी विमान देने की घोषणा की।

क्षेत्रीय तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि वह ADNOC की नई oil pipeline परियोजना के निर्माण में तेजी लाएगा। यह पाइपलाइन Abu Dhabi को Fujairah से जोड़ेगी और इसका उद्देश्य Strait of Hormuz के बाहर तेल निर्यात क्षमता को वर्ष 2027 तक दोगुना करना है। रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना का संचालन अगले वर्ष शुरू होने की उम्मीद है।

UAE और क्षेत्रीय तनाव

तनाव के बीच ईरान की ओर से UAE से जुड़े लक्ष्यों पर सीमित हमलों की खबरें सामने आईं। तेहरान ने बयान जारी कर कहा कि जो देश इज़राइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्य करेंगे, उन्हें “जवाबदेह ठहराया जाएगा”। यह बयान उस समय आया जब इजरायल की ओर से युद्ध के दौरान नेतन्याहू के UAE दौरे से जुड़ी खबरों और संपर्कों पर स्पष्टीकरण दिया गया। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात ने नेतन्याहू कार्यालय के इन बयानों को खारिज कर दिया।

ईरान की सैन्य क्षमता पर अमेरिकी आकलन

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के एक गोपनीय आकलन के अनुसार, ईरान अब भी महत्वपूर्ण मिसाइल क्षमता बनाए हुए है। रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसके लगभग 70 प्रतिशत मोबाइल लॉन्चर और युद्ध-पूर्व मिसाइल भंडार अभी भी सक्रिय हैं, और उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के किनारे स्थित 33 में से 30 मिसाइल स्थलों तक अपनी पहुंच फिर से बहाल कर ली है।

ईरान में युद्ध क्षति

ईरानी नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, युद्ध के दौरान अमेरिका और इज़राइल के हमलों में राजधानी के विभिन्न हिस्सों में लगभग 650 स्थान प्रभावित हुए।

अधिकारियों ने दावा किया कि:

  • 1,260 से अधिक लोगों की मौत हुई,
  • लगभग 2,800 लोग घायल हुए,
  • करीब 51,000 घर क्षतिग्रस्त हुए,
  • 10,700 से अधिक वाहन और 754 मोटरसाइकिल प्रभावित हुईं।

लेबनान और हिज्बुलाह मोर्चा

संघर्ष विराम की घोषणाओं के बावजूद लेबनान में तनाव जारी रहा। इज़राइल की ओर से हमलों की खबरें आती रहीं, जबकि प्रतिक्रिया में हिज्बुलाह की तरफ से भी रॉकेट और ड्रोन हमलों की सूचना मिली।

लेबनानी अधिकारियों ने बेरूत स्थित अमेरिकी राजदूत से आग्रह किया कि अमेरिका इज़राइल पर दबाव डाले ताकि वह हमले रोके। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि मध्यस्थता के बाद लेबनान और इज़राइल ने 45 दिनों के लिए संघर्षविराम बढ़ाने पर सहमति जताई है।

 

(10 May) The Hindu

अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर बनाने की दिशा में भारत का कदम : पाथफाइंडर मिशन

भारत अंतरिक्ष आधारित AI computing की दिशा में एक नया कदम बढ़ाने जा रहा है। भारतीय AI फर्म Sarvam AI और बंगलूरू स्थित इमेजिंग स्टार्टअप Pixxel ने संयुक्त रूप से पहला “ऑर्बिटल डेटा सेंटर” उपग्रह Pathfinder विकसित किया है। इसे वर्ष 2026 के अंत तक प्रक्षेपित करने का लक्ष्य रखा गया है।

ऑर्बिटल डेटा सेंटर (Orbital Data Center)

पृथ्वी के ऊपर हो रही विभिन्न गतिविधियों पर निगरानी रखने, सूचनाएँ प्राप्त करने और आपदाओं का पता लगाने में पृथ्वी की निम्न कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थित उपग्रह महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सामान्यतः ये उपग्रह पृथ्वी की तस्वीरें लेते हैं, पूरा कच्चा डेटा (raw data) पृथ्वी पर भेजते हैं और फिर धरती पर स्थित बड़े data centers तथा AI systems उस डेटा का विश्लेषण करते हैं। इस प्रक्रिया में डेटा का आकार बहुत बड़ा होने के कारण उसे भेजने में अधिक समय और खर्च लगता है, जबकि bandwidth भी सीमित होती है।

अब नए प्रयोग में उपग्रह के भीतर ही mini AI data center लगाया जाएगा, जिसमें GPU और AI chips मौजूद होंगे। इससे डेटा को पृथ्वी पर भेजने से पहले ही अंतरिक्ष में analyze किया जा सकेगा। अंतरिक्ष में स्थापित ऐसे AI-सक्षम computing systems को Orbital Data Center कहा जाता है।

Pathfinder क्या करेगा?

Pathfinder लगभग 200 किलोग्राम श्रेणी का उपग्रह होगा, जिसमें शक्तिशाली GPU, AI systems और Hyperspectral camera लगाए जाएंगे।

GPU (Graphics Processing Unit) एक शक्तिशाली प्रोसेसिंग चिप है, जिसे बड़ी मात्रा में डेटा को तेज गति से प्रोसेस करने के लिये बनाया गया है। इसका उपयोग AI मॉडल, image processing, ChatGPT जैसे मॉडल, scientific computing और complex calculations में किया जाता है।

Hyperspectral Imaging: सामान्य कैमरा केवल सामान्य रंगों को देखता है, लेकिन hyperspectral camera सैकड़ों प्रकार की light frequencies को पहचान सकता है। इसकी सहायता से मिट्टी, पानी, फसल, खनिज और प्रदूषण का विश्लेषण किया जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग खेती, रक्षा, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, तथा खनिज खोज जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

Pathfinder अपने उपकरणों की सहायता से तेज AI processing कर डेटा को अंतरिक्ष में ही analyze करेगा। उदाहरण के लिये यदि किसी क्षेत्र में जंगल में आग लगती है, तो उपग्रह तुरंत उसकी पहचान कर पृथ्वी पर केवल alert भेज सकेगा। इससे पूरा raw data भेजने की आवश्यकता नहीं होगी और bandwidth की बचत होगी। उपग्रह अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को solar panels के माध्यम से पूरा करेगा। वर्तमान समय में AI आधारित data centers अत्यधिक बिजली की खपत कर रहे हैं, जबकि cooling systems के लिये बड़ी मात्रा में भूमि, ऊर्जा और पानी की आवश्यकता पड़ती है। अंतरिक्ष आधारित computing को भविष्य में इन चुनौतियों के संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

चुनौतियाँ

इस तकनीक के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ भी हैं। सबसे बड़ी समस्या cooling की है। अंतरिक्ष में वातावरण नहीं होने के कारण GPU द्वारा उत्पन्न गर्मी को बाहर निकालना अत्यंत कठिन होता है। इसके अलावा अंतरिक्ष में cosmic radiation और solar radiation का स्तर बहुत अधिक होता है। इससे computer memory प्रभावित हो सकती है, chips damage हो सकती हैं तथा data corruption या “bit flips” जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

धरती पर यदि कोई server खराब हो जाए तो उसे बदला जा सकता है, लेकिन अंतरिक्ष में satellite repair करना अत्यंत कठिन होता है। इस कारण पूरे system को अत्यधिक reliable बनाना पड़ता है।

आगे की संभावनाएँ

यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो भविष्य में अंतरिक्ष आधारित AI network, space cloud computing और orbital data centers जैसी तकनीकों के विकास का मार्ग खुल सकता है।

 

(15 May) IE

तीन राज्यों को छोड़ देशभर में SIR प्रक्रिया शुरू करेगा निर्वाचन आयोग

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण को 30 मई 2026 से शुरू करने का कार्यक्रम तय किया है। इस चरण में लगभग 36.73 करोड़ मतदाता शामिल होंगे।

निर्वाचन आयोग के अनुसार हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना के चरण-II तथा मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए SIR कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

SIR क्या है?

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत, स्थानांतरित तथा अयोग्य मतदाताओं की प्रविष्टियों की पहचान कर मतदाता सूची को अद्यतन करना है।

यह प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को प्राप्त अधिकारों पर आधारित है।

प्रक्रिया कैसे चलेगी?

निर्वाचन आयोग के अनुसार 3.94 लाख से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) घर-घर गणना करेंगे। इस कार्य में राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंट (BLA) भी शामिल होंगे।

पहचान प्रमाण के लिये आधार को 12वें दस्तावेज़ के रूप में मान्यता दी गई है। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आयोग ने यह भी कहा है कि घर-घर गणना के दौरान मतदाताओं से कोई भौतिक दस्तावेज़ एकत्र नहीं किये जाएंगे।

हालिया आँकड़े

चरण-2 से संबंधित आँकड़ों के अनुसार लगभग 5.18 करोड़ प्रविष्टियाँ हटाई गईं, जो कुल मतदाता आधार का लगभग 10.2 प्रतिशत है। निर्वाचन आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया डुप्लीकेट और अयोग्य प्रविष्टियों की पहचान के लिये की गई। आयोग का कहना है कि शहरीकरण और ग्रामीण-से-शहरी प्रवास के कारण मतदाता सूचियों में उत्पन्न विसंगतियों को भी इस प्रक्रिया के माध्यम से पुनरीक्षण किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में उठे प्रश्न

इससे पहले पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर प्रश्न उठे थे। निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग किये जा रहे एक केंद्रीय एल्गोरिथ्म के माध्यम से बड़ी संख्या में नामों की पहचान “Logical Discrepancy” के आधार पर की गई थी।

बाद में अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार “Logical Discrepancy” के लिये कुछ मानदंड निर्धारित किये गए थे।

उदाहरण के लिये, एक मामले में पुराने रिकॉर्ड में जन्म वर्ष सही था, लेकिन बाद में बने नए वोटर ID कार्ड में जन्मतिथि गलत दर्ज हो गई। इसके कारण रिकॉर्ड में पिता और संतान की उम्र के बीच असामान्य अंतर दिखाई देने लगा और मामला जांच के लिये चिह्नित किया गया।

एक अन्य मामले में किसी व्यक्ति का नाम इसलिए जांच में गया क्योंकि एक ही पिता के नाम से छह से अधिक संतानें दर्ज थीं, जबकि संबंधित परिवार वास्तव में बड़ा परिवार था और कई भाई-बहन उसी पिता की संतान थे।

वहीं कुछ मामलों में पुराने वोटर रिकॉर्ड, पासपोर्ट, पेंशन दस्तावेज़ और नए रिकॉर्ड में नाम की वर्तनी या स्वरूप में अंतर को mismatch माना गया।

उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार 1.36 करोड़ नामों की पहचान की गई थी। इनमें से 60.06 लाख मामलों को adjudication प्रक्रिया में भेजा गया, जबकि 27.10 लाख नाम बाद में हटाए गए।

इससे पहले बिहार में भी लगभग 9,968 नाम इसी प्रकार हटाए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन विस्तृत आधार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया।

न्यायिक निगरानी और अपील प्रक्रिया

इस पूरी प्रक्रिया को लेकर मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। अदालत ने पश्चिम बंगाल में Appellate Tribunals के कार्य और अपील प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट मांगी थी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्रिब्यूनलों के समक्ष 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। इनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तथा कुछ मामलों में नाम जोड़े जाने को लेकर आपत्तियाँ शामिल हैं।

इससे पहले अदालत ने कहा था कि जिन मामलों में अपीलों का निस्तारण संबंधित चरणों से पहले हो जाता है, उनके नाम पूरक मतदाता सूची में जोड़े जा सकते हैं। हालांकि केवल अपील लंबित रहने के आधार पर मतदान का अधिकार स्वतः नहीं दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि प्रक्रिया में प्रारूप प्रकाशन, शिकायत निवारण और सार्वजनिक पारदर्शिता से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

 

(16 May) bbc

ताइवान की स्थिति पर फिर उभराता पुराना विवाद

ताइवान ने स्वयं को एक “संप्रभु और स्वतंत्र देश” बताया है। यह बयान उस समय सामने आया जब ट्रंप ने उसकी औपचारिक स्वतंत्रता के विरोध में टिप्पणी की।

हाल ही में बीजिंग में हुई बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दी है। साथ ही उन्होंने लगभग 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर विचार किए जाने की जानकारी भी दी।

ताइवान की सरकार का कहना है कि वह पहले से ही एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहा है। उसके पास अपनी सरकार, संविधान, सेना और मुद्रा है। राष्ट्रपति Lai Ching-te ने पहले भी कहा था कि अलग से स्वतंत्रता घोषित करने की आवश्यकता नहीं है। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से भी ताइवान को “संप्रभु, स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश” बताया गया।

दूसरी ओर चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। “One China Policy” के अनुसार बीजिंग केवल एक चीन को मान्यता देता है और ताइवान को उसी का भाग बताता है। चीन कई बार कह चुका है कि वह किसी भी औपचारिक स्वतंत्रता घोषणा को स्वीकार नहीं करेगा। हाल के वर्षों में उसने ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास भी बढ़ाए हैं।

अमेरिका आधिकारिक रूप से ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता, लेकिन उसकी आत्मरक्षा के लिए सैन्य सहायता और हथियार उपलब्ध कराता है। दोनों पक्षों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, हालांकि अनौपचारिक संबंध बने हुए हैं। Fox News को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह इस क्षेत्र में तनाव और किसी संभावित संघर्ष की स्थिति नहीं चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित हथियार पैकेज पर ताइवान के नेतृत्व से चर्चा की जाएगी।

चीन पहले भी ताइवान के राष्ट्रपति को “troublemaker” कह चुका है। वहीं ताइवान ने कहा है कि वह Taiwan Strait में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका के साथ सहयोग जारी रखेगा।

फिलहाल ताइवान “Status Quo” की नीति पर कायम है। यानी वह न तो चीन के साथ एकीकरण की घोषणा कर रहा है और न ही औपचारिक स्वतंत्रता की।ताइवान जलडमरूमध्य विश्व व्यापार के महत्वपूर्ण मार्गों में माना जाता है। इसके अलावा ताइवान semiconductor और computer chip निर्माण का बड़ा केंद्र है। विशेष रूप से Taiwan Semiconductor Manufacturing Company जैसी कंपनियाँ वैश्विक तकनीकी उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

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