(44.)Weekly News Update 07 September-13September (Iran war-Falklands issue-Brics summit-Boss Scame)

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 Weekly News Update (44)

(7 September – 13 September 2026)

प्रमुख खबरें

  • ईरान-अमेरिका युद्ध: हॉर्मुज़ से बाब-अल-मंदेब तक बढ़ता संकट
  • फॉकलैंड द्वीप विवाद: संप्रभुता और तेल को लेकर बढ़ता तनाव
  • 18वां BRICS शिखर सम्मेलन: प्रमुख मुद्दे और पहल
  • बॉस स्कैम से साइबर ठगी

(8-13 September) theguardian, Reuters, APnews

ईरान-अमेरिका युद्ध: हॉर्मुज़ से बाब-अल-मंदेब तक बढ़ता संकट

ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा संघर्ष से पहले दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है। मौजूदा युद्ध के दौरान अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ सैन्य कार्रवाई जारी रखी है। संघर्ष का एक महत्वपूर्ण मोड़ अब यमन में हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और बाब-अल-मंदेब के आसपास उनकी बढ़ती पकड़ के रूप में सामने आया है।

अमेरिकी प्रतिबंध और नौसैनिक नाकाबंदी

अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के साथ ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ाया है। 8 सितंबर को अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र और उससे जुड़ी कंपनियों को निशाना बनाते हुए 36 नए प्रतिबंध लगाए। अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद संघर्ष का एक बड़ा हिस्सा समुद्री क्षेत्र में पहुंच गया। अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि ईरान ने भी हॉर्मुज़ क्षेत्र में जहाजों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई में पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट किए जाने के बाद ईरान ने हॉर्मुज़ के आसपास 10 जहाजों को निशाना बनाया।

ईरान की प्रतिक्रिया और हॉर्मुज़

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी और ईरानी जवाबी कार्रवाई के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ। ईरान ने जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने और नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। अमेरिका ने हॉर्मुज़ में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया। बाद में अमेरिकी सेना ने जहाजों को उपलब्ध कराई जा रही हवाई सुरक्षा के समय को भी सीमित किया। इससे हॉर्मुज़ से गुजरने वाले समुद्री यातायात में उल्लेखनीय कमी आई और तेल परिवहन पर दबाव बढ़ा।

यमन में हूतियों की बढ़त

इसी युद्ध के दौरान यमन में ईरान-समर्थित हूती बलों ने लाल सागर के तट पर अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं।

10 सितंबर को हूतियों ने यमन के महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा (Mocha) पर नियंत्रण कर लिया। इसके बाद उन्होंने लाल सागर के तट के साथ आगे बढ़ते हुए बाब-अल-मंदेब के निकट स्थित द्वीपों की ओर बढ़ना शुरू किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, हूती बलों ने हानिश और जुकर द्वीपों तक भी अपनी पहुंच बनाई। 11 सितंबर को हूतियों ने पेरिम द्वीप (Perim Island) पर कब्जा कर लिया और उसके सामने स्थित मुख्य भूमि के धुबाब (Dhubab) क्षेत्र पर भी नियंत्रण स्थापित किया। पेरिम द्वीप बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित है।

बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और लाल सागर के रास्ते स्वेज नहर तक जाने वाले समुद्री मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हूतियों की इस बढ़त से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ गया है।

हूतियों ने कहा है कि लाल सागर का समुद्री मार्ग अन्य देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन सऊदी जहाजों पर पूर्व घोषित प्रतिबंध जारी रहेगा।

सऊदी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला

इसी दौरान सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन इराक की दिशा से आए थे और रियाद तथा मदीना क्षेत्रों में पाइपलाइन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमले के बाद पाइपलाइन को एहतियाती तौर पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

यह पाइपलाइन सऊदी अरब को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से बचते हुए लाल सागर के रास्ते अपना तेल निर्यात करने का वैकल्पिक मार्ग देती है। हॉर्मुज़ में समुद्री यातायात प्रभावित होने के बाद यह मार्ग सऊदी तेल निर्यात के लिए और महत्वपूर्ण हो गया था।

हूतियों और Claude AI से जुड़ा तथ्य

इसी अवधि में Anthropic ने अपने AI मॉडल Claude के दुरुपयोग से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी की। कंपनी के अनुसार, उत्तरी यमन में हूती-नियंत्रित क्षेत्र से जुड़े लोगों ने Claude Code का इस्तेमाल उन्नत हथियारों के विकास में किया।

Anthropic के अनुसार, उपयोगकर्ताओं ने Claude Code की मदद से रॉकेट और बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए उन्हें उड़ान के दौरान दिशा देने (guidance & navigation) और नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर (control software) विकसित करने का प्रयास किया। इसमें एक निर्देशित रॉकेट और 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक पहुंचने के लक्ष्य वाले बहु-चरणीय बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है।

Claude का इस्तेमाल कोड लिखने, तकनीकी जानकारी प्राप्त करने, सॉफ्टवेयर की समीक्षा और उसके परीक्षण के लिए किया गया। Anthropic ने संबंधित खातों को बंद कर दिया और इस गतिविधि की जानकारी संबंधित सरकारी तथा औद्योगिक संस्थाओं को दी। कंपनी के अनुसार, एक निर्देशित रॉकेट का परीक्षण भी किया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ।

विस्थापन

यमन के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में लड़ाई बढ़ने के साथ बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई से अब तक 76,000 से अधिक लोग अपने घर छोड़ चुके हैं।

इसप्रकार अब तक की घटनाओं में दो प्रमुख समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं।

पहला, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जहां अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और ईरानी जवाबी कार्रवाई के कारण ईरान के तेल निर्यात और समुद्री यातायात में भारी कमी आई है।

दूसरा, बाब-अल-मंदेब, जहां हूतियों ने मोखा पर नियंत्रण करने के बाद धुबाब और पेरिम की ओर बढ़त बनाई है। इससे वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के निकट पहुंच गए हैं।

हूतियों ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को सुरक्षित बताया है, लेकिन सऊदी जहाजों के खिलाफ अपनी घोषित नाकाबंदी जारी रखी है। दूसरी ओर, सऊदी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर इराक की दिशा से आए ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद किया गया।

 

(8 September) Financial Times, Reuters, wikipedia

फॉकलैंड द्वीप विवाद: संप्रभुता और तेल को लेकर बढ़ता तनाव

फॉकलैंड द्वीप विवाद अर्जेंटीना और यूनाइटेड किंगडम के बीच बढ़ते तनाव के बीच फिर चर्चा में आ गया है। इस बार विवाद का प्रमुख कारण द्वीपों की संप्रभुता के साथ-साथ उनके आसपास तेल अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियां भी हैं। फॉकलैंड द्वीप समूह दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह है, जो अर्जेंटीना के तट से लगभग 480 किमी दूर है। यह एक ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्र (British Overseas Territory) है और आंतरिक रूप से स्वशासित है, जबकि इसकी रक्षा और विदेश मामलों की जिम्मेदारी यूनाइटेड किंगडम के पास है।

विवाद की शुरुआत

अर्जेंटीना ने 1816 में स्पेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद स्पेन के अधीन रहे क्षेत्रों पर अपना उत्तराधिकार दावा किया। इसी आधार पर उसने फॉकलैंड द्वीप समूह पर भी संप्रभुता का दावा किया और 1820 में वहां अपना नियंत्रण स्थापित किया।

लेकिन 3 जनवरी 1833 को ब्रिटेन ने वहां मौजूद अर्जेंटीना के अधिकारियों को हटाकर फिर से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। अर्जेंटीना ने इस कार्रवाई को अपनी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन माना और तब से द्वीपों पर अपना संप्रभुता दावा जारी रखा है।

1982 का युद्ध

इसे लेकर वर्ष 1982 में अर्जेंटीना और यूनाइटेड किंगडम के बीच करीब 10 सप्ताह तक युद्ध हुआ। अर्जेंटीना के सैन्य शासन ने 2 अप्रैल 1982 को फॉकलैंड द्वीपों पर कब्जा कर लिया। अर्जेंटीना इन द्वीपों को लास माल्विनास (Las Malvinas) कहता है और उन पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है।

इसके बाद यूनाइटेड किंगडम ने सैन्य कार्रवाई करके द्वीपों पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर लिया। 14 जून 1982 को अर्जेंटीना की सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय पक्ष

फॉकलैंड द्वीप समूह वर्ष 1946 से संयुक्त राष्ट्र की गैर-स्वशासी क्षेत्रों (Non-Self-Governing Territories) की सूची में शामिल है और संयुक्त राष्ट्र इसे यूनाइटेड किंगडम द्वारा प्रशासित क्षेत्र के रूप में दर्ज करता है।

वर्ष 1965 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 2065 के माध्यम से अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच द्वीपों की संप्रभुता को लेकर विवाद को मान्यता दी और दोनों देशों से शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत करने का आग्रह किया। संयुक्त राष्ट्र इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत की मांग करता रहा है।

वर्ष 2013 में 99.8% द्वीपवासियों ने ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्र के रूप में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था। ब्रिटेन इसे द्वीपवासियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का स्पष्ट समर्थन मानता है, जबकि अर्जेंटीना इस जनमत-संग्रह को अपने संप्रभुता दावे को समाप्त करने वाला नहीं मानता।

तेल अन्वेषण से बढ़ा नया तनाव

हाल के वर्षों में द्वीपों के आसपास तेल और गैस के संभावित भंडार ने विवाद को एक नया आर्थिक आयाम दिया है। वर्तमान तनाव में अर्जेंटीना ने फॉकलैंड क्षेत्र में तेल अन्वेषण करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।

अर्जेंटीना ने तेल कंपनी Navitas Petroleum और उससे जुड़े अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की है। कंपनी फॉकलैंड के आसपास Sea Lion तेल परियोजना में 65% हिस्सेदारी रखती है, जबकि ब्रिटेन की Rockhopper Exploration के पास 35% हिस्सेदारी है। इस परियोजना से 2028 में तेल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

अर्जेंटीना का कहना है कि इन कंपनियों को उसके अधिकार वाले क्षेत्र में तेल गतिविधियों के लिए अनुमति नहीं मिली है, जबकि कंपनियां फॉकलैंड प्रशासन और ब्रिटेन से मिले लाइसेंस के आधार पर काम कर रही हैं।

अमेरिका और चीन का रुख

चीन अर्जेंटीना के संप्रभुता दावे का समर्थन करता है और फॉकलैंड द्वीपों को माल्विनास के नाम से संदर्भित करता है।

वर्ष 1982 के युद्ध में अमेरिका ने ब्रिटेन को रसद और खुफिया सहायता दी थी। लेकिन युद्ध के बाद अमेरिका ने फॉकलैंड की संप्रभुता के सवाल पर ब्रिटेन या अर्जेंटीना, किसी एक का खुलकर समर्थन नहीं किया और तटस्थ रुख बनाए रखा।

हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉकलैंड द्वीपों पर अमेरिका के इसी पुराने रुख की समीक्षा करने की बात कही है। इसके बाद ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि फॉकलैंड द्वीपों पर उसकी संप्रभुता को लेकर कोई संदेह नहीं है।

इस कारण फॉकलैंड विवाद में अब केवल अर्जेंटीना और ब्रिटेन के पुराने संप्रभुता दावे ही नहीं, बल्कि तेल संसाधनों और अमेरिका के बदलते रुख ने इसे केंद्र में ला दिया है।

 

(12 September) भारत सरकार (PMO), BRICS New Delhi Declaration

18वां BRICS शिखर सम्मेलन: प्रमुख मुद्दे और पहल

नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन की अध्यक्षता भारत ने की। वर्ष 2026 में BRICS सहयोग के 20 वर्ष भी पूरे हुए। भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रही।

BRICS के तीन मूल स्तंभ राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं जन-से-जन सहयोग के साथ भारत ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर जोर दिया। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए।

घोषणापत्र के प्रमुख मुद्दे और पहल

  1. वैश्विक संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र में सुधार

BRICS ने संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार तथा IMF और विश्व बैंक में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक भागीदारी की बात कही गई।

  1. व्यापार और टैरिफ

BRICS ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। व्यापार व्यवस्था को WTO के नियमों पर आधारित, खुला, निष्पक्ष और भेदभाव रहित बनाए रखने पर जोर दिया गया। WTO की विवाद निपटान व्यवस्था को फिर से प्रभावी बनाने की आवश्यकता भी बताई गई।

  1. स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान

BRICS देशों ने सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश तथा सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने के महत्व पर जोर दिया।

घोषणापत्र में सदस्य देशों की भुगतान और संदेश प्रणालियों को अधिक interoperable बनाने तथा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के लिए व्यावहारिक व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है।

इसमें BRICS की अपनी कोई अलग मुद्रा बनाने की घोषणा नहीं की गई है।

  1. न्यू डेवलपमेंट बैंक

BRICS के New Development Bank (NDB) की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया। विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण बढ़ाने की बात कही गई।

भारत की अध्यक्षता में BRICS-NDB Knowledge Portal भी शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य BRICS देशों के विकास और वित्तीय सहयोग से जुड़ी जानकारी और ज्ञान को साझा करना है।

  1. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीक

BRICS ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना। सुरक्षित, जिम्मेदार और व्यापक रूप से सुलभ AI के विकास तथा विकासशील देशों की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया।

साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों पर भी सहयोग की बात कही गई। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए Digital Public Infrastructure Repository की पहल भी की गई।

  1. स्टार्टअप और MSME

स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

BRICS Incubator Network के माध्यम से स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने की पहल का स्वागत किया गया। इसके अलावा Startup Innovation Fund के गठन पर आगे विचार करने की बात कही गई।

MSME के लिए वित्त, व्यापार, निर्यात, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं और डिजिटल वित्त तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

  1. आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा

BRICS देशों ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत और लचीला बनाने पर जोर दिया। इसके लिए Logistics Supply-Chain Cooperation Framework के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की बात कही गई।

ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण जैसी तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

  1. पश्चिम एशिया और ईरान-अमेरिका संघर्ष

पश्चिम एशिया की स्थिति पर BRICS ने गंभीर चिंता व्यक्त की। घोषणापत्र में सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई।

संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा प्रवाह पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखा गया तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया।

  1. शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा

BRICS ने IAEA के सुरक्षा उपायों के अंतर्गत आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। परमाणु सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन पर जोर दिया गया।

  1. गाजा और फिलिस्तीन

गाजा की स्थिति पर BRICS ने तत्काल युद्धविराम, मानवीय सहायता पहुंचाने और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया।

घोषणापत्र में फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन करते हुए दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने की बात कही गई।

  1. आतंकवाद

BRICS ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता का रुख दोहराया। 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले की भी निंदा की गई।

आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और सीमा-पार आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  1. स्वास्थ्य

स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, दूरस्थ चिकित्सा, स्वस्थ जीवनशैली, गैर-संचारी रोगों और मानसिक स्वास्थ्य पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई।

BRICS Training Hub Network और Network of Centres of Excellence जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत का NIMHANS इन पहलों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

  1. शिक्षा और कौशल

BRICS देशों ने तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET), डिजिटल साक्षरता तथा उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास पर जोर दिया।

युवाओं को रोजगार और बदलती तकनीकी जरूरतों के लिए तैयार करने तथा विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही गई।

  1. महिलाएं और युवा

महिलाओं की डिजिटल और वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

युवाओं के लिए स्टार्टअप, नवाचार, विज्ञान, कौशल, उद्यमिता और आपसी आदान-प्रदान से जुड़े सहयोग को बढ़ाने की बात कही गई।

  1. पर्यावरण और जलवायु

BRICS ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने पर जोर दिया। टिकाऊ जीवनशैली, वन संरक्षण और पुनर्स्थापन, जंगल की आग से निपटने, सर्कुलर इकोनॉमी, आपदा लचीलापन और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर सहयोग की बात कही गई।

इन क्षेत्रों में संयुक्त वक्तव्यों और ज्ञान-संग्रह तैयार करने जैसी पहलों को भी आगे बढ़ाया गया।

  1. कृषि और खाद्य सुरक्षा

कृषि क्षेत्र में डिजिटल कृषि, जलवायु-अनुकूल कृषि, बीजों और किसानों से जुड़े अधिकारों, कृषि अनुसंधान और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इसके लिए BRICS AGRIN, BRICS Network on Digital Agriculture और BRICS Network of Centres of Excellence on Agroecology and Regenerative Agriculture जैसी पहलों को आगे बढ़ाया गया।

BRICS Plus और Partner Countries

BRICS ने Partner Countries के योगदान को महत्वपूर्ण माना और उनके साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। साझा हितों से जुड़े व्यावहारिक सहयोग में Partner Countries की भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई।

भारत ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान Outreach/BRICS Plus Dialogue का भी आयोजन किया।

अगली BRICS अध्यक्षता

2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन करेगा। 19वां BRICS शिखर सम्मेलन भी चीन में आयोजित होगा। नई दिल्ली घोषणापत्र में BRICS देशों ने चीन की अगली अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है।

 

(11 September) bbc

बॉस स्कैम से साइबर ठगी

अहमदाबाद में एक रियल एस्टेट कंपनी से 1.5 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने कंपनी के मालिक (बॉस) की पहचान और व्हाट्सऐप प्रोफ़ाइल का दुरुपयोग करके कंपनी के अकाउंटेंट को तत्काल भुगतान का निर्देश दिया। अकाउंटेंट ने संदेश को सही समझकर 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफ़र कर दिए। जांच में पता चला कि अपराधियों ने पहले एक मैलवेयर युक्त ZIP फ़ाइल के माध्यम से कंपनी के सिस्टम और व्हाट्सऐप से संबंधित जानकारी हासिल की थी। इस प्रकार की साइबर धोखाधड़ी को “बॉस स्कैम” कहा जाता है।

ठगी का तरीका

कंपनी के मालिक को करीब छह महीने से व्हाट्सऐप पर ऐसे संदेश मिल रहे थे, जिनमें कहा जाता था कि उनके बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधियां मिली हैं और खाता सीज़ या बंद किया जा सकता है। संदेशों के साथ एक ZIP फ़ाइल भी भेजी जाती थी। शुरू में उन्होंने इन संदेशों पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन लगातार संदेश आने के कारण उन्होंने एक दिन इसकी जांच कराने के लिए वह संदेश अपने अकाउंटेंट को भेज दिया। अकाउंटेंट ने WhatsApp Web पर ZIP फ़ाइल डाउनलोड कर ली। पुलिस के अनुसार, फ़ाइल में मैलवेयर था, जिससे साइबर अपराधियों को कंपनी के सिस्टम और WhatsApp Web session तक पहुंच मिल गई। इसके बाद अपराधियों ने मालिक की प्रोफ़ाइल फोटो और पहचान का इस्तेमाल करके अकाउंटेंट को एक खाते में तुरंत 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफ़र करने का संदेश भेजा। अकाउंटेंट ने संदेश को सही समझकर राशि ट्रांसफ़र कर दी, जिसके बाद ठगी का पता चला।

बॉस स्कैम क्या है और कैसे काम करता है?

बॉस स्कैम में साइबर अपराधी कंपनी के मालिक, CEO या किसी बड़े अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करके उसके कर्मचारी को धोखा देते हैं। वे अधिकारी के नाम, फोटो या दूसरे उपलब्ध विवरण का इस्तेमाल करके कर्मचारी, खासकर अकाउंटेंट या वित्त विभाग के कर्मचारी को पैसे ट्रांसफ़र करने का निर्देश देते हैं।

कुछ मामलों में अपराधी मैलवेयर वाली ZIP फ़ाइल के जरिए कंप्यूटर या सक्रिय WhatsApp Web session तक पहुंच बनाते हैं। इसके बाद वे वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करके कर्मचारी को भुगतान का निर्देश देते हैं। हालांकि, हर बॉस स्कैम में मैलवेयर का इस्तेमाल होना जरूरी नहीं है।

इस ठगी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपराधी अक्सर सीधे बैंक खाते को हैक करने के बजाय कर्मचारी के भरोसे का फायदा उठाते हैं। वे ऐसा माहौल बनाते हैं जिसमें कर्मचारी को लगता है कि संदेश उसके बॉस का ही है और भुगतान तुरंत करना जरूरी है। इसे सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) कहा जाता है।

बड़ा साइबर नेटवर्क

इस मामले की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पता चला। पुलिस ने करीब 4,500 SIM cards बरामद किए। इनसे जुड़े मोबाइल नंबरों के खिलाफ 26 राज्यों से 251 शिकायतें भी मिलीं। इन शिकायतों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी समेत कई तरह के साइबर अपराध शामिल थे। जांच में इस नेटवर्क के तार चीन, पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े होने के संकेत भी मिले। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क में चीन में विकसित मैलवेयर और पाकिस्तान के इस्लामाबाद से जुड़े एक कॉल सेंटर का इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। जांच अभी जारी है।

पुलिस ने ठगी गई 1.5 करोड़ रुपये की रकम में से करीब 1.3 करोड़ रुपये बरामद कर लिए, जिसे पीड़ित को वापस किया गया।

साइबरक्राइम-एज़-ए-सर्विस

साइबरक्राइम-एज़-ए-सर्विस का मतलब है कि साइबर अपराध करने के लिए जरूरी तकनीकी साधन और सेवाएं अलग-अलग लोगों या समूहों से उपलब्ध कराई जाएं। हर अपराधी को खुद पूरी तकनीकी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत नहीं होती।

अहमदाबाद मामले की जांच में भी पुलिस को ऐसा ही एक नेटवर्क मिला। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए दूसरे साइबर अपराधियों को SIM कार्ड, OTP से जुड़ी सेवाओं और दूसरे तकनीकी साधनों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं। इसके लिए WhatsApp समूहों का भी इस्तेमाल किया जाता था। यानी साइबर अपराध भी कई हिस्सों में बंटकर किया जा सकता है। कोई समूह तकनीकी साधन उपलब्ध करा सकता है, जबकि दूसरा समूह उनका इस्तेमाल करके लोगों को ठग सकता है। इससे अपराधियों के लिए बड़े स्तर पर अलग-अलग तरह की ठगी करना आसान हो जाता है।

इससे कैसे बचें?

इस तरह की साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या फ़ाइल पर जल्दबाजी में भरोसा न करें। अनजान नंबर या ईमेल से आई ZIP, EXE, DLL या APK जैसी फ़ाइलों को डाउनलोड या खोलने से बचें।

अगर किसी परिचित व्यक्ति के नाम या फोटो से पैसे भेजने, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी देने या कोई जरूरी कार्रवाई करने का संदेश आए, तो उसी संदेश पर भरोसा करने के बजाय उस व्यक्ति से उसके पहले से मौजूद या जाने-पहचाने नंबर पर फोन करके पुष्टि करें। व्हाट्सऐप के Linked Devices की नियमित जांच करें और कोई अनजान डिवाइस दिखाई दे तो उसे तुरंत लॉग आउट करें। WhatsApp पर Two-Factor Authentication चालू रखें और फोन व कंप्यूटर के सुरक्षा सॉफ़्टवेयर को अपडेट रखें।

अगर धोखाधड़ी हो जाए, तो बिना देर किए 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

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